चाटवाड़ा पंचायत में फर्जीवाड़ा:डेढ़ साल में गई सरपंची; दो साल कम थी उम्र तीन साल बढ़ा दी थी, सरपंच अयोग्य घोषित

जालोर2 महीने पहले
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  • 19 वर्ष की उम्र थी, चाहिए थी 21, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र में 22 साल करवा दी थी, शपथ पत्र में भी छेड़छाड़, वरिष्ठ सिविल न्यायालय का फैसला

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवा कर चाटवाड़ा पंचायत के सरपंच बने महेश देवासी को डेढ़ साल में ही कुर्सी गंवानी पड़ गई। यह फर्जीवाड़ा जनवरी 2020 में हुए चुनाव के दौरान किया गया था। बुधवार को भीनमाल के वरिष्ठ सिविल न्यायालय के पीठासीन अधिकारी बृजपालदान चारण ने ने सुनवाई के बाद सरपंच को अयोग्य घोषित करार दिया। सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 21 वर्ष उम्र की अनिवार्यता पूरी करने के लिए सरपंच ने तब 19 का होते हुए पंचायत से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर 3 साल उम्र बढ़वा दी थी।

जानकारी के अनुसार चाटवाड़ा निवासी करण सिंह पुत्र नारायण सिंह ने 12 फरवरी 2020 को वरिष्ठ सिविल न्यायालय भीनमाल में याचिका दायर की थी। आरोप था कि चाटवाड़ा सरपंच महेश देवासी ने नामांकन में कूटरचित व फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। सुनवाई के दौरान याचिका में बताया कि सरपंच ने नामांकन के दौरान ग्राम पंचायत चाटवाड़ा के सहायक ग्राम सेवक भलाराम द्वारा जारी जन्म प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। जांच के दौरान उक्त जन्म प्रमाण-पत्र फर्जी पाया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नंदपालसिंह देवड़ा ने पैरवी की।

प्रमाण पत्र बनाने वाला ग्राम सेवक गिरफ्तार हो चुका

जन्म तिथि में हेराफेरी कर ग्राम पंचायत चाटवाडा से जन्म प्रमाण पत्र जारी करवाकर सरपंच चुनाव लड़ने के मामले में करडा पुलिस ने कनिष्ठ सहायक को गिरफ्तार किया था। 26 फरवरी 2020 को चाटवाडा निवासी जितेन्द्र सिंह ने करडा पुलिस थाने में चाटवाडा सरपंच महेश कुमार देवासी की उम्र चुनाव लडऩे योग्य नहीं होने के पर जन्मतिथि में हेरफेर करने का मामला दर्ज करवाया था। इस संबंध में रिपोर्टकर्ता ने महेश कुमार, उनके पिता सुरताराम व तत्कालीन ग्राम सेवक भलाराम मेघवाल के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया था। पुलिस वणधर निवासी कनिष्ठ सहायक भलाराम मेघवाल को गिरफ्तार कर लिया था।

उम्र के फर्जीवाड़े का प्रदेश मेंं संभवतया पहला मामला

पिछले पंचायतीराज चुनाव के दौरान राज्य सरकार ने नामांकन के लिए 8 वीं पास अनिवार्य कर दिया था। ऐसे में प्रदेश समेत जिले में भी कई सरपंचों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज से चुनाव लडऩे के मामले सामने आए थे। हालांकि इस चुनाव में अब तक पहला मामला सामने आया हैं। जिसमें सरपंच ने फर्जी जन्मतिथि दर्ज कर चुनाव लड़ा था।

स्कूली दस्तावेजों से खुला यह फर्जीवाड़ा

चुनाव से पहले महेश देवासी ने फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र बनाया था। इसमें 19 की जगह 22 कर दी थी। बाकी दस्तावेजों में सही थी। हालांकि चुनाव में शपथ-पत्र दिया था, उसमें भी छेड़छाड़ की गई थी। मामला जब उजागर हुआ शिकायत कर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत सभी विद्यालय दस्तावेजों की कॉपी मांगी तो इस मामले का खुलासा हुआ। महेश देवासी की उम्र 19 वर्ष ही साबित हो रही हैं, जबकि पेश किए गए शपथपत्र में आयु 22 वर्ष बताई गई है।

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