1300 साल पुरानी 9 खंड की कलात्मक बावड़ी:1985 तक कई गांवों के ग्रामीणों ने पिया पानी, पुरातत्व विभाग ले संरक्षण में बचे प्राचीन धरोहर का वैभव

पाली2 महीने पहले
सोजत रोड के निकट सवराड़ गांव की कलात्मक बावड़ी। जो इस तरह नौ खंडों में बनी हुई हैं।

जिले के सवराड़ (सोजत रोड) गांव की करीब 1300 साल पुरानी बावड़ी। जिससे सैकड़ों वर्षों तक कई गांवों के ग्रामीणों की प्यास बुझाई। आज अपने वैभव को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। ग्रामीण जिला कलक्टर से लेकर प्रदेश के आलाधिकारियों तक बावड़ी के संरक्षण की गुहार लगा चुके है लेकिन अभी तक कुछ हुआ नहीं। ऐसे में यह बावड़ी वर्तमान में जर्जर हो चुकी हैं। इससे हादसा होने का डर बना हुआ हैं। निकट ही मंदिर बना हुआ हैं। जहां रोजाना श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता हैं।

सोजत रोड के निकट सवराड़ गांव की प्राचीन बावड़ी जो वर्तमान में इस स्थिति में हैं।
सोजत रोड के निकट सवराड़ गांव की प्राचीन बावड़ी जो वर्तमान में इस स्थिति में हैं।
सोजत रोड के निकट सवराड़ गांव की प्राचीन बावड़ी जो वर्तमान में इस स्थिति में हैं।
सोजत रोड के निकट सवराड़ गांव की प्राचीन बावड़ी जो वर्तमान में इस स्थिति में हैं।

करीब 1300 साल पुरानी 9 खंड की सवराड़ गांव (सोजत रोड) की कलात्मक बावड़ी। जिसका वैभव आज भी आकर्षित करता हैं। इस बावड़ी से हजारों लीटर बरसाती पानी संग्रहित होता था तथा भूजल भी एकत्रित रहता था। कहते हैं कि यह बावड़ी कभी सूखी नहीं। वर्ष 1985 तक सवराड़ सहित आस-पास के कई गांवों के ग्रामीण यही से पेयजल लेकर जाते थे। लेकिन 1985 में अतिवृष्टि के दौरान बावड़ी की एक दीवार ढह गई। निकट ही बाबा रामदेव का मंदिर बना हुआ हैं। ऐसे में हादसे का अंदेशा बना रहता हैं। बावड़ी की मरम्म्त की मांग को लेकर गांव के महेन्द्र प्रजापत के नेतृत्व में पिछले पांच-छह सालों से ग्रामीण प्रशासन के द्वार चक्कर काट रहे हैं लेकिन अभी तक बावड़ी के संरक्षण को लेकर कुछ खास प्रयास नहीं हुए।

9 खंड की बावरी, प्रत्यके खंड तक पहुंचने के लिए बनी ही सीढ़ियां
9 खंड की यह बावड़ी में प्रत्यके खंड तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई थी। तथा प्रत्येक खंड पर रूकने के लिए काफी जगह थी। बावड़ी के प्रत्येक खंड के मेराप सुंदर घड़ाई किया हुआ हैं। बड़े-बड़े पत्थरों से बावड़ी का निर्माण किया गया था। बताते हैं कि बावड़ी का निर्माण नाग बाबा के कार्यकाल में हुआ। उस समय नदी में हमेशा पानी नहीं रहता था। इसलिए बावड़ी का निर्माण करवाया गया था।

पुरातत्व विभाग ले संरक्षण में
ग्रामीणों का कहना हैं कि पुरातत्व विभाग इस प्राचीन बावड़ी को अपने संरक्षण में ले तथा इसे धरोहर घोषित कर। इसकी मरम्मत करवाई जाए। जिससे की यह एक पर्यटन स्थल बन सके।

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