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  • He Is Not Just Called The Doctor Of Trees, Out Of 500 Plants Made 350 Trees, Every Day The Team Manages For 3 Hours, Then The Plants Became Trees.

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष:इन्हें यूं ही नहीं कहते पेड़ों का डॉक्टर, 500 पौधों में से 350 को बनाया पेड़, रोजाना टीम करती हैं 3 घंटे सार-संभाल, तब पौधें बने पेड़

पाली।2 महीने पहले
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देखिए, यह वह पौधें जिन्हें हमने पेड़ बनाया। - Dainik Bhaskar
देखिए, यह वह पौधें जिन्हें हमने पेड़ बनाया।

शहर के लाखोटिया गार्डन जाने के रास्ते के किनारे व रंगमंच क्षेत्र में लगे बड़े-बड़े पेड़। यूं ही नहीं पनपे इन्हें पौधों से पेड़ बनाने के लिए एक टीम रोजाना सुबह तीन घंटे काम करती हैं। जो पौधों को पानी देने से लेकर उनकी सार-संभाल करने का सार काम खुद देते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर आपको शहर के ऐसी एक टीम से मिलवा रहे हैं। जिन्होंने पौधों को अपने बच्चों की तरह पाला जिससे आज वे पेड़ का रूप ले सके हैं। टीम के मोहनलाल भाटी का पेड़ों से प्रेम देखकर लाखोटिया में घूमने आने वाले लोगों ने उनका नाम ही पेड़ों का डॉक्टर रख लिया हैं।

मोहनलाल भाटी अपनी स्कूटी की डिक्की में पेड़-पौधों की सार संभाल में आने वाले औजार रखते हैं हर समय साथ।
मोहनलाल भाटी अपनी स्कूटी की डिक्की में पेड़-पौधों की सार संभाल में आने वाले औजार रखते हैं हर समय साथ।

शहर के अनाज व्यापारी मोहनलाल भाटी, कपड़ा व्यापारी नेमीचंद बोराणा, मोबाइल शोरूम संचालक प्रकाश देवड़ा, दिनेश पंवार, जगाराम चौधरी और हाल ही इस टीम से जुड़ मदनमोहन गुप्ता। यह कुछ ऐसे नाम हैं जो पेड़ों को अपने बच्चों की तरह समझते हैं। नियमित रूप से पेड़-पौधों को पानी देना सार-संभाल करना इनके जीवन का हिस्सा बन गया हैं।

लाखोटिया उद्यान जाने वाले रास्ते पर लगे इन पेड़ों की नियमित देखभाल करती हैं यह टीम।
लाखोटिया उद्यान जाने वाले रास्ते पर लगे इन पेड़ों की नियमित देखभाल करती हैं यह टीम।

शनिवार सुबह भास्कर टीम लाखोटिया उद्यान पहुंची तो यह टीम लाखोटिया तालाब के किनारे पौधे लगाते मिली। मोहनलाल भाटी बोले की कोरोना काल में आयुर्वेदिक पौधों की डिमांड ज्यादा देखने को मिली इसलिए अब यहां नीम गियोल सहित कई आयुर्वेदिक पौधें व पीपल के पौधें लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े नौ बजे तक नियमित लाखोटिया उद्यान आते हैं और पौधों की सार-संभाल करने एवं पानी पिलाने का काम स्वयं करते हैं। इससे व्यायाम भी हो जाता हैं तथा पर्यावरण संरक्षण का काम भी हो जाता हैं।

जो पौधें लगाए उनमें से कई पेड़ बन गए, यह देख अच्छा लगता हैं

नेमीचंद बोराणा ने बताया कि लाखोटिया के रंगमंच व उसके बाहर की तरफ उनकी ओर से आज से आठ-दस साल पहले पौधें लगाए गए थे। जो आज पेड़ बन गए हैं। यह देख मन को बहुत सकून मिला हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने लोर्डिया तालाब किनारे भी सैकड़ों पौधे लगाए हैं। उन्हें भी नियमित पानी देने का काम करते हैं। जिससे की वे पेड़ बन सके।

यूं ही नहीं कहते पेड़ों का डॉक्टर, रखते हैं पूरा टूल किट साथ

मोहनलाल भाटी पेड़ों के डॉक्टर के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे पेड़-पौधों की सार-संभाल में काम आने वाले छोटे-मोट औजार अपनी स्कूटी की डिक्की में हर समय साथ रखते हैं। पेड़ों में मिट्टी देना, मिट्‌टी बदलना जैसे काम स्वयं करते हैं। इनका कहना हैं कि लाखोटिया उद्यान क्षेत्र में उनकी ओर से लगाए गए पौधों को वे अपने बेटे की तरह समझते हैं। पौधों की सार संभाल के चलते शहर से बाहर भी बहुत कम जाते हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा समय इन पेड़-पौधों को दे सके।

लक्ष्य लाखोटिया के चारों तरफ हरे-भरे पड़े खड़े देखना

भाटी ने बताया कि उनकी टीम अभी लाखोटिया गार्डन के चारों तरफ पौधें लगाने का काम कर हैं। इनमें पीपल, नीम व आयुर्वेदिक पौधें है। उन्होंने बताया कि अटल वाटिका में उनकी ओर से नवग्रह वाटिका विकसित की गई हैं। जहां नवग्रह पूजा में काम आने वाले सभी पौधें लगाए गए हैं।

लाखोटिया उद्यान परिसर में पौधा लगाती टीम।
लाखोटिया उद्यान परिसर में पौधा लगाती टीम।
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