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  • Khushveer Independents, Will Not Have Any Effect On Their Legislature, So They Are Taking Risk, Not Openly In Any Camp

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राजस्थान में सियासी संकट:फेसबुक अकांउट से पाेस्ट वायरल- खुशवीर निर्दलीय, उनकी विधायकी पर काेई असर नहीं हाेगा, इसलिए वे रिस्क ले रहे, खुलकर किसी खेमे में नहीं

पाली10 महीने पहले
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निर्दलीय विधायक खुशीवर सिंह। - Dainik Bhaskar
निर्दलीय विधायक खुशीवर सिंह।
  • मैं सीएम गहलाेत के साथ, चुनाव जीतते ही गहलाेत काे समर्थन दिया था, मैं कांग्रेसी हूं
  • चार दिन से अज्ञातवास में मारवाड़ जंक्शन विधायक, मोबाइल बंद, विधायकों की परेड में भी नहीं दिखे

प्रदेश में सियासी संकट में सूत्रधार बनकर भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूराे की जांच में फंसे मारवाड़ जंक्शन के निर्दलीय विधायक खुशवीर सिंह जाेजावर पिछले 4 दिन से अज्ञातवास पर हैं। इस दाैरान वे सरकार के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के खेमे में नहीं दिखे।

वहीं साेमवार काे मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत की तरफ से अपना संख्याबल दिखाने के लिए केंद्रीय नेताओं के समक्ष सीएमओ में कराई गई विधायकाें की परेड में भी नजर नहीं आए। माना जा रहा है कि निर्दलीय विधायक हाेने के कारण उनकी विधायकी पर काेई असर नहीं हाेना है।

ऐसे में वे दाेनाें नावाें पर सवारी कर रहे हैं। साेमवार काे उनके नाम से साेशल मीडिया में बने अकांउट में पाेस्ट जारी हुई, इसमें खुद काे कांग्रेसी बताने के साथ इसे भाजपा का षड्यंत्र भी मान रहे हैं। वे खुद कह रहे कि वे सीएम गहलाेत के साथ हैं।

खुशवीरसिंह के नाम से सोशल मीडिया पर जारी पाेस्ट और माेबाइल की डीपी पर संदेश के मायने

1. एसओजी की जांच के बाद खुशवीर के खिलाफ एसीबी में पीई दर्ज हुई। इसके बाद उनके बारे में जानकारी नहीं है। वे किसी खेमे में नहीं गए। खुलकर गहलाेत-पायलट का समर्थन नहीं कर रहे। 2. एसीबी मेंं मामला पहुंचते ही उनके बारे में माना जा रहा था कि वे संभवतया: पायलट के खेमे में है, मगर वे उनके साथ कहीं पर नजर नहीं आए और न ही उनके बारे में किसी ने कुछ बाेला है।

3. साेमवार काे बदले घटनाक्रम के बाद गहलाेत खेमे में संख्याबल पर्याप्त हाेने के दावे के बाद उनके नाम से बने साेशल प्लेटफार्म के अकांउट से यह संदेश जारी हाे गया कि वे गहलाेत सरकार के साथ है। इससे माना जा रहा कि वे फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रहे।

4. उनके खिलाफ 4 दिन से बने माहाैल तथा जिले की राजनीति में विराेधियाें काे चेताने के लिए वाॅट्सएप में डीपी के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वे कमजाेर नहीं हैं। और न ही राजनीतिक दाैर बदलने वाला है। 5. भाजपा में जाने से अगली बार विधायकी में परेशानी आ सकती है। सचिन के साथ से राजनीतिक अस्तित्व पर खतरा, क्याेंकि उनके पास संख्याबल नहीं है। गहलाेेत ही मजबूत हैं, इसलिए वे बड़ी रिस्क लेने से बच भी रहे हैं।

वाॅट‌्सएप डीपी पर बड़ा संदेश

निर्दलीय विधायक का माेबाइल प्रदेश की कांग्रेस सरकार काे अस्थिर करने के प्रयासाें के बाद से ही बंद आ रहा है। उनके वाॅट्सएप अकांउट की डीपी पर पाेस्ट लिखी है। उसमें लिखा है... कुछ पन्ने क्या फटे जिंदगी की किताब के, जमाने ने समझा हमारा दाैर ही बदल गया...।

दीवान माधवसिंह ने 32 साल पहले खाेला था माेर्चा, उसमें कामयाब भी हुए, अब खुशवीरसिंह पर संदेह

प्रदेश की कांग्रेस सरकार काे अस्थिर करने के प्रयास में पाली की भूमिका से जुड़ा यह पहला अवसर नहीं है। 1988 में साेजत से विधायक रहे दीवान माधवसिंह भी विद्राेह कर चुके हैं। दीवान ने सीएम स्व. हरिदेव जाेशी के खिलाफ माेर्चा खाेला था। संख्याबल के कारण दीवान सफल रहे। सीएम स्व. जाेशी काे हटना पड़ा। सीएम की गद्दी शिवचरण माथुर काे मिली थी। दीवान काबिना मंत्री बने। अब खुशवीरसिंह की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

शुरू से ही बदलती रही खुशवीर की निष्ठा

खुशवीरसिंह ने राजनीति में आते ही पहले पूर्व मंत्री दीवान माधवसिंह का हाथ पकड़ा। काफी साल तक वे उनके समर्थक बनकर रहे। इसके बाद कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में उठापटक से जिलाध्यक्ष बनते ही सीडी देवल के साथ जुड़ गए।

देवल व दीवान के बीच शुरू से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है। बाद में उन्हाेंने देवल काे भी छाेड़ दिया। उनके बड़े भाई चक्रवतीसिंह भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे। वे खुशवीर से पहले मारवाड़ के प्रधान भी बने। कांग्रेस ने उनकाे विधानसभा में टिकट भी दिया। बाद में वे भाजपा मेंं चले गए थे।

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