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नवरात्रि पर पहली बार भास्कर में पढि़ए:मन्नत पूरी होने पर बाण माता मंदिर में श्रद्धालु चढ़ाते घंटी

मंडार12 दिन पहले
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मन्नत की घंटियां
  • पहाड़ी पर स्थित मंदिर के आसपास जंगली जानवरों की आवाजाही

यह है मगरीवाडा स्थित बाण माता का मंदिर, जहां सैकड़ों घंटियां टंगी हुई है। ये घंटियां मन्नत पूरी होने पर लोगों ने लगाई है। घने जंगल के बीच पहाड़ी स्थित इस मंदिर में जाने के लिए पहले 200 फीट तक सीसी सड़क, 100 सीढिय़ां और फिर पगडंडी के रास्ते यहां पहुंचना पड़ता है। हर साल शारदीय नवरात्र में यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं और मन्नत की घंटी चढ़ाते हैं।

जंगली जानवरों की आवाजाही होने से पुजारी भी शाम ढलने से पहले घर लौट आता है। पहाड़ी के मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं होने से मगरीवाडा के स्वर्गीय ठाकुर पृथ्वी सिंह देवड़ा ने मंदिर जाने वाले मार्ग पर पहाड़ी की तलेटी में बाण माता का मंदिर बनवाया है, ताकि श्रद्धालु यहीं आस्था प्रकट कर सकें।

मंदिर के पुजारी सेलाराम रावल ने बताया कि यह मंदिर 500 साल पुराना है। पहले मंदिर पर आने के लिए किसी तरह का रास्ता नही होने के कारण पुजारी एक-दूसरे को साथ लेकर ढेडे मेड़े रास्ते से होकर माता के दरबार में पहुंच कर पुजा अर्चना करता था। मंदिर एक गुफा के बीच में बना हुआ है। गांव के गोविंद सिंह देवड़ा ने बताया कि पहले ग्रामीणों ने कच्चा रास्ता बनवाया अब ग्रामीणों की मदद से मंदिर तक जाने के लिए सड़क बनवाई जा रही है।

कई सालों से जल रही है यहां अखंड ज्योत
मगरीवाडा के विक्रम सिंह देवड़ा ने बताया कि बाण माता मंदिर पहाड़ी पर होने के बावजूद यहां कई सालों से अखंड ज्योत जल रही है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि अखंड ज्योत की शुरूआत कई सालों पहले हुई थी। मंदिर के घना जंगल है। बाण माता के प्रति लोगों में ऐसी आस्था है कि इस जंगल से कोई पेड़ नहीं काटता। सूखे पेड़ों की लकडिय़ां भी केवल दाह संस्कार के काम में ही ली जाती है।

20 साल पहले मूर्ति को चोर खुद रखने आया था
गांव के गोविंद सिंह ने बताया कि करीब 20 साल पहले माताजी की मूर्ति चोरी हो गई थी, जिसकी सूचना पुलिस को भी दी थी, लेकिन मूर्ति का कोई सुराग नहीं मिला। ऐसे में लोगों ने दूसरी मूर्ति यहां स्थापित की। माताजी के चमत्कार की वजह से 15 साल बाद एक कपड़े की थैली में अनाज के बीच रखकर चुराने वाला खुद मूर्ति को मंदिर परिसर में छोड़कर चला गया। सवेरे पूजा के लिए जब पुजारी पहुंचा तो ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। मूर्ति को पुन: स्थापित किया गया।

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