सिलिकोसिस केम्प आयोजित:जानलेवा बीमारी की चपेट में 800 पेशेंट, आज दिए 19 सर्टिफिकेट

पालीएक महीने पहले
बांगड़ हॉस्पिटल में मंगलवार को आयोजित केम्प में पहुंचे सिलिकोसिस मरीज।

पाली शहर के बांगड़ हॉस्पिटल में मंगलवार को सिलिकोसिस केम्प का आयोजन किया गया। केम्प में जिले भर से सिलिकोसिस मरीज पहुंचे। केम्प इंचार्ज डॉ ललित शर्मा ने बताया कि करीब 80 मरीज व उनके परिजन केम्प में आए। डॉ बालाराम चौधरी, रेडियोलॉजिस्ट ओमप्रकाश राठौड़ ने मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की। इस दौरान 19 सिलिकोसिस के सर्टिफिक्ट बांटे गए। जिनमें 11 जीवित सिलकोसिस मरीजों को तथा 8 सर्टिफिक्ट सिलिकोसिस बीमारी से मरने वाले मरीजों के परिजनों को दिए गए।

डॉ ललित शर्मा ने बताया कि इन सर्टिफिक्ट से सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित मरीजों को सरकार की ओर से तीन लाख रुपए की सहायता मिलती हैं। इसके साथ 1500 रुपए मंथली पेंशन के साथ सरकार की अन्य कई जनकल्याणकारी स्कीम का लाभ मिलता हैं। पाली जिले में करीब 800 सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित मरीज हैं। ज्यादातर मरीज बर, सोजत व बाली क्षेत्र के हैं। जो खदानों में खनन करने वाले एवं पत्थर घड़ाई का काम करने वाले हैं।

क्या हैं सिलिकोसिस बीमारी
सिलिकोसिस फेफड़ों से संबंधित बीमारी हैं। आमतौर पर खदानों, पत्थर का काम करने वाले मजदूर इस बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। धूल में सिलिका पाया जाता हैं। सिलिका क्रिस्टल की आकृति के सूक्ष्म कण होते हैं, जो पत्थर व खनिजों के कणों में पाए जाते हैं। कोई सिलिका युक्त धूल में सांस लेता हैं तो धीरे-धीरे सिलिका उनके फेफड़ों में जमा होने लगता हैं। ऐसी स्थित में फेफड़ों में स्कार बनने लग जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लग जाती हैं। क्योंकि सिलिका धूल के कण आकृति में नुकीले होते हैं जो फेफड़ों में जाकर एक ब्लेड की तरह काम करते हैं। जिससे फेफड़ों को नुकसान पहुंचता हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती हैं। खांसी, बुखार, वजन घटना, छाती में जकड़न इस बीमारी के लक्षण हैं। यह लाइलाज बिमारी हैं।