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जीएसटी की धारा 83 का दायरा बढ़ा:टैक्स चोरी पर लगेगी लगाम, टैक्स कम बताया तो व्यापारी के साथ सीए की प्रॉपर्टी और बैंक खाता भी सीज हाेगा

जालोर7 दिन पहले
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  • गलत दस्तावेज पेश करने पर करदाता कंपनी के डायरेक्टर, सलाहकार भी आएंगे दायरे में

सरकार ने जीएसटी में टैक्स चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट में घालमेल रोकने के लिए नए नियम जोड़े हैं। ये नियम व्यापारियों, टैक्स प्रोफेशनल के लिए परेशानी बन रहे हैं। अब धारा 83 के तहत कारोबारी की केवल टैक्स डिमांड के समय ही नहीं, बल्कि रिटर्न में गलती, टैक्स चोरी, ई-वे बिल में गलती पर भी कारोबारी की प्रॉपर्टी, खाते अटैच किए जा सकते हैं।

सीए, कर सलाहकार के साथ ही कारोबारी करदाता से जुड़े अन्य भी इस दायरे में उलझ सकते हैं। क्योंकि अब इस कार्रवाई में करदाता के साथ ही व अन्य शब्द भी जोड़ दिया गया है। यानी अधिकारी टैक्स संबंधी मामले में कई लोगों पर कार्रवाई कर सकते हैं।
ये 2 बात आपके लिए जानना जरूरी
ई-वे बिल की एक दिन में वैधता 100 से बढ़ाकर 200 किलोमीटर की
1. जितना क्रेडिट उतना ही क्लेम::बजट में इनपुट टैक्स क्रेडिट का नियम भी बदल गया है। अब जितना क्रेडिट कारोबारी के रिटर्न 2ए में दिखेगा उतना ही वह क्रेडिट क्लेम कर सकेगा। जिन कारोबारी की कर योग्य बिक्री 50 लाख प्रति माह से अधिक है उन्हें कुल टैक्स का एक फीसदी नकद देना होगा।

ई-वे बिल पर पेनल्टी 25 फीसदी
2. ई-वे बिल में अब एक दिन की वैधता 200 किलोमीटर तक होगी। पहले 100 किलोमीटर थी। इसमें विभाग का मानना था कि एक ही बिल पर कई बार ट्रांसपोर्टर माल का परिवहन कर टैक्स चोरी कर लेते हैं। पहले ई-वे बिल के प्रावधान के उल्लंघन पर पेनल्टी की 10 फीसदी के बराबर राशि जमा करने पर अपील हो सकती थी, लेकिन अब नए नियम से पेनल्टी व टैक्स दोनों मिलाकर कुल 25 फीसदी हो सकेगी। ई-वे बिल में गड़बड़ी पाए जाने पर पहले 1000 रुपए पर 100 रुपए की पेनल्टी भुगतनी पड़ती थी, नए प्रावधान के तहत अब यह बढ़कर 250 रुपए हो गई है।

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