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दोस्त ही मास्टरमाइंड!:गिरोह बनाया, स्कूल से पेपर के फोटो मंगवाए, आंसर तैयार करवा अभ्यर्थी को भेजे

पाली11 दिन पहले
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एसआई बनने के जुनून में अपनाया अपराध का रास्ता, अब पुलिस रिमांड पर। - Dainik Bhaskar
एसआई बनने के जुनून में अपनाया अपराध का रास्ता, अब पुलिस रिमांड पर।
  • एसआई परीक्षा के लिए नकल गिराेह बनने की पूरी कहानी सिर्फ भास्कर में
  • परीक्षा से 5 मिनट पहले पेपर भेजने की हुई थी डील

पुलिस उपनिरीक्षक सीधी भर्ती लिखित परीक्षा में साेमवार काे पाली में माेबाइल से नकल करते पकड़े गए बीकानेर से नामी ठेकेदार व रईस परिवार के बेटे राजेश बेनीवाल काे थानेदार बनने का जुनून था। इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने काे तैयार था। उसने यह बात अपने दोस्त व एक तरह से असिस्टेंट नरेंद्र खींचड़ काे बताई ताे उसने 10 दिन में ही नकल गिराेह खड़ा कर दिया।

इसमें बीकानेर के ही एक निजी कोचिंग सेंटर के अपने स्वजातीय राजू मैट्रिक उर्फ राजाराम विश्नोई काे साथ मिलाया। इसके बाद परीक्षा सेंटर वाले निजी स्कूल के प्रिंसिपल सचिव दिनेश सिंह के माध्यम से पेपर लीक करने का साैदा 15 लाख रुपए में तय किया।

आंसर-की तैयार करने के लिए भी काेविड में लगभग बेरोजगार हाे चुके एक अन्य कोचिंग सेंटर के नरेशदान चारण काे 50 हजार रुपए का लालच दिया। राजेश ने नरेंद्र खींचड़ की मंगलवार काे हाेने वाली परीक्षा के लिए भी 5 लाख रुपए खुद देना तय किया था। इधर, पुलिस ने मंगलवार काे दाेनाें आराेपियाें काे काेर्ट में पेश किया, जहां से 17 सितंबर तक रिमांड पर साैंप दिया गया।

जानकारी के अनुसार साेमवार काे भारतीय विद्या मंदिर स्कूल में एसआई की परीक्षा के दाैरान अभ्यर्थी राजेश अंडरवियर में माेबाइल छिपाकर लाया था। उसकी मदद के लिए नरेंद्र खींचड़ सेंटर के बाहर खड़ा था। कोतवाली पुलिस ने दाेनाें काे गिरफ्तार कर लिया था। इन दाेनाें के पकड़े जाने के बाद जाे कहानी उजागर हुई है, वह काफी चौंकाने वाली है। राजेश व नरेंद्र ने पहले नकल के लिए दिल्ली-हरियाणा तक के गिराेह से संपर्क साधा था, मगर बात नहीं बैठी ताे खुद ही ने गिराेह खड़ा कर लिया।

नरेंद्र ने तलाशा राजू मैट्रिक काे, उसने निजी संचालक काे लालच में फंसाया

बताया जाता है कि नरेंद्र ने बीकानेर में कई कोचिंग सेंटरों से संपर्क किया। आखिर में कोचिंग सेंटर चलाने वाले राजू मैट्रिक उर्फ राजाराम काे लालच देकर तैयार कर लिया। 10 दिन पहले ही खींचड़ व राजाराम बीकानेर के रामपुरा में स्थित प्राइवेट स्कूल रामसहाय आदर्श सैकंडरी स्कूल पहुंचे। स्कूल के प्रिंसिपल सचिव दिनेशसिंह चाैहान तैयार हाे गया। साैदा 15 लाख में तय हुआ। शर्त यह थी कि परीक्षा शुरू हाेने के 5 मिनट पहले ही पेपर वाट्सएप पर भेजना हाेगा। पूरे षड्यंत्र के साथ राजाराम काे भी दिनेशसिंह ने अपनी स्कूल में ही अतिरिक्त वीक्षक के रूप में लगवा लिया।

दिनेश-राजू मैट्रिक के बीच स्कूल में फाेटाे खींचते वक्त हुई थी तकरार
पता चला है कि पेपर के फाेटाे काैन खींचे। इसकाे लेकर राजू मैट्रिक व दिनेशसिंह के बीच तकरार भी हुई। आखिर में वक्त खराब हाेता देख दिनेश सिंह ने राजू मैट्रिक के मोबाइल से पेपर के फाेटाे खींचे और वॉट्सएप पर नरेंद्र खींचड़ को शेयर किए। पाली से ही खींचड़ ने एक अन्य कमरे में बिठा रखे आंसर-की तैयार करने वाले नरेशनदान चारण को पेपर भेज दिए।

चारण के हल करने के बाद बेनीवाल का माैसेरा भाई वेरिफाई करता रहा आंसर
बीकानेर में साहित्य कोचिंग सेंटर चलाने वाला नरेशदान चारण का काेविड के कारण पूरा काराेबार मंदा पड़ चुका है। वह गणित पढ़ाता है। जीके भी काफी स्ट्रांग है। उसे 50 हजार का लालच देकर आंसर-की बनाने के लिए तैयार किया गया। खींचड़ का पेपर मिलते ही वह हल करने लगा। अभ्यर्थी राजेश का माैसेरा भाई भी वहां पर अन्य साथियाें के साथ इंटरनेट पर आंसर चेक कर रहा था।

अभ्यर्थी काे आरपीएससी करेगी डिबार, सेंटर भी ब्लैक लिस्टेड होगा

राजस्थान लाेक सेवा आयाेग अभ्यर्थी राजेश काे डिबार करेगा। जिस परीक्षा केंद्र पर यह घटना हुई है, उसके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए कलेक्टर को लिखेगा।

प्रिंसिपल ने दोनों पारी के पेपर की फोटो खींचे, लेकिन दूसरा पुलिस तक पहुंच गया

एसआई परीक्षा में नकल करवाने के लिए तीन दिन के छह पेपर आउट करने की 15 लाख रुपए में डील हुई थी। इस पर रामपुरा बस्ती की गली 18 में रामसहाय आदर्श सैकंडरी स्कूल के प्रिंसिपल सचिव दिनेशसिंह चौहान ने दोनों पारी के पेपर की अतिरिक्त वीक्षक राजाराम बिश्नोई के मोबाइल से फोटो खींची थी। राजाराम ने दोनों पेपर नकल गिरोह के लोगों को भेज दिए थे।

इनमें से पहला पेपर बज्जू में मोडायत मानकासर निवासी विकास बिश्नोई के पास पहुंचा जिसने पाली में नरेन्द्र को भेज दिया और उसने वहां परीक्षा दे रहे राजेश को नकल करवाई। प्रिंसिपल ने तीन बजे दूसरी पारी के पेपर की भी फोटो खींची जो राजाराम ने फिर से विकास को भेजी, लेकिन तब तक पुलिस ने विकास को हिरासत में ले लिया था और उसके लेपटॉप पर चल रहे वाट्स अप से दूसरा पेपर बरामद कर लिया।

इनसाइड स्टोरी के ये दो किरदार

1. 15 लाख में डील, 12 सितंबर की रात राजाराम ने प्रिंसिपल के घर जाकर दिए तीन लाख एडवांस
कोचिंग संस्थान राजाराम और प्रिंसिपल दिनेश स्टूडेंट का दाखिला एक-दूसरे के यहां करवाते थे। इसलिए दोनों में घनिष्ठता थी। राजेश बेनीवाल और नरेंद्र एसआई की परीक्षा दे रहे थे। नरेंद्र ने प्रिंसिपल दिनेश से पेपर उपलब्ध करवाने के लिए संपर्क किया, लेकिन बात नहीं बनी। नरेंद्र ने राजाराम को प्रिंसिपल के पास भेजा और 15 लाख रुपए में डील तय हुई। प्रिंसिपल राजाराम में डेढ़ लाख रुपए मांगता था। डील पूरी होने पर राजाराम को वह रुपए माफ करना तय हो गया। राजाराम 12 सितंबर की रात प्रिंसिपल के घर पहुंचा और 3 लाख एडवांस दे दिए। सात लाख मंगलवार को देने थे।

2. देरी से आने वाले स्टूडेंट के पेपर का लिफाफा खोलकर खींची फोटो, ताकि कोई शक न करे
नकल करवाने के लिए पेपर की फोटो खींचना आसान नहीं था। पेपर लिफाफे में होता है और स्टूडेंट ही उसे निकालता है। प्रिंसिपल दिनेश और कोचिंग संस्थान संचालक व अतिरिक्त वीक्षक राजाराम ने सेंटर पर देरी से आने वाले स्टूडेंट के पेपर का लिफाफा खोलकर फोटो खींच की प्लानिंग की और ऐसा ही किया। पहली पारी में दोनों ने मिलकर पेपर का लिफाफा खोलकर फोटो खींच ली। बाद में देरी से आए स्टूडेंट को वह पेपर थमा दिया। दूसरी पारी में भी ऐसा ही किया।

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