पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

बांगड़ अस्पताल:डॉक्टरों का राउंड होने पर बाहर, बाद में कोरोना वार्ड के अंदर पहुंच जाते हैं मरीजों के परिजन, संक्रमित होने का भी डर नहीं

पालीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

बांगड़ अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के लिए बनाए गए वार्ड अब तक हाईरिस्क जोन थे, मगर प्रबंधन की लापरवाही से अब रिस्कजोन बन गए हैं। सबसे संवेदनशील माने जाने वाले इन वार्डों में डॉक्टरों के साथ नर्सिंग स्टाफ भी बिना पीपीई किट प्रवेश नहीं करता, मगर यहां पर हर कोई मुंह उठाए चला आ रहा है। भास्कर के रिपोर्टर व फोटो जर्नलिस्ट ने शुक्रवार को इन वार्डों में बाकायदा पीपीई किट पहनकर देखा तो कोरोना वार्डों में जाने वालों को रोकने वाले गार्ड गायब है।

पहले की तरह पुलिस की व्यवस्था भी अब बंद कर दी है। हालात यह है कि कोविड वार्ड में कोई भी घूम कर आ जाए या खाना देकर चला जाए कोई नहीं पूछने वाला भी नहीं हैं। व्यवस्थाओं काे बिगाड़ने वाले सबसे ज्यादा यहां एडमिट मरीजों के रिश्तेदार-परिजन ही है। बिना पीपीई किट के ही मरीजों से मिलने के लिए वार्डों में पहुंच रहे हैं।

दृश्य-1: कोविड केयर सेंटर में बेड के पास ही बैठे

कोरोना वार्ड में ही परिचित एडमिट हुआ तो उससे मिलने के लिए कुछ लोग वार्ड में ही पहुंच गया। हाल-चाल पूछने के बहाने यह लोग संक्रमित के बेड के पास ही जाकर बैठ गए। न तो सोशल डिस्टेंसिंग है। न ही मुंह पर मास्क लगा रखा है।

दृश्य-2: बिना पीपीई किट पहने ही पहुंची महिला

बांगड़ अस्पताल के कोरोना वार्ड में किसी को आने की मनाही है, मगर यह महिला अपने परिजन से मिलने के लिए जा रही है। इसे रोकने और टोकने वाला कोई नहीं है। पीपीई किट भी नहीं पहन रखा, मात्र मुंह को अपनी साड़ी के पल्लू से ढंक रखा है।

वार्डाें में कभी भी आ-जा सकते है बाहरी लोग

इस अस्पताल में सैद्धांतिक तौर पर सिर्फ यह तय है कि डॉक्टर्स के राउंड के समय मरीजों के परिजनों का वार्ड में प्रवेश वर्जित है। अब इसकी भी पालना नहीं होती, क्योंकि डॉक्टरों के राउंड का भी कोई वक्त तय नहीं है। पूरा काम नर्सिंग स्टाफ के ही हवाले कर रखा है। डॉक्टरों का राउंड वैसे सुबह आठ बजे से दस बजे और रात में आठ बजे के आसपास होता है। सिर्फ इस समय के आसपास ही मरीज के पास परिजन का वार्ड में हाेना मना है। इसके पहले और बाद में पूरे दिन और रात में किसी भी समय मरीज के आसपास रहने में किसी तरह की कोई रोक-टोक नहीं है।

चाय, खाना और नाश्ता लेकर भी पहुंच रहे परिजन, रोकने वाला कोई नहीं है

कोरोना वार्डों में अब लक्षण वाले मरीज ही ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के पास जाने का मतलब ही कोरोना को गले लगाना है। इसके बाद भी परिजन तथा रिश्तेदार नहीं मान रहे। अस्पताल में चाय, काढ़ा, दोनों वक्त का भोजन तथा नाश्ता तक की व्यवस्था सेवा समिति की तरफ से हो रही है। इसके बाद भी वे चाय, नाश्ता तथा भोजन लेकर पहुंच रहे हैं। इन लोगों के पास ना ताे मास्क है और ना ही पीपीई किट। परिजन खुद मरीजों के पास दवा, खाना और अन्य सामग्री पहुंचा रहे हैं। सामान्य वार्डों की तरह कोई भी इधर-उधर घूम कर आ सकता है।

सिस्टम ही नहीं, हम भी दोषी, क्योंकि काेराेना खत्म नहीं हुआ, सतर्क रहिए

कोरोना वैश्विक महामारी का संकट पूरे विश्व में है। इसे रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और कोरोना को लेकर सचेत रहने की जिम्मेदारी हमारी भी है। एक बार पॉजिटिव आने से परिवार को कितनी परेशानी उठानी पड़ती है। बांगड़ अस्पताल में साफ तौर पर नजर आ रही लापरवाही में सिस्टम तो जिम्मेदार है ही। साथ ही आमजन भी लापरवाह है कि वे कोरोना महामारी को हल्के में ले रहे हैं। पॉजिटिव के वार्ड में जाकर संक्रमितों से मिलकर संक्रमण को अपने गले लगाने का खतरा मोल ले रहे हैं।

पीपीई किट पहनना जरूरी, जल्द कमेटी बनाकर व्यवस्था सुधारेंगे: डॉ. चौधरी

अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना वार्ड में आने के लिए पूरी तरह से रोक लगा रखी है। इसके बाद भी जरूरत हाेने पर आए ताे पीपीई किट पहनना जरूरी है। गार्ड भी तैनात है। इसके बाद भी अगर कोई आ-जा रहा है तो उनको पूरी तरह से रोका जाएगा। शीघ्र ही एक कमेटी भी बनाई जाएगी।
- डॉ. एचएम चौधरी, कार्यवाहक पीएमओ, बांगड़ अस्पताल


आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- घर-परिवार से संबंधित कार्यों में व्यस्तता बनी रहेगी। तथा आप अपने बुद्धि चातुर्य द्वारा महत्वपूर्ण कार्यों को संपन्न करने में सक्षम भी रहेंगे। आध्यात्मिक तथा ज्ञानवर्धक साहित्य को पढ़ने में भी ...

और पढ़ें