बीजापुर के रिसाेर्ट में कैमरे में कैद हुई जंगली बिल्ली:कुंभलगढ़ अभयारण्य में तीन दशक बाद नजर आया लुप्तप्राय काराकल

देसूरी7 महीने पहले
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कुंभलगढ़ अभयारण्य में कैमरे में कैद हुआलुप्तप्राय काराकल। - Dainik Bhaskar
कुंभलगढ़ अभयारण्य में कैमरे में कैद हुआलुप्तप्राय काराकल।
  • वन विभाग की टीम कर रही जांच

| कुंभलगढ वन्यजीव अभयारण्य में लुप्त वन्यजीव काराकल तीन दशक के बाद नजर आया है। यह दूसरी जंगली बिल्ली है, जो चीतों के बाद विलुप्त होने के कगार पर है। मध्यम आकार की जंगली बिल्ली की उपस्थिति अभयारण्य से लगभग डेढ़ किमी दूर स्थित एक बीजापुर रिसाेर्ट में देखी गई।

रिसाेर्ट से काराकल के फोटोग्राफ के साक्ष्य मिलने के बाद वन विभाग हरकत में आ गया। रिसाेर्ट के आसपास कैमरे लगाकर दो किमी क्षेत्र में जांच की जा रही है। राजसमंद डीएफओ फतेहसिंह राठौड़ ने बताया कि पिछले वर्ष वन कर्मचारियों ने दावा किया था कि उन्होंने काराकल को देखा था। मगर ठोस सबूत नहीं मिले।

अभयारण्य में उपयुक्त घास का मैदान है। पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय जनरल आऊफ थ्रेटड टैक्सा में प्रकाशित एक रिपाेर्ट में कहा गया था कि 2001 के बाद से कुल 24 काराकल देखे जाने की सूचना मिली है,जो देश में सबसे अधिक होने का दावा है। भारतीय वन्यजीव अधिनियम की अनूसूची 1 के तहत यह जीव संरक्षित है।

दस फीट तक लगा सकता है छलांग

लंबे व गुच्छेदार काले कान हाेते हैं। काले कान की वजह से यह नाम पड़ा। बहुत ही फुर्तीले हाेते हैं। 10 फीट तक छलांग लगाकर शिकार कर सकते हैं। युवा काराकल में लाल रंग के धब्बे,आंखाें के उपर काले धब्बे और आंखाें व नाक आसपास छाेटे सफेद धब्बाें के अलावा अन्य निशान नहीं हाेते हैं। ठाेडी और नीचे का भाग सफेद हाेता है।

कुंभलगढ वन्यजीव अभयारण्य के पास स्थित बीजापुर रिसाेर्ट में विलुप्त काराकल देखा गया है। जो करीब तीन दशक के बाद नजर आया है। टीम को रिसाेर्ट भेजा गया है।

-फतेहसिंह राठौड़, डीएफओ

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