यहां दुल्हन नहीं, दूल्हा विदा होकर आता है:700 साल पहले बसा था जवाई गांव, शादी के बाद यहीं पर बस जाते हैं दूल्हे

माउंट आबू24 दिन पहले

दीपावली के बाद अब शादियों का सीजन शुरू होना जा रहा है। देवउठनी ग्यारस के बाद शहनाई गूंजने लगेंगी। इससे पहले आपको एक अनोखे गांव के बारे में बता रहे हैं। इस गांव के नाम के पीछे की कहानी कुछ रोचक है। माउंट आबू शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर एक गांव बसा जवाई गांव। इस गांव से दुल्हन की विदाई नहीं होती, बल्कि दूल्हा यहां आकर बसता है। यहां की लड़की से शादी कर उनके पति यहीं बसते हैं। यह गांव करीब 700 साल पुराना है। बताया जाता है कि यहां की एक लड़की से शादी के बाद उसके पति यहीं बस गए थे, इसलिए इस गांव का नाम जवाई पड़ा।

जवाई गांव।
जवाई गांव।

गांव के नारायण सिंह परमार ने बताया कि हमारे पूर्वज बताते थे कि आज से करीब 700 साल पहले इस गांव में लड़कियां ज्यादा थीं, जिससे उनकी शादी में समस्या रहती थी। दो भाइयों जीवाजी और कान्हाजी ने इस गांव की दो बेटियों से शादी की। जीवाजी ने रंबा से शादी कर जवाई गांव को बसाया और दूसरे भाई कान्हाजी ने पवना से शादी कर जवाई गांव से 10 किलोमीटर दूर जंगल की ओर कनारी ढाणी को बसाया।

जवाई गांव।
जवाई गांव।

माउंट आबू शहर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जवाई गांव में वर्तमान में 40 परिवार रहते हैं। यह परिवार परमार राजपूत है। इस गांव की आबादी 250 है। इसमें बसे परिवारों के कुछ लोग खेती, करी और गाड़ी चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। माउंट आबू के विशिष्ट आश्रम गोमुख से परमार, परिहार, सोलंकी और चौहानों की उत्पत्ति हुई। माउंट आबू के क्षेत्र में कुल 16 गांव है, जिनमें शेर गांव, उतरज गांव, गोवा गांव, मांच गांव, हेटमजी गांव, आरना गांव, साल गांव आदि हैं।

जवाई गांव से करीब 12 किलोमीटर दूर आजा माताजी का सबसे पुराना मंदिर है। जवाई गांव के पास स्थापित इस आजा माताजी के मंदिर को 1300 साल पुराना बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि शाम के समय मंदिर में घंटी बजती थी, तो एक साथ 99 झालर गूंज उठते थे।

रिपोर्ट: शिवा सिंह उमट

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