पाली में कम हुए HIV रोगी:317 नवजातों को दिया नवजीवन

पाली2 महीने पहले
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  • HIV पॉजिटिव 320 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करवाया गया, 317 को रोग से बचाया

दुनिया भर में जिन बीमारियों के कारण मृत्यु दर सबसे अधिक माना जाता हैं, एड्स उन्हीं में से एक है। HIV नाम के वायरस के कारण होने वाले इस रोग को वैसे तो लाइलाज माना जाता हैं, लेकिन पिछले साल की बात करें तो पाली में HIV के मरीज कम सामने आए हैं। प्रतिमाह 35 HIV रोगी अस्पताल इलाज के लिए पहुंचते थे। जिनका आंकड़ा घटकर 25 तक पहुंच गया है। इसके साथ ही पिछले चार साल में 320 एचआईवी पीड़ित महिलाओं की सफल डिलेवरी करवा 317 नवजातों को एचआईवी जैसे जानलेवा रोग की चपेट में आने से बचाया।

01 दिसम्बर विश्व एड्स दिवस पर आपको बताते हैं कि पाली में HIV रोगियों का आंकड़ों में कैसे सुधार हुआ। शुरू हुए। बांगड़ अस्पताल के एआरटी सेंटर, पाली मारवाड़ नेटवर्क फोर पीपल लिविंग विथ एचआईवी संस्था के अध्यक्ष भीकसिंह राजपुरोहित, सचिव सुनीता वैष्णव के नेतृत्व में यह NGO लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा हैं। पिछले कई सालों से शहर सहित ग्रामीणा क्षेत्र, देह व्यापार करने वाली महिलाओं से मिल रहे हैं। HIV से कैसे बचा जा सकता हैं इसको लेकर जागरूक कर रही हैं। इसके साथ ही जो HIV पॉजिटिव हैं उन्हें एआरटी सेंटर तक ला रही हैं जिससे की उन्हें इस रोग से लड़ने के लिए दवाइयां दी जा सके तथा नियमित गोलियां लेकर वे एक सामान्य इंसान की तरह अपना जीवन जी सके। उसकी का नतीजा हैं कि लोग जागरूक हो रहे हैं।

317 को दिया नया जीवन
जिले में वर्ष 2018 से लेकर अब तक HIV पॉजिटिव 320 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करवाया गया। जिसमें से 317 महिलाओं के बच्चों को एचआईवी जैसी जानलेवा बीमारी से बचाया गया हैं। जबकि उनके फादर-मदर दोनों एचआईवी पॉजिटिव थे।

जिले में 2589 एक्टिव केस
बांगड़ अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक एवं एड्स के नोडल प्रभारी डॉ एचएम चौधरी ने बताया कि वर्तमान में जिले भर में 2589 HIV के एक्टिव केस हैं। जो एआरटी सेंटर तक पहुंच रेगुलर दवाइंया ले रहे हैं। महज एक गोली रोजाना लेकर एचआईवी जैसे जानलेवा रोग के साथ जी रहे हैं।

HIV पीड़ितों का दर्द अपने ने कर दिया दूर
रामलाल बदला हुआ नाम ने बताया कि वह पिछले छह साल से एचआईवी रोग के साथ जी रहा हैं। जांच के दौरान उसे जब पता चला कि वह एचआईवी से पीड़ित हैं। तो काफी दर्द हुआ लेकिन अपने आप को संभाला लेकिन अपनों ने मुझसे इस रोग के कारण दूरी बना ली। जिससे में काफी टूट गया। एक बार तो सुसाइड करने का मन बना लिया। मेरे जैसे अन्य लोगों से मिला जो एचआईवी पीड़ित हैं तो उन्होंने हौंसला दिया। जिससे आज जिंदा हूं। विश्व एड्स दिवस पर लोगों को संदेश देना चाहता हूं कि एचआईवी रोग संक्रमित खून चढ़ाने एवं असुरक्षित यौन रोग के कारण होता हैं न कि साथ बैठने से एड्स फैलता हैं।

HIV रोगी के सामने सबसे बड़ी समस्या
- पहचान होने पर उन्हें कोई काम पर नहीं रखता। ऐसे में घर चलाने में दिक्कत होती हैं।
- सरकार से मांग की वे यूपी, हरियाणा, दिल्ली की तरह राजस्थान में भी एचआईवी पीड़ित के लिए प्रतिमाह पेंशन शुरू करें। जिससे उसे कुछ राहत मिल सके।
- पिछले दो साल में जो नए एचआईवी रोगी सामने आए उन्हें खाद सुरक्षा योजना का लाभ देवे।

01 दिसम्बर को क्यों मनाते हैं विश्व एड्स दिवस
दुनियाभर में हर साल 01 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्य एड्स के बारे में हर उम्र के लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। सबसे पहले विश्व एड्स दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरुआत WHO ने अगस्त 1987 में की थी। विश्व एड्स दिवस के लिए हर साल एक नई थीम रखी जाती है। वर्ष 2021 की थीम “असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का अंत करें” है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि इस साल का मुख्य एजेंडा दुनिया भर में आवश्यक एचआईवी सेवाओं तक पहुंच में बढ़ती असमानताओं को उजागर करना है।