20 हजार पार काेराेना मरीज:जिले में 743 नए मरीज, दाे माैतें, रानी तहसीलदार संक्रमित

पाली6 महीने पहले
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  • कोरोना का कहर- जिले में 5283 पहुंचा एक्टिव केस का आंकड़ा, बर पीएचसी में 9 स्वास्थ्यकर्मी और चाैकी

जिले में काेराेना के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। गुरुवार काे काेराेना के 743 नए संक्रमित मरीज सामने आए, जबकि दाे संक्रमिताें की काेराेना से माैत हुई। रानी में तहसीलदार काेराेना पाॅजिटिव आए, जबकि बर में चाैकी प्रभारी समेत 4 कांस्टेबल की रिपाेर्ट भी पाॅजिटिव आई है।

इसके साथ बर पीएचसी में डाॅक्टर, मेल नर्स प्रथम, जीएनएम, एएनएम, आशा सुपरवाइजर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और बिराटिया खुर्द उप स्वास्थ्य केंद्र पर जीएनएम भी पॉजिटिव आने के बाद उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लगा दिया। जानकारी के अनुसार जिले में काेराेना के अब तक 20492 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें 15209 मरीज स्वस्थ हाे चुके हैं। गुरुवार काे 2315 लाेगाें की सैंपलिंग हुई। जिले में अब तक काेराेना से 243 माैतें हाे चुकी है।

वर्तमान में 5283 केस अभी भी एक्टिव है। अप्रैल के 29 दिनाें में रिकवरी रेट का आंकड़ा 24.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74.21 प्रतिशत पर पहुंच गया है। जिले में अब तक 243279 लाेगाें की सैंपलिंग हाे चुकी है।

बांगड़ अस्पताल का जनरेशन प्लांट फेल, सीव रिप्लेस के लिए बुलाई तकनीशियनाें की टीम, आज ठीक हाेने की संभावना बांगड़ अस्पताल में बना ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट दाे दिन से खराब पड़ा है। तकनीशियनाें की टीम काे बुलाकर सीव ठीक करवाने का काम किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार बुधवार काे नाइट्राेजन और अन्य गैसाें काे ऑब्जर्व करने वाले सीव खराब हाे गए थे।

इससे अस्पताल प्रबंधन की सांसें फूल गई। हालात यह हाे गए कि बेड पर पाइपलाइन से जाने वाली ऑक्सीजन पर भर्ती मरीजाें काे ऑक्सीजन आना बंद हाे गई। यह ताे गनीमत रही कि अस्पताल प्रबंधन के पास में ऑक्सीजन सिलेंडर भरपूर मात्रा में थे, इसलिए काेई अनहाेनी नहीं हुई। कार्यवाहक पीएमओ डाॅ. आरके विश्नाेई ने बताया कि जनरेशन प्लांट में तकनीकी खराबी आ गई।

इसके चलते थाेड़ी परेशानी ताे हुई, लेकिन समय रहते सभी व्यवस्थाओं काे काबू में कर लिया गया। तुरंत तकनीशियनाें की टीम काे बुलाकर इसे ठीक करवाने का काम शुरू करवा दिया। संभवतया शुक्रवार सुबह तक जनरेशन प्लांट पूरी तरह से ठीक हाे जाएगा।

सांसें बचाने की लड़ाई : काेविड ओपीडी से वार्ड में जाने के लिए लगी कतार
यह नजारा काेविड वार्ड का है। जहां पर सांसें बचाने की खातिर गंभीर मरीज जिनका सीटी स्काेर 15 से ज्यादा और सेचुरेशन रेट 80 के आसपास था। ऐसे तकरीबन 9-10 मरीज बेड के इंतजार में ऑक्सीजन पर ही थे। एक वृद्धा अपने परिजनाें के साथ कुर्सी पर बैठी थी। जिनकी हालत काेविड ओपीडी में खड़े मरीजाें में सबसे ज्यादा गंभीर थी।

उधर, ओपीडी में गंभीर मरीजाें की लाइन काे कम करने के लिए कार्यवाहक पीएमओ डाॅ. आरके विश्नाेई दाेपहर 3 बजे तक व्यवस्था करते नजर आए। उन्हाेंने बताया कि बांगड़ अस्पताल में सभी बेड फुल है। ईएसआई अस्पताल में भी तकरीबन सभी बेड फुल हाे चुके थे।

इधर, डिस्चार्ज के बाद भी नहीं छाेड़ा पलंग, हाेमगार्ड बुलाने पड़े
सेचुरेशन रेट काबू में हाेने के बाद भी कई मरीजाें काे अस्पताल प्रबंधन ने डिस्चार्ज कर दिया। लेकिन फिर भी वे तबीयत सही नहीं हाेने का कहकर वहीं पर लेटे हुए थे। जबकि बेड की ज्यादा जरूरत काेविड ओपीडी में इंतजार कर रहे उन मरीजाें काे थी।

जाे सबसे ज्यादा गंभीर थे। तब आखिरकार अस्पताल प्रबंधन ने ठाेस कदम उठाते हुए गुरुवार शाम तकरीबन 4.15 बजे ठीक हाे चुके मरीजाें की सूची के साथ डाॅक्टर काे भेजा। जिन्हाेंने सभी मरीजाें की सेचुरेशन रेट के आधार पर घर जाने काे कहा। बाद में जिद के चलते बेड खाली नहीं करने वाले मरीजाें काे हाेमगार्डाें के जवानाें काे भेजकर बेड खाली करने हिदायत दी।

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