लॉकडाउन में मंदिर भी ‘लॉक’ / गोडवाड़-मारवाड़ के इतिहास में पहली बार 64 दिनों से हैं भक्त बिना भगवान

रणकपुर जैन मंदिर रणकपुर जैन मंदिर
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रणकपुर जैन मंदिररणकपुर जैन मंदिर

  • विश्व प्रसिद्ध रणकपुर जैन मंदिर सहित जिले के सभी मंदिरों में दर्शन पर पाबंदी
  • पाली जिले में 3 हजार से अधिक मंदिर प्रभावित
  • इन मंदिरों में भगवान के दर्शन के लिए रोज लगती थी कतारें, अब भक्तों को भी खुलने का इंतजार

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

देसूरी. गोडवाड़-मारवाड़ क्षेत्र में आदिकाल से ही आध्यात्मिक एवं धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। साथ ही यह क्षेत्र तपस्या व दानवीरों की क्षेत्र रहा है। उसी की देन है कि आज भी गोडवाड़ व मारवाड़ पौराणिक तीर्थ स्थली, मंदिरों व प्राचीन आध्यात्मिक स्थली के लिए पहचानी जाती है।

गोडवाड़-मारवाड़ क्षेत्र में छोटे-बड़े करीब 3000 से अधिक मंदिर है। हर दिन भक्त भगवान के चरणों में मत्था टेकते थे। मगर काेराेना के चलते इतिहास में पहली बार गांवों, शहरों, मंदिरों को लॉक करना पड़ा। जिसके कारण पहली बार भक्त बिना भगवान रहे।

64 दिनों से मंदिरों का द्वार दर्शन के लिए बंद है। कोरोना संकट के चलते भक्त भी अपने भगवान की शरण में नहीं जा पा रहे हैं। जिन श्रद्धालुओंं व ग्रामीणाें का पूरा जीवन अपने दिन का शुभारंभ मंदिर में दर्शन से ही किया है।

आज हालत यह है कि यह लोग पिछले 64 दिनों से अपने भगवान के दर्शन नहीं कर पाए हैं। गोडवाड़- मारवाड़ क्षेत्र के मंदिर विश्व प्रसिद्ध रणकपुर जैन मंदिर, परशुराम महादेव, श्री मुछाला महावीर जैन मंदिर, श्री सोनाणा खेतलाजी सारंगवास, आशापुरा माताजी नाडोल, जूनीधाम खेतलाजी सोनाणा, आई माताजी नारलाई सहित अन्य मंदिरों में सुबह से भक्तों की कतार दर्शन के लिए लग जाती थी।

सारंगवास खेतलाजी मंदिर

1447 ई. में हुई स्थापना

रोज 2000 के करीब भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं। कोरोना के कारण पहली बार मंदिर पर लगा है ताला।


जूनीधाम खेतलाजी मंदिर सोनाणा

1100-1200 वि.सं. में स्थापना
पश्चिमी राजस्थान का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां प्रतिदिन दो से तीन हजार भक्त आते हैं। मंदिर स्थापना के बाद पहली बार ताला लगा है। देसूरी उपखंड मंे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। यह भक्तों के लिए वर्षों से आस्था के केंद्र बने हुए हैं। जिसमें विश्व प्रसिद्ध रणकपुर जैन मंदिर, परशुराम महादेव मंदिर, सांगवास खेतलाजी, जूनीधाम खेतलाजी, श्री मुछाला महावीर जैन मंदिर, अंबे माताजी मंदिर, आई माताजी मंदिर, आशापुरा मंदिर सहित अन्य मंदिर मौजूद है।


आशापुरा माताजी नाडोल

कोई लिखित तिथि नहीं
नाडोल 10-11वीं शताब्दी ई.में चौहान वंशीय शासकों की राजधानी था। महाराणा राव लखन में आशापुरा माता मंदिर का निर्माण करवाया। दर्शन करने रोज 3000 श्रद्धालु आते हैं।


परशुराम महादेव मंदिर

कोई लिखित तिथि नहीं
अरावली पर्वतमाला श्रृंखला के बीच स्थित है मंदिर। प्राकृतिक आकार के कारण आकर्षण का केंद्र है। प्राकृतिक गुफा मंे शिवलिंग के दर्शन के लिए रोज 2500 भक्त आते हैं। 

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