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संसद में फिर जवाई पुनर्भरण का राग:इस साल सूखे के हालात बने ताे गुजरात-राजस्थान के बीच अटका प्राेजेक्ट आया याद, साबरमती बेसिन प्रोजेक्ट

पाली2 महीने पहले
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जिले में इस साल सूखे के हालात बनते ही एक बार फिर संसद में जवाई पुनर्भरण का राग शुरू हो गया है। सांसद पीपी चौधरी ने पाली, जालाेर व सिराेही जिले के महत्वपूर्ण जवाई पुनर्भरण काे लेकर तैयार याेजना की डीपीआर बनने के बाद भी केंद्र सरकार की अाेर से काेई कवायद नहीं हाेने पर मंगलवार काे लाेकसभा में नियम 377 के तहत सरकार का ध्यान आकर्षित करवाया।

उन्होंने कहा कि जिले के किसानों को सिंचाई का पानी मिलना तो दूर पीने के पानी के लिए लगातार रूप से आम लोगों को जूझना पड़ा है। जिले में जवाई बांध ही पीने एवं सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। जवाई बांध की कुल भराव क्षमता 7327 एमसीएफटी है, जो कि पिछले 30 सालाें में मात्र 6-7 बार अपनी भराव क्षमता तक पहुंच पाया है। बांध की निर्भरता पूर्ण रूप से बारिश पर ही निर्भर है। बरसात से बांध में एकत्र होने वाला पानी केवल पीने के पानी की मांग को पूरा करने में मुश्किल से सक्षम हो पा रहा है।

सांसद ने कहा कि जिले की मांग वर्तमान स्तरों के साथ पूरी नहीं की जा सकती है, क्योंकि बांध में पानी की औसत आवक 3800 एमसीएफटी है और जिले की मांग पीने व सिंचाई के लिए क्रमशः 3500 और 4500 एमसीएफटी है। किसी वर्ष बारिश नहीं होने पर पूरा पाली जिला एकदम सूखे की स्थिति में पहुंच जाता है। एेसे ही हालात बनने पर 2 साल पहले वाटर ट्रेन भी चलानी पड़ी थी।

सांसद की मांग - पुनर्भरण परियोजना की जल्द सहमति दे सरकार
सांसद चौधरी ने सदन के माध्यम से सरकार को बताया कि वैपकॉस लिमिटेड भारत सरकार के केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है। कंपनी द्वारा जारी संशोधित डीपीआर में साबरमती बेसिन के अधिशेष जल के डायवर्जन से जवाई बांध को भरने की योजना बारे में बताया गया। इसके अनुसार परियोजना को दो भागों में किया जाना है। इसमें कुल अनुमानित लागत राशि 6521.84 करोड़ है। इस परियोजना से पाली जिले के 787 गांवों, 9 शहरों और सिरोही जिले के अन्य शहरों और गांवों में पानी की आपूर्ति में मदद मिलेगी। सांसद ने बताया कि साबरमती बेसिन के अधिशेष प्रवाह अरब सागर में व्यर्थ जाता है। इस अधिशेष जल को जवाई नदी की ओर मोड़ा जा सकता है। इससे पाली, जालोर, सिरोही और अन्य आसपास के शहरों में पीने के पानी की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी।

गुजरात सरकार नहीं दे रही सहमति, इसलिए अटका प्राेजेक्ट
जवाई पुनर्भरण याेजना काे लेकर साबरमती बेसिन से पानी डायवर्ट कर जवाई बांध तक पहुंचाने के मामले में अभी तक गुजरात सरकार बातचीत के लिए राजी नहीं हाे पाई है। इसकाे लेकर राज्य सरकार की अाेर से भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन अभी तक भी दाेनाें सरकाराें के बीच पानी के बंटवारे काे लेकर सहमति नहीं बनी है। हालांकि जवाई पुनर्भरण में राजस्थान की सीमा से गुजर रहे पानी को ही डायवर्ट करने की याेजना बनी है। गुजरात सरकार बेवहज अड़ंगा लगा रही है।

ये है पूरा प्राेजेक्ट : योजना के तहत में अरावली पर्वतमालाओं में से होकर साबरमती वॉकल नदी का पानी जवाई बांध तक लाना प्रस्तावित है। इसकाे लेकर पूर्व में हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार उदयपुर के कोटड़ा के पास वॉकल नदी पर कंचन ब्रिज के समीप वॉकल चतुर्थ बांध बनाकर बिना लिफ्ट किए आसानी से जवाई बांध में पानी पहुंचाने प्रस्ताव तैयार किया है।

क्या हाेना था : वॉकल चतुर्थ बांध से कोठार के पास से ही जवाई नदी में भी छोड़ा जाएगा, जिसके लिए 45.20 किमी का सुरंग 28.30 किमी ओपन चैनल बनानी हाेगी। टनल ओपन चैनल की कुल लंबाई 73.50 किमी होगी। प्राेजेक्ट के तहत वॉकल चतुर्थ साबरमती बेसिन से जवाई परियोजना में अन्य चार बांधों के पानी को भी शामिल किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें देवास चतुर्थ बांध, साबरमती पर बने कोलियान बांध, साई नदी पर बने रोहिणी बांध वॉकल नदी पर बने वॉकल बांध का पानी शामिल है।

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