पाली का जल संकट दूर करने बनेगी टनल:45 साल से साबरमती नदी में बह जाता था सेई बांध का 650 एमसीएफटी पानी, इस टनल के जरिए जवाई बांध को मिलेगा

पाली5 महीने पहलेलेखक: डीडी वैष्णव
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पहली बार देखें पाली का जल संकट दूर करने के लिए बन रही सेई बांध की टनल के अंदर की तस्वीर - Dainik Bhaskar
पहली बार देखें पाली का जल संकट दूर करने के लिए बन रही सेई बांध की टनल के अंदर की तस्वीर

समुद्र तल से 517.93 मीटर ऊंचाई पर बना है सेई बांध। 45 साल पहले बने इस बांध को जवाई बांध से जोड़ती है एक टनल (सुरंग)। यह टनल 6.7 किमी लंबी है। सुरंग की गहराई है 2.959 मीटर, इसे बढ़ाकर अब 4.09 मीटर किया जा रहा है। क्योंकि बरसात के दौरान मिलने वाला सरप्लस औसतन 650 एमसीएफटी पानी सालाना बहकर गुजरात की सारबमती नदी में चला जाता है।

सुरंग की गहराई बढ़ने से जवाई बांध में 650 की बजाय 855 एमसीएफटी पानी की आवक होने लगेगी। ऐसा करने से पाली जिले में वाटर ट्रेन चलाने की नौबत नहीं पड़ेगी। भास्कर ने टनल में पहुंचकर जाना जल संकट दूर करने के लिए दिन-रात चल रहे इस प्रोजेक्ट में किस तरह काम चल रहा है।

सरप्लस बरसाती पानी के लिए प्रदेश की यह पहली टनल, 6.7 किलोमीटर में से एक किमी क्षेत्र की गहराई 4.09 मीटर होगी
सेई बांध में बारिश में पानी आता है लेकिन पाली जिले को पूरा लाभ नहीं मिलता। टनल 6.7 किमी लंबी, 507 मीटर ऊंची है। यहां से पानी 42 किमी दूर जवाई बांध पहुंचता है। इस दौरान 10-15% पानी का रिसाव, वाष्पीकरण व रास्ते में उपयोग होने से लॉस होता। गत साल बजट में टनल गहरी करने का प्रावधान हुआ था। इसके बाद 65 करोड़ की लागत से 1.5 मीटर गहरी करने का काम गत साल सितंबर में शुरू हुआ, जो 3 साल में पूरा हो होगा।

टनल 4.09 मीटर गहरी होने पर 5 के बजाय 2 माह में पूरा पानी बहकर जवाई में आ जाएगा। अब तक 395 क्यूसेक आता था, जो बढ़कर 855 हो जाएगा। अतिरिक्त पानी मिलने से पाली को सालाना 4000 एमसीएफटी तक पानी आसानी से मिलेगा। खेती के लिए भी पर्याप्त उपलब्धता रहेगी। बांध में रहने वाला 80 एमसीएफटी डेड स्टोरेज पानी का भी उपयोग किया जा सकेगा।

पानी का बहाव नदी में बढ़ेगा, हमें 460 एमसीएफटी पानी अतिरिक्त मिलेगा
टनल की गहराई पहली बार बढ़ाई जा रही है। ऐसा उदाहरण राजस्थान में और कहीं नहीं है। टनल गहरी होते ही नदी में जल बहाव बढ़ेगा और सालाना 855 क्यूसेक पानी मिलेगा, यानी 460 एमसीएफटी पानी अतिरिक्त मिलेगा। - मनीष परिहार, एसई, जल संसाधन विभाग, पाली