इस मासूम को बचाने के लिए चाहिए 30 लाख, VIDEO:8 साल के शुभम को लिवर कैंसर, पिता ठेला चलाते हैं; मां बोली- मैं लिवर डोनेट कर दूंगी, बेटे के ऑपरेशन के लिए कोई मदद कर दे

पाली।5 महीने पहले
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मासूम शुभम को जिंदा रहने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट की है जरूरत।

जोधपुर के चांदना भाखर क्षेत्र में रहने वाला 8 साल का मासूम शुभम लखारा लिवर कैंसर से पीड़ित है। परिजन पिछले छह माह से एम्स में उपचार करा रहे हैं। अब डॉक्टरों ने कह दिया कि ऑपरेशन ही आखिरी उपाय है। हैदराबाद में ऑपरेशन होगा, जिसमें करीब 30 लाख का खर्चा आएगा और परिवार के किसी सदस्य को लीवर डोनेट करना पड़ेगा। मासूम की मां लिवर डोनेट करने के लिए तैयार है, लेकिन ऑपरेशन के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना इनके लिए असंभव है। शुभम के पिता अर्जुन लखारा फैंसी आइटम बेचने का ठेला चलाते हैं। जो कमाई होती है, उससे बड़ी मुश्किल से घर का खर्चा चल पाता है।

अर्जुन ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत होने पर शुभम को जनवरी 2021 में एम्स में दिखाने ले गए। जांच में सामने आया कि बेटे के लिवर में कैंसर की गांठ है। अभी डॉक्टर बोल रहे हैं कि लिवर निकालना ही अंतिम उपाय है।

एम्स अस्पताल की पर्ची।
एम्स अस्पताल की पर्ची।

मां की अपील, लिवर मैं दे दूंगी, ऑपरेशन में कोई मदद कर दें

मासूम की मां दुर्गा देवी अपने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए लिवर डोनेट करने को तैयार है। लेकिन उसमें आने वाला 30 लाख का खर्चा उठाना हाथ ठेला चलाने वाले अर्जुन के लिए असंभव सा है। समाज के लोगों ने अर्जुन की आर्थिक मदद भी की, लेकिन ऑपरेशन के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना इस परिवार के लिए अब भी काफी मुश्किल हो रहा है। मासूम की मां का कहना है कि उनके बच्चे का जीवन बचाने के लिए सरकार स्तर पर भी अभी तक कोई मदद नहीं मिली।

चिकित्सकों ने बोला- लिवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम उपाय

अर्जुन ने बताया कि अब तो डॉक्टरों ने भी बोल दिया है कि शुभम को जिंदा रखने के लिए उसका लिवर ट्रांसप्लांट करवाना बेहद जरूरी है। यह ट्रांसप्लांट हैदराबाद में होगा, जिसका खर्च करीब 30 लाख रुपए है।

पाली विधायक से भी मिला परिवार

बच्चे के ऑपरेशन के लिए मदद की उम्मीद में परिवार पाली आकर विधायक ज्ञानचंद पारख से मिला और उन्हें बच्चे के ऑपरेशन में मदद करने की गुहार लगाई। जिस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि यथासंभव वे उनकी मदद करेंगे। परिवार का कहना है कि पूर्व में वे जोधपुर शहर विधायक मनीषा पंवार से भी मिले थे उन्होंने सरकार से तीन-चार लाख रुपए की मदद का आश्वासन देते हुए फॉर्म भी भरवाया, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। जबकि उपचार में भी अच्छी खासी रकम खर्च हो रही है। सरकार उनके बच्चे का ऑपरेशन करवा दे तो उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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