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जनसंकल्प से हारेगा कोरोना:फेफड़े 70 प्रतिशत खराब, ऑक्सीजन लेवल गिरा व सीटी स्कोर 16 से भी कम होने के बावजूद भी प्रेरणा से कोरोना से जीते रमेश

जालोरएक महीने पहले
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जालोर, स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होते हुए रमेश कुमार ने स्टाफ को हाथ जोडक़र धन्यवाद दिया। - Dainik Bhaskar
जालोर, स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होते हुए रमेश कुमार ने स्टाफ को हाथ जोडक़र धन्यवाद दिया।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान मरीजों की हालत ज्यादा खराब हो रही है और अधिकतर लोग मौत के शिकार हो रहे हैं। वहीं दूसरी लहर के संक्रमण के दौरान जिले में भी हालात प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इस दौरान जिले में कई लोगों ने अपने परिजनों काे खौया है। अभी तक जिले में 76 लोगों की कोरोना के कारण मौत हो गई हैं।

वहीं जिला अस्पताल में कई लोग ऑक्सीजन पर हैं। लेकिन इन सभी के बीच ऐसे कई लोग है जो अपनी इच्छाशक्ति, सकारात्मक प्रेरणा व चिकित्सा विभाग के काेरोना वारियर्स के प्रयासों से इस महामारी काे मात देकर स्वस्थ होकर अपने घर पहुंचे है। ऐसा ही एक उदाहरण हैं जिले के नून गांव निवासी 32 वर्षीय रमेश कुमार राजपुरोहित का। रमेश को सांस लेने में परेशानी होने के कारण परिजन 18 अप्रैल को जिला सार्वजनिक चिकित्सालय लेकर आये और भर्ती करवाया।

इस पर जब चिकित्सकों द्वारा जांच की, तो सीटी स्कैन स्कोर 16 से करीब आया। डॉक्टरों ने कहा कि फेफड़े 70 प्रतिशत तक खराब हो गये है और ऑक्सीजन लेवल इतना कम था कि मरीज बेड पर भी हिल-डूल तक नहीं पा रहा, जिसके बाद उन्होंने व उनके साथ आये उनके भाई रतनसिंह ने वर्तमान में अस्पताल की परिस्थितियों को देखकर घबरा गये। लेकिन भाई रतनसिंह ने रमेश कुमार को हिम्मत बंधवाते हुए हर समय खाते रहते की बात कही।

हर समय पौष्टिक आहार व हल्का खाना खाते रहने की बात कही। जिससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी। इसके साथ ही अस्पताल में चिकित्साकर्मियों द्वारा मरीज व उनके परिजनों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हुए उपचार किया। चिकित्साकर्मी सदैव रमेश के जल्द ठीक होने की बात कहकर उससे भी गंभीर मरीजों के केयर करने पर ठीक होकर घर जाने की बात करते रहे। जिससे मरीज का आत्मविश्वास बढा और जल्दी स्वस्थ होने की इच्छाशक्ति बढ़ी।

मरीज अपने भाई की सहायता से फल आदि का नियमित सेवन करते रहे और चिकित्साकर्मी पुरुषोत्तम गर्ग व किशन फुलवारिया के दिशा निर्देशन में अपना ध्यान रखने लगे। इसके कारण 12 दिन के भीतर उनकी ऑक्सीजन लेवल 98 से ऊपर होने के बाद रमेश कुमार को 30 अप्रैल को डिस्चार्ज किया गया। इस प्रकार अपने आत्मविश्वास, भाई की प्रेरणा व चिकित्साकर्मियों के सकारात्मक मार्गदर्शन व उपचार के कारण रमेश स्वस्थ होकर घर गये और आज उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है।

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