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माता-पिता की याद में बनाया अस्पताल:बेटा थाईलैंड में डायमंड ब्रोकर, करोड़ों रुपए खर्च कर सीएचसी को बना दिया मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल

पाली2 महीने पहलेलेखक: ओम टेलर

पितृपक्ष के 15 दिनों में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध किया जाता है। इन दिनों लोग अपने पूर्वजों के लिए शांति की कामना करते हुए दान-पुण्य और कई धार्मिक कार्य करते हैं। दैनिक भास्कर पितृपक्ष में उन लोगों की कहानी लेकर आ रहा है, जिन्होंने अपने माता-पिता या पूर्वजों की याद में समाज में परिवर्तन लाने वाले कार्य कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है। पाली जिले के एक ऐसे व्यक्ति से मिलवाते हैं, जिसने विदेश में रहते हुए भी माता-पिता के लिए अपने गांव में करोड़ों रुपए खर्च कर ग्रामीणों के लिए सुविधाजनक अस्पताल, स्कूल और गोशाला का निर्माण करवाया।

घाणेराव के मोहनीदेवी-जुगराज हिंगड़ राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बना वार्ड।
घाणेराव के मोहनीदेवी-जुगराज हिंगड़ राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बना वार्ड।

घाणेराव गांव के मूल निवासी महेशचंद हिंगड़ डायमंड ब्रोकर हैं। वर्तमान में बैंकॉक (थाईलैंड) में रह रहे हैं। वर्ष 1994-95 की बात है, पाली जिले के छोटे से घाणेराव गांव में ज्यादा चिकित्सा सुविधा नहीं होती थी। शाम ढलने के बाद गांव में यातायात के साधन भी नहीं मिलते थे। एक बार एक गर्भवती को प्रसव के लिए सादड़ी अस्पताल ले जाना था, तब जुगराज हिंगड़ अपनी कार से उन्हें वहां लेकर गए।

घाणेराव में श्रीमती मोहनीदेवी- जुगराज हिंगड़ राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती मरीज की जांच करते डॉक्टर।
घाणेराव में श्रीमती मोहनीदेवी- जुगराज हिंगड़ राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती मरीज की जांच करते डॉक्टर।

महेशचंद हिंगड़ के पिता जुगराज हिंगड़ का मुंबई में हैंडलूम का बिजनेस था। बेटा जब बड़ा हो गया तो उन्होंने अपना पूरा काम बेटे को सौंप दिया और पत्नी के साथ अपने गांव आ गए। ऐसा कई बार होता था जब गांव में गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को जुगराज हिंगड़ अपनी कार से सादड़ी तो कभी फालना अस्पताल ले जाते थे। एक दिन उन्होंने अपनी पत्नी मोहनीदेवी से कहा कि गांव में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को कितनी परेशानी होती है। उन्होंने अपने गांव में ही अस्पताल खोलने की इच्छा जताई। समय का पहिया चलता गया। ग्रामीणों की मदद करते-करते जुगराज हिंगड़ और उनकी पत्नी का देहांत हो गया।

दिवंगत जुगराज हिंगड़। इनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उनके बेटे महेशचंद हिंगड़ ने गांव में बनवाया अस्पताल।
दिवंगत जुगराज हिंगड़। इनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उनके बेटे महेशचंद हिंगड़ ने गांव में बनवाया अस्पताल।

बेटे ने पूरा किया माता-पिता का सपना
जुगराज हिंगड़ की अपने गांव में अस्पताल खोलने की इच्छा पूरी नहीं कर पाए, लेकिन उनके बेटे महेशचंद हिंगड़ ने इस सपने को साकार किया। अपने गांव में 14 करोड़ का अस्पताल भवन बनाकर प्रशासन को सौंपा। इसका नामकरण भी अपने माता-पिता के नाम से किया। श्रीमती मोहनीदेवी-जुगराज हिंगड़ राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, घाणेराव। अस्पताल का 22 जून 2018 में लोकार्पण किया गया, जो आज भी संचालित हो रहा है। आज घाणेराव सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के लोगों को अब साधारण इलाज के लिए शहर नहीं जाना पड़ता।

दिवंगत मोहनीबाई हिंगड़, जिनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उनके बेटे महेशचंद हिंगड़ ने गांव में बनवाया अस्पताल।
दिवंगत मोहनीबाई हिंगड़, जिनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उनके बेटे महेशचंद हिंगड़ ने गांव में बनवाया अस्पताल।

अस्पताल में ऑपरेशन की भी है सुविधा
30 बेड के इस अस्पताल में 1 सर्जन, 1 एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, 1 सीनियर मेडिकल ऑफिसर, 1 मेडिकल ऑफिसर, 5 नर्सिंगकर्मी सरकार की ओर से कार्यरत हैं। स्टाफ कम होने की समस्या को देखते हुए महेशचंद हिंगड़ अस्पताल ट्रस्ट की ओर से 6 नर्सिंगकर्मी, 1 रेडियोग्राफर, 1 लैब टेक्नीशियन, 1 डायलिसिस टेक्नीशियन, 2 सुरक्षाकर्मी, 6 सफाईकर्मी, एम्बुलेंस और चालक की व्यवस्था अपनी ओर से कर रखी है। इसका खर्चा भी ट्रस्ट उठाता है। इसके साथ ही अस्पताल शुरू होने के बाद से लाइट-पानी का बिल भी ट्रस्ट वहन कर रहा है।

बैंकॉक (थाईलैंड) निवासी डायमंड ब्रोकर महेशचंद हिंगड़।
बैंकॉक (थाईलैंड) निवासी डायमंड ब्रोकर महेशचंद हिंगड़।

सुविधा ऐसी कि अस्पताल में ऑपरेशन तक हो रहे
अस्पताल में हर्निया, पाइल्स, प्रोस्टेट, बच्चेदानी, पित्त की थैली में पथरी, थाइराइड की गांठ, स्तन कैंसर जैसे ऑपरेशन दूरबीन पद्धति से होते हैं। इसके साथ ही अस्पताल में डायलिसिस की भी सुविधा हैं। प्रतिमाह करीब 70 मरीजों का यहां डायलिसिस होता है।

माता-पिता की याद में करवाए यह काम

- घाणेराव में 14 करोड़ की लागत से मोहनीदेवी-जुगराज हिंगड़ राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण

- 2.5 करोड़ की लागत से आशा महेश हिंगड़ पशु चिकित्सालय का निर्माण।

- घाणेराव की सीनियर स्कूल में कमरे, हॉल निर्माण पर एक करोड़ खर्च किए।

- घाणेराव सहित आस-पास के गांवों के 20 विद्यालयों के विद्यार्थियों में पिछले 16 साल से कॉपियां वितरण।

- वाल्मीकि समाज के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण।

- घाणेराव में 10 लाख की लागत से किसान भवन का निर्माण।

- दिव्यांगों में 11 स्कूटी का वितरण आदि।