कोरोना ने पाली के कपड़ा उद्योग के रंग किए फीके:पटरी पर लौट रहे पाली के कपड़ा उद्योग पर कोरोना की तीसरी लहर की आशंका कर रही ब्रेक लगाने का काम, 35 प्रतिशत उत्पादन हुआ कम

पालीएक वर्ष पहले
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मंडिया रोड पर एक इकाई में काम करते श्रमिक। - Dainik Bhaskar
मंडिया रोड पर एक इकाई में काम करते श्रमिक।

अपने चटक रंगों के लिए देश-दुनिया में फेमस पाली का कपड़ा उद्योग लॉकडाउन के बाद से फिर से पटरी पर पूरी तरह नहीं लौटा भी नहीं कि कोरोना की तीसरी लहर की आहट ने फिर से मार्केट को मंदा करने का काम कर रही हैं। आलम यह हैं कि वर्तमान में कई छोटी इकाइंया बंद पड़ी हैं। जो बड़ी इकाइंया हैं वे भी 60 प्रतिशत क्षमता के साथ चल रही हैं। उद्यमियों की माने तो रंग रसायन व कोयला के बढ़े भावों से उद्यमियों के लिए कोढ़ में खाज का काम किया। उत्पादन लागत बढ़ने से भी ऑर्डर पहले के मुकाबले कम मिल रहे हैं। उद्यमियों की माने तो सालाना करीब 10 हजार करोड़ का कपड़ा पाली के उद्यमी बेचते थे जिसमें अब 35 प्रतिशत तक कमी आ गई हैं।

मंडिया रोड में एक इकाई में काम करते मजदूर।
मंडिया रोड में एक इकाई में काम करते मजदूर।

पाली शहर में मंडिया रोड, पुनायता व इंडस्ट्रीयल एरिया में वर्तमान में 480 (रेड कैटेगरी) रंगाई-छपाई की इकाइयां हैं तथा 70 के करीब ओरेंज कैटेगरी की इकाइयां हैं। रेड केटेगरी में वर्तमान में करीब 60 छोटी इकाईयां ऑर्डर नहीं मिलने से बंद पड़ी हैं। जो इकाइयां संचालित हो रही हैं वे भी अपनी 60 प्रतिशत क्षमता से संचालित हो रही हैं। सप्ताह में दो दिन का रोटेशन की पालना करनी पड़ती हैं तथा सुबह आठ से शाम आठ बजे तक इकाईयां संचालन की जाती हैं।

मंडिया रोड ट्रीटमेंट प्लांट।
मंडिया रोड ट्रीटमेंट प्लांट।

देश भर में जाता हैं पाली से कपड़ा
अपने चटक रंगों के लिए पाली देश भर में कपड़ा नगरी के रूप में फेमस हैं। उसकी का कारण हैं हैं कि पाली से ब्लाउज पीस, बलाउज के अस्तर का कपड़ा राजस्थान सहित साउथ, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र में विशेषकर जाता हैं। लॉकडाउन ने पाली का कपड़ा मंदा करने का काम किया। अब फिर कोरोना की तीसरी लहर पटरी पर लौट रहे पाली के पकड़ा उद्योग की रफ्तार को कम करने का काम कर रहा हैं।

मंडिया रोड औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित इकाइयां।
मंडिया रोड औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित इकाइयां।

उत्पादन क्षमता बढ़ने से बढ़ गए भाव
सीईटीपी के सचिव अरूण जैन ने बताया कि वर्तमान में इकाइंया अपनी 60 प्रतिशत क्षमता के साथ चल रही हैं। कई छोटी इकाइयां काम नहीं मिलने से बंद पड़ी हैं। इंडस्ट्रीज में मुख्य फ्यूल के रूप में काम आने वाले कोयले व कपड़ों को रंगने के काम आने वाले रंगों के भावों में भी काफी इजाफा हुआ। जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ गई। पहले से मंदी चल रही हैं। ऐसे में कई व्यापारी तो बढ़े भावों को देखते हुए ऑर्डर तक नहीं दे रहे।

ऑर्डर नहीं मिल रहे
उद्यमी विनोद संखलेचा व प्रवीण कोठारी ने बताया कि ब्लाउज पीस का माल ज्यादातर साउथ, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र क्षेत्र में सप्लाई होता हैं लेकिन लॉकडाउन के बाद से ऑर्डर कम आ रहे हैं। वहां से एक ही जवाब मिलता हैं कि पहला का भी स्टॉक पड़ा हैं। खरीदारी कम हो रही हैं। ऐसे में हमने भी उत्पादन कम कर दिया। क्योंकि फिलहाल डिमांड नहीं हैं। मार्केट गति पकड़े तो उद्योग को राहत मिले।

दीपावली तक गति पकड़ने की उम्मीद
उद्यमी सम्पतराज भंडारी ने बताया कि फिलहाल मार्केट में पाली के कपड़े की डिमांड कम हैं। कारण बिक्री नहीं होना हैं। इसके साथ ही कलर केमिकल के भी भाव काफी बढ़ गए। इससे कपडे़ के उत्पादन की लागत भी बढ़ रही हैं।

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