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  • Devotees Erected The Garameshwar Shiva Temple, 12 Jyotirlinga Under The Same Roof From The Mud Of Stone Palm Mountain From The Hills Of Gaermaghat.

सावन:गाेरमघाट की पहाड़ाें से पत्थर ताेड़ पर्वत की मिट्टी से श्रद्धालुओं ने खड़ा कर दिया गाेरमेश्वर शिव मंदिर, 12 ज्याेर्तिलिंग के दर्शन भी एक ही छत के नीचे

पालीएक महीने पहले
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  • पहली बार भास्कर में कीजिए गाेरमेश्वर महादेव के दर्शन- पाली व राजसमंद जिलाें की सीमा पर विराजे हैं गाेरमेश्वर महादेव, कुदरत करती है जलाभिषेक, 24 घंटे बादलाें से घिरा रहता है मंदिर का शिखर
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सावन के दूसरे साेमवार काे आज दर्शन करिए, गाेरमेश्वर महादेव के। यह गाेरमघाट की पहाड़ियाें में बिराजे हैं। सावन के महीने में महादेव के दर्शन के लिए प्रतिदिन काफी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। इस मंदिर की खासियत यह है कि यह दाे जिलाें पाली-राजसमंद की सीमा पर आबाद है।

मुख्य पुजारी मंगलनाथ की पहल पर श्रद्धालुओं ने पहाड़ाें के पत्थराें काे श्रमदान के जरिए ताेड़कर यहां अपनी आस्था की इमारत खड़ी की है। हर वक्त मंदिर का शिखर सावन के महीने में आसमान में मंडराते काले बादलाें से ढंका रहता है। काफी ऊंचाई पर हाेने के कारण गर्मी का यहां जरा भी अहसास नहीं हाेता।

मंदिर के निर्माण के बाद से ही यहां पर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश तथा कार्तिकेय जी की भी प्रतिमाएं हैं। शिवलिंग पर हर वक्त जलभिषेक हाेता रहता है। इसी प्रकार मंदिर परिसर में ही 12 ज्याेर्तिलिंग भी स्थापित है। मंदिर परिसर में 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना भी योगी परशुरामनाथ महाराज द्वारा की गई।

हर साेमवार काे इन ज्याेर्तिलिंगाें की विशेष पूजा-अर्चना के साथ ही महारूद्राभिषेक का आयाेजन भी पुजारियाें की तरफ से करवाया जा रहा है। साेमवार काे दाेनाें वक्त भाेजन-प्रसादी का आयाेजन भी श्रद्धालुओं के सहयाेग से किया जा रहा है।

पहले नीचे मंदिर में बिराजे थे शिव, वह जीर्ण-शीर्ण हुआ ताे पुजारियाें की पहल पर श्रद्धालु आगे आए, 2 साल की कड़ी मेहनत से पूरा मंदिर श्रमदान से ही खड़ा किया

पुरातनकाल से प्रमुख संत गाेरखनाथ के हाथाें से स्थापित शिव मंदिर जीर्ण-शीर्ण हाे गया था। इसी काे देखते हुए मंदिर के पुजारियाें ने आसपास के गांवाें के शिवभक्ताें काे बुलाकर ऊपर की तरफ मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा। जमीन से करीब 6 किमी ऊपर पहाड़ाें पर पत्थर लाना काफी मुश्किल काम था।

इसकाे देखते हुए पुजारियाें ने ग्रामीणाें के सहयाेग से पहाड़ाें के पत्थराें काे ही ताेड़ना शुरू कर दिया। साथ ही ऊपर से ही इस मिट्टी का उपयाेग कर करीब 2 साल की मेहनत से शिव मंदिर स्थापित कर दिया। बाद में एक ही स्थान पर देश के सभी ज्याेर्तिलिंगाें के दर्शन लाभ मिले। इसलिए यहीं पर 12 ज्याेर्तिलिंग स्थापित किए।

राजसमंद और पाली दाेनाें जिलाें से मंदिर तक पहुंचने के लिए 5 पगडंडी, प्रतिदिन पहुंचते हैं श्रद्धालु

राजसमंद तथा पाली जिले से पहुंचने के लिए 5 रास्ते हैं। यह पांचाें रास्ते खतरनाक पगडंडी के रूप में है। पाली के सारण, गाेरमघाट स्टेशन, काजलियावास, जाेगमंडी है। वहीं राजसमंद से काछबली हाेकर मंदिर में अाया जा सकता है। यह पगदंडियां इतनी खतरनाक हैं कि पूरे रास्ते बहुत ही संतुलन के साथ संभलकर चलना पड़ाता है।

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