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बैरी भये सरकार:ये बेरी ही सहारा; तालाब रीतते ही पेटे में हर 20 दिन में 3x5

जालोर25 दिन पहले
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  • आजादी के 7 दशक बाद भी नेहड़ क्षेत्र के लिए पानी नहीं पहुंचा सकीं तमाम सरकारें
  • फीट के गड्‌ढे खोद प्यास बुझा रहे 10 हजार ग्रामीण और मवेशी

जालोर जिले के चितलवाना के नेहड़ क्षेत्र में तालाब के सूखे पेटे में खुदे ये गड्‌ढे़ स्थानीय बोली में बेरी कहे जाते हैं। इलाके के आधा दर्जन गांवों की करीब 10 हजार की आबादी इन्हीं बेरियों के मटमैले पानी से प्यास बुझती है। क्योंकि इस इलाके में तमाम सरकारें आजादी के 7 दशक बाद भी पानी का इंतजाम नहीं कर पाई हैं। ये हालात जिला मुख्यालय से 200 किमी दूर स्थित भवातड़ा, रणखार, आकोडिय़ा, कुकडिय़ा जैसे गांवों के हैं। क्योंकि यहां न नल हैं न हैंडपंप।

नल न हैंडपंप, एक बेरी से 2 से 25 दिन पानी मिलता है

  • तालाब में बारिश का पानी सूखते ही यही विकल्प। बेरी 3 फीट चौड़ी व 5 से 7 फीट की गहरी होती है।
  • जिले के अंतिम गांव भवातड़ा के तालाब में 40 से अधिक कच्ची बेरियां 1 साल में खुदी।
  • ग्रामीण गफूर खां बोले- एक कच्ची बेरी 20 से 25 तो कुछ 2 दिन में सूख जाती हैं।
  • नई बेरी खोदने में पूरा दिन लग जाता है। कुछ दिन ही पानी मीठा रहता है फिर खारा हो जाता है, जिसे पशु पीते हैं।
  • बेरी का पानी खारा हो जाने ग्रामीण आपस में मिलकर नई बेरी खोदते हैं। यही नियती बन चुकी।

कब बदलेंगे हालात: 2 साल लग जाएंगे, नेहड़ में पानी आते-आते

जलदाय विभाग के एक्सईएन बीएल कुमावत का कहना है कि क्षेत्र में अभी पानी के टैंकर पहुंचा रहे।हैं। भवातड़ा में सरपंच ने भुगतान नहीं होने की बात कहते हुए कुछ दिनों से टैंकरों को बंद करवा दिया है। नेहड़ क्षेत्र को पेयजल से जोडऩे के लिए अभी दो साल लग जाएंगे। जल जीवन मिशन के तहत 2 वर्षों में जोड़ दिया जाएगा।

दावा : टैंकर पहुंचाने का, लेकिन 15 दिन से बंद

प्रशासन का दावा है कि पानी की समस्या के चलते नेहड़ क्षेत्र के सभी गांवों में पानी टैंकरों में पहुंचाया जा रहा हैं। भवातड़ा में पिछले करीब 15 दिनों से एक भी टैंकर नहीं पहुंचा है। यहां के ग्रामीण कच्ची बेरी का ही पानी पी रहे हैं।

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