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नियम:सरपंच कुर्सी पर प्रतिनिधि बैठे तो कार्रवाई होगी

बर मारवाड़8 महीने पहले
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  • पंचायतों में महिलाओं के प्रतिनिधि संभालते हैं कार्यभार, तीन दिन गायब रही तो उपसरपंच संभालेंगे

सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत मुख्यालय में सरपंच खुद को ही पंचायत कार्यालय समय रहना होगा। हालांकि यह नियम पहले से ही लागू है। मगर अब सरकार इस नियम को कड़ाई से लागू करना चाहती है। वहीं इसको लागू करने में सरकार व प्रशासन की ओर से कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती है। उल्लेखनीय है कि महिला सरपंच हो या परिवार से कोई युवा सरपंच हो तो उनकी जगह उनके प्रतिनिधि कार्यालय का उपयोग करते रहे हैं तथा नाम तो महिला का चलता मगर सरपंचाई उनके ससुर या पति या पुत्र करते रहे हैं।

मगर अब वो ऐसा नहीं कर सकेंगे। सरकार द्वारा अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है कि महिला श्रेणी के सरपंच पदों पर निर्धारित निर्वाचित जनप्रतिनिधि कार्यालय में नहीं आते हैं तथा उनके स्थान पर उनके परिजन पंचायत कार्यालय में उपस्थित रहकर सरपंच के लिए निर्धारित सीट पर बैठते हैं एवं कर्मचारियों को निर्देश करते रहे हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

यह प्रवृत्ति गैरकानूनी तथा सरपंच पद की गरिमा के खिलाफ है। इस संबंध में विधिक प्रावधानों तथा राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार स्पष्ट किया जाता है कि सरपंच स्वंय प्रतिदिन कार्यालय समय में कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। यदि कुछ सरपंच लगातार तीन दिन तक कार्यालय से अनुपस्थित रहे तो ग्राम पंचायत के सचिव द्वारा इसकी लिखित सूचना विकास अधिकारी पंचायत समिति तथा जिला परिषद के नियंत्रण कक्ष में नोट कराई जाएगी। ऐसे सरपंच को पंचायती राज अधिनियम की धारा 32 (2) (ख) के तहत अनुपस्थित मानकर उपसरपंच को सरपंच का कार्य करने के लिए अधिकृत किया जा सकेगा।

शिकायत पर हाेगी कार्रवाई
ग्राम पंचायतों के सभी कार्मिकों तथा विकास अधिकारियों का विधिक दायित्व है कि पंचायती राज संस्थाओं के दैनिक कार्य संचालन में विधिक प्रावधानों तथा राज्य सरकार के निर्देशों की पालना करावे। यदि किसी जिम्मेदार अधिकारी को शिकायत मिलने के उपरांत भी कार्रवाई नहीं की जाती है तथा अन्य स्रोतों से शिकायत की पुष्टि होती है तो ऐसे अधिकारी अवचार व अपकीर्तिकर आचरण का दोषी होगा।

विकास अधिकारी करेंगे जांच: आरोप पत्र तैयार कर सीईओ को भिजवाएंगे

यदि सरपंच कार्यालय से अनुपस्थित है तथा उसका कोई परिजन सरपंच की सीट पर बैठता है कर्मचारियों को सरपंच की हैसियत बताकर निर्देश करता है या ग्राम पंचायत का रिकॉर्ड सरपंच को अवलोकन करवाने या हस्ताक्षर करवाने के लिए ग्राम पंचायत कार्यालय से बाहर ले जाता है तो सचिव द्वारा इसकी सूचना पंचायत समिति के विकास अधिकारी को की जाएगी। विकास अधिकारी ऐसे मामले में स्वयं जांच करेंगे तथा पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 (1) के तहत सरपंच के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद को भिजवाएंगे।

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