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शाैर्य का गढ़वाड़ा:विजयादशमी पर हर युवा लेता है सैनिक बनने का संकल्प, 300 घरों के गांव में 150 से अधिक सेना में

पाली2 महीने पहलेलेखक: कन्नू भीलवारा
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  • गढ़वाड़ा में हर साल मनता है विजयादशमी उत्सव, गांव के अधिकांश युवा सैनिक शस्त्रपूजन करने आते हैं गांव

विजय का प्रतीक है दशहरा पर्व। इस दिन शस्त्र पूजन ताे सभी जगह हाेता है, लेकिन जिले का गढ़वाड़ा गांव ऐसा है, जहां सैनिकाें द्वारा शस्त्राें की पूजा की जाती है। आपकाे इस जानकारी से आश्चर्य हाेगा कि इस छाेटे से गांव काे जिले में सबसे ज्यादा सैनिक देने का गाैरव प्राप्त है।

बचपन से ही मां द्वारा संस्कारों के साथ देश सेवा की शिक्षा गांव में दी जाती है। देश की विभिन्न सीमाओं पर गांव के जाे सैनिक तैनात हैं, उनमें से अधिकांश हर दशहरे पर गांव आते हैं। यहां पर शस्त्र पूजन करके और बच्चाें में भी िवजय की भावना पैदा कर सेना में आने की नसीहत देते हैं। दशहरे के लिए हाेने वाले शस्त्र पूजन कार्यक्रम में मां व बहनें अपने परिवार के पुरुषाें काे सैनिक बनने का संकल्प दिलाती है।

फौज के लिए युवाओं को तैयार करने गांव वालों ने ही मिलकर यहां पर सोनल स्टेडियम बना दिया। घर-घर चंदे से तैयार हुआ यह स्टेडियम जिले का अकेला ऐसा स्टेडियम है, जहां पर दौड़ते हुए युवा की रफ्तार अपनेआप बढ़ जाती है। लुधियाना से विशेष मिट्टी मंगवाकर 400 मीटर का ट्रैक बनाया गया है। यहां रिटायर्ड फौजी इन युवाओं को कमर पर टायर बांधकर जमकर दौड़ाते हैं। इन युवाओं को ट्रेनिंग देने का जिम्मा रिटायर्ड कमांडेंट नाथूदान, सूबेदार मूलदान, लक्ष्मणदान, श्रवणदान तथा भंवरदान समेत अन्य लोगों ने उठा रखा है।

जिले में सबसे अधिक जवान इसी गांव से, मेडल भी मिले
जिले में सबसे अधिक जवान इसी गांव से है। ये तभी संभव हाे पाया है जब बच्चाें काे बचपन से ही देश सेवा की प्रेरणा संस्कारों के साथ माताओं द्वारा दी जा रही है। पूरे नवरात्रा मां देवल की पूजा अर्चना धूमधाम से की जाती है और अंतिम दिन दशहरे पर शस्त्र पूजन हाेता है, इसका मुख्य उद्देश्य बच्चाें में देशप्रेम की भावना जगाना ही हाेता है। गांव के सैनिक सेना में रहते हुए अपनी बहादुरी दिखाने के कारण कई सेना मेडल भी प्राप्त कर चुके हैं। सरकारी आंकड़ाें में भी जिले का गढ़वाड़ा ही ऐसा गांव है, जहां की मिट्टी ने सबसे ज्यादा सैनिक दिए हैं। संपूर्ण साक्षर गांव के रूप में अपनी विशेष पहचान रखने वाले इस गढ़वाड़ा में सेना के अलावा पुलिस, सीआरपीएफ, रेलवे तथा शिक्षा सेवा में भी काफी युवक सेवाएं दे रहे हैं।

सबसे पहले घीसूदान सेना में पहुंचे, गांव में 8 परिवार ऐसे जिसमेें सभी युवा फाैज में ही
गांव में सबसे पहले घीसूदान चारण की फौज में नियुक्ति हुई। अभी गांव के 8 परिवार ऐसे हैं, जिसमें 2 से 4 बेटे सभी फौज में हैं। इनमें 7 परिवार में इकलौता सदस्य होने के बाद भी उनकी पहली पसंद सेना में सेवा देकर देश की रक्षा करने का है।

दशहरा पर पहुंचते हैं अधिकतर सैनिक, लगाते हैं विशेष कैंप
दशहरा पर्व में अधिकतर सैनिक छुट्टियां लेकर देवी पूजा करने के लिए यहां पहुंचते हैं। यह सैनिक गांव के युवाओं के लिए 5 से 7 दिन का विशेष कैंप आयोजित कर उनको सेना के उच्च मापदंडों पर होने वाली परीक्षा में खरा उतरने की सीख देने के लिए ही प्रेक्टिकल भी करवाते हैं। दो दिन तो सुबह-शाम 2-2 घंटे पैरा कमांडो बाबूसिंह व हरदान की अगुवाई में हाइवे पर ही इनकी प्रैक्टिस होती है। कश्मीर में अब भी 46 सैनिक अलग-अलग स्थानों पर तैनात है। गांव के ही हरिमाेहन चारण ने बताया कि दिन में सुबह-शाम सैनिकाें काे तैयार करने की नियमित रूप से प्रैक्टिस हाेती है।

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