पालिका में पंचायती:8 माह बाद भी पंचायत की आईडी पर काम और भुगतान, ईओ मांग रहे रिकॉर्ड

पाली2 महीने पहले
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जावाल ग्राम पंचायत क्रमोन्नत होकर सरकारी रिकाॅर्ड में नगरपालिका तो अप्रैल में ही हो गई, लेकिन यहां का असल कामकाज अभी भी बतौर पंचायत ही हो रहा है। पालिका के नाम पर सिर्फ यहां अधिशासी अधिकारी (ईओ) की नियुक्ति हुई है, लेकिन सारा रिकॉर्ड अब तक हैंडओवर नहीं किया गया है।

यही वजह है कि प्रशासन शहरों के संग अभियान में न तो पट्टे बांटे जा सके और ना ही नगर पालिका प्रशासन लोगों के रोजमर्रा के काम कर पा रहा है। नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी मंत्रालय की वीसी से लेकर जोधपुर डीडीआर तक शिकायत करने के साथ ही कलेक्टर से लेकर बीडीओ तक रिकॉर्ड देने की मिन्नतें कर चुके हैं। लेकिन, पूरा प्रशासन मिलकर भी पिछले आठ महीनों में ग्राम विकास अधिकारी से रिकॉर्ड नहीं निकलवा पाया है। कमेटी भी नहीं खोज पाई रिकॉर्ड: रिकॉर्ड गायब होने के मामले में जिला परिषद की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया था।

लेकिन कई हफ्ते बीतने के बाद भी कमेटी रिकॉर्ड का पता नहीं लगा पाई है। जब भास्कर ने सीईओ से इस मामले में जानकारी चाही तो उन्होंने गायब हुए रिकॉर्ड और कमेटी के काम को लेकर सिर्फ इतना कहा कि इस मामले को लेकर शिकायतें मिली थी और कमेटी गठित कर दी गई है।

नगर पालिका बनने के बाद पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी नियमानुसार पूरा रिकॉर्ड पालिका को सौंपने की थी। इसके साथ ही त्वरित गति से पुराने पेमेंट चुकाकर ऑनलाइन भुगतान की एसएसओ आईडी बंद किया जाना था। लेकिन, कई शिकायतों और नगर पालिका की ओर से डिमांड होने के बाद भी पंचायती राज विभाग ने ना तो रिकॉर्ड हैंडओवर किया और ना ही ऑनलाइन पेमेंट बंद किया। बल्कि पालिका क्षेत्र में ग्रामीण विकास के नए काम अलॉट करते रहे। पूरी पत्रावली कलेक्टर के पास होने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कलेक्टर ने भास्कर से कह दिया कि अगर नए कामों की स्वीकृति की कोई जानकारी आपके पास हो तो मुझे भी दीजिए। नियमानुसार परिषद और समिति के रोजमर्रा के कामों की एक कॉपी कलेक्टर को भी भेजी जाती है। इसके अलावा जावाल इलाके से इस मामले में कई शिकायतें खुद कलेक्टर को दस्तावेजों के साथ दी जा चुकी है।

जिला परिषद ने ताजा आदेश में जेटीए को क्लस्टर आवंटन किया रिकॉर्ड हैंडओवर ना करने के मामले का खुलासा तब हुआ जब जिला परिषद के सीईओ कार्यालय से 30 नवंबर को कनिष्ठ तकनीकी सहायक (जेटीए) के क्लस्टर आवंटन का आदेश निकालते हुए जावाल नगर पालिका को भी क्लस्टर के रूप में आवंटित कर दिया। आदेश में अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक ने जेटीए भंवरलाल मीणा को जावाल क्लस्टर की नरेगा योजना और रूरल डवलपमेंट योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का आदेश जारी किया है। पड़ताल करने पर पता चला कि पिछले आठ महीने में जिला परिषद और पंचायत समिति की ओर से योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर दर्जनों आदेश जावाल को ग्राम पंचायत के रूप में दर्शाते हुए निकाले गए हैं।

ग्राम विकास अधिकारी ने अभी तक नहीं है सौंपा पूरा रिकॉर्ड भास्कर पड़ताल में रिकॉर्ड हैंडओवर को लेकर चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि जावाल ग्राम पंचायत का पूरा रिकॉर्ड ग्राम विकास अधिकारी के पास पड़ा है और जिम्मेदार अधिकारी उससे रिकॉर्ड ही हासिल नहीं कर पा रहे हैं। नियमानुसार कोई भी कर्मचारी आधिकारिक रिकॉर्ड दफ्तर के बाहर आपने पास नहीं रख सकता है। रिकॉर्ड नहीं मिलने से नगर पालिका प्रशासन रोजमर्रा के काम भी नहीं कर पा रहा है। जिला प्रशासन के रवैये से परेशान जावाल के तत्कालीन उप सरपंच नारायण माली ने मुख्य सचिव को शिकायत भेज रिकॉर्ड नगर पालिका को दिलवाने की मांग की है।

सीईओ : पालिका को दिया रिकाॅर्ड : सीईओ भागीरथ विश्नोई ने दावा किया कि कुछ रिकॉर्ड को छोड़कर पूरा रिकॉर्ड नगर पालिका को दे दिया गया है। लेकिन, वे इस बात का जवाब नहीं दे सके कि जब पूरा रिकॉर्ड दे दिया गया है तो रिकॉर्ड तलाशने के लिए कमेटी बनाने की जरूरत क्यों पड़ी।

सरपंच से नपा अध्यक्ष बने राणा गिरफ्तार हो चुके, नए का पता नहीं 11 अप्रैल 2021 को नगर पालिका के अस्तित्व में आने के बाद वहां कर्मचारियों के नाम पर अधिशासी अधिकारी भंवर लाल सेन के अलावा किसी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की। सरपंच से नगर पालिका अध्यक्ष बने विक्रम राणा की इसी साल भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तारी के बाद पालिका में ना तो उपाध्यक्ष को नगर पालिका अध्यक्ष का काम सौंपा गया और ना ही किसी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया। कुछ दिनों पहले विक्रम राणा की जमानत पर बाहर आने के बाद फिलहाल उम्मीद बंधी है कि नगरपालिका आगे कुछ कार्य कर सकेगी। फिलहाल राणा मामले की फाइल जयपुर गई है।

ईओ : अभी दी है सिर्फ 55 पट्टा बुक : नगर पालिका के ईओ भंवरलाल सैन ने दावा किया है कि अभी तक उन्हें 55 पट्टा बुक छोड़कर कोई अन्य रिकॉर्ड हैंडओवर नहीं किया गया है, जिसके कारण प्रदेश सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी प्रशासन शहरों के संग योजना में एक भी पट्टा नहीं दिया जा सका है। नगर पालिका के पास अभियान में काम गिनाने को रेवेन्यू विभाग की मदद से भूमि विभाजन की सिर्फ दो फाइलों के अलावा कुछ भी नहीं है।

^जिन अधिकारियों ने पालिका बनने के बाद भी एसएसओ आईडी बंद नहीं कमेटी जांच कर रही है, दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी कर पालिका बनने के बाद भी पेमेंट किया है तो यह गैर कानूनी है। कमेटी जांच कर रही है और जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी। - भगवती प्रसाद कलाल, कलेक्टर

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