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मानवता की दी मिसाल:40 साल के युवक की गंभीर स्थिति देख छोड़ दिया खुद का बेड

पाली2 महीने पहलेलेखक: ओम टेलर
पाली। गम्भीर मरीज बाबूलाल को लहरिकंवर से पहले व्हीलचेयर पर वार्ड में भर्ती करने ले जाते हुए।

4 घंटे के लम्बे इन्तजार के बाद उसे अपनी बीमार वृद्ध पत्नी के लिए बेड उपलब्ध हुआ। व्हीलचेयर पर जैसे ही वार्ड में ले जाने लगे इतने में एक 40 साल का जवान मरीज आया उसका ऑक्सीजन लेवल महज 43 था।

युवक की गंभीर स्थिति को देख वृद्धा के पति ने चिकित्सक से कहा साहब, युवक जवान हैं उसकी तबीयत भी मेरी पत्नी से ज्यादा खराब हैं उसे इलाज की ज्यादा जरूरत हैं मैं मेरी पत्नी के लिए कुछ देर और इन्तजार कर लूंगा, आप उस जवान युवक को भर्ती उसका इलाज किजीए। मानवता अभी जिंदा हैं इसका जीता जागता उदाहरण शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे बांगड़ अस्पाल के कोविड ओपीडी में देखने को मिला।

पाली। मानवता की मिशाल पेश करने वाले भवरसिंह।
पाली। मानवता की मिशाल पेश करने वाले भवरसिंह।

हुआ यूं कि रोहट क्षेत्र के राणा (भांवरी) निवासी लेहर कंवर (60 वर्ष) को सांस लेने में दिक्कत होने पर उनके पति भंवरसिंह शुक्रवार सुबह उन्हें बांगड़ अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती करने लाए। अस्पताल की पर्ची भी बन गई, लेकिन बेड नहीं मिलने पर चिकित्सकों ने लेहर कंवर की नाजुक स्थिति देख उसे कोविड ओपीडी में व्हीलचेयर पर ऑक्सीजन देना शुरू कर दिया तथा भंवरसिंह को कहा जब बेड खाली होगा तब भर्ती कर देंगे।

पाली। कोविड ओपीडी में बेड मिलने की प्रतीक्षा करती लहर कंवर।
पाली। कोविड ओपीडी में बेड मिलने की प्रतीक्षा करती लहर कंवर।

चार घंटे के इन्तजार के बाद बेड मिला, वह भी युवक के लिए छोड़ दिया

9 नौ बजे से दोपहर एक बजे तक अपनी पत्नी लेहर कंवर के लिए बेड मिलने का भंवरसिंह इन्तजार करता रहा। लेहर कंवर की स्थिति देख दोपहर सवा एक के करीब उसे बेड आवंटित किया गया। यहां सेवा दे रहे पार्षद किशोर सोमनानी उन्हें व्हीलचेयर पर बैठा कर वार्ड में लेकर जाने ही लगे कि इतने में पूर्व उपसभापति व पार्षद राकेश भाटी अंदर आए। उन्होंने कहा कि डेंडा से 40 साल का बाबूलाल पुत्र उदाराम घांची नाम का मरीज आया हैं। चिकित्सक उसकी तबीयत ज्यादा खराब बता रहे हैं। उसका ऑक्सीजन लेवल मात्र 43 हैं। उसे पहले इलाज की जरुरत हैं। यह सून वृद्ध भंवरसिंह राजपुरोहित ने कहा युवक जवान हैं उसकी तबीयत मेरी पत्नी से ज्यादा खराब है उसका पहले इलाज होना चाहिए। यह कहकर उसने चिकित्सकों को अपनी पत्नी के लिए आवंटित किया गया बेड उस युवक को दे दिया और कहां कि घर में उसके छोटे-छोटे बच्चे होंगे। उसका जिंदा रहना ज्यादा जरूरी हैं। मैं मेरी पत्नी के इलाज के लिए कुछ घंटे और इन्तजार कर लूंगा। उनकी यह बात सून चिकित्सक व उपस्थिति सभी देखते रह गए।

पाली। ओपीडी के बाहर कार में बैठा मरीज बाबूलाल।
पाली। ओपीडी के बाहर कार में बैठा मरीज बाबूलाल।
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