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  • 10 Years Ago, The Congress Dominated The District Council And Panchayat Committees, Could Not Manage The Booth Level Strategy Of BJP.

चुनाव:10 साल पहले जिला परिषद व पंचायत समितियों में था कांग्रेस का दबदबा, भाजपा की बूथ स्तर की रणनीति से संभल ही नहीं पाई

पाली9 महीने पहले
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  • प्रदेश में कांग्रेस सरकार की योजनाओं को भी नहीं भुना पाए, संगठन का जिला स्तर पर नेतृत्व नहीं होना भी बड़ा कारण

ठीक 10 साल पहले यानी वर्ष 2010 में जिले के गांवों में विकास की दिशा और दशा तय करने वाली जिला परिषद तथा पंचायत समितियों मेें कांग्रेस का दबदबा था। जिला प्रमुख कांग्रेस का हाेने के साथ ही 10 में से 8 पंचायत समितियों में कांग्रेस के प्रधान निर्वाचित हुए थे।

इसके अलावा शहरी निकायाें में भी कांग्रेस काफी मजबूत बनकर उभरी थी, भाजपा ने उसके तिलिस्म काे ऐसा छिन्न-भिन्न कर दिया है कि कांग्रेस संभल ही नहीं पा रही है। अब कांग्रेस की हालत लाेकसभा से लेकर विधानसभा और नगरीय निकायाें में भी काफी पतली हाे गई है। भाजपा के पंचायत चुनावाें में लगातार दूसरी बार जीतने के पीछे आखिर कारण क्या हैं? इस बार प्रदेश में कांग्रेस सरकार हाेने के बाद भी बुरी तरह से हार गई। आइए जीत हार के इस गणित को हम समझते हैं।

भाजपा की जीत इसलिए; नेताओं की पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता, जीत के लिए एक साथ जुटे

भाजपा की पिछले 10 सालाें में हर बूथ स्तर तक अपनी पहुंच बनाने के साथ ही जनप्रतिनिधियाें की सक्रियता सतत रूप से रहती है। इसके अलावा संगठन के प्रति नेताओं की प्रतिबद्धता हाेने के कारण वे सभी निर्णय सर्वसम्मति से ही लेते हैं। इसका असर यह है कि काेई भी चुनाव हाे सभी नेता एकजुट हाेकर उसी में ही जुट जाते हैं। यहां तक की बड़ा पदाधिकारी अपने गांव या अपने बूथ तक ही सीमित रहता है, ताकि उनके यहां पर काेई कमजाेरी नहीं रहे।

कांग्रेस लगातार इसलिए हार रही: नेतृत्व नहीं, नेताओं के कई गुट, आम जनता से जुड़ाव नहीं
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, मगर इसका फायदा उठाने में नाकामयाब रहने के पीछे संगठन का नेतृत्वकर्ता नहीं हाेना है। साथ ही जिले में कांग्रेस अब गहलाेत-पायलट गुटाें में बंटी है। स्थानीय नेताओं के गुट अलग से हैं। बूथ स्तर पर माैजूद कार्यकर्ता की याद ही किसी चुनाव के वक्त ही याद आती है।

आम जनता से अधिकांश नेता जुड़ाव भी नहीं रखते। इस बार चुनाव में ताे टिकट के दाैरान ही पर्यवेक्षक एक बार टिकट सीधे ही जमा कराने अाए। इसके बाद दिखे तक नहीं। वहीं स्थानीय नेताओं ने भी इस चुनाव काे गंभीरता से नहीं लिया। प्रदेश स्तर से भी स्थानीय स्तर पर नेताअाें काे दिशा-निर्देश नहीं दिए गए।

भाजपा ने माेदी, राममंदिर काे मुद्दा बनाया, कांग्रेस जवाब नहीं दे पाई
भाजपा ने इस बार पंचायत चुनाव में भी पीएम माेदी के चेहरे पर ही फाेकस किया। नेताओं की सभाओं में राममंदिर, कश्मीर मुद्दे काे लेकर मतदाताओं काे प्रभावित करने में कामयाब रहे, जबकि कांग्रेस नेता इस माहाैल काे भांप नहीं पाए। वे उनका जबाव देने के बजाय स्थानीय मुद्दाें काे भी छूने में नाकामयाब रहे। कांग्रेस पूरे चुनाव में गहलाेत सरकार के काेराेना में किए गए कार्याें काे ही गिनाती रही।

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