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AC शौचालय पर ताला:निर्माण के एक साल बाद भी नहीं हुआ उद्घाटन, लोग बोले- जब सुविधा देनी ही नहीं थी तो बनाए क्यों

पाली13 दिन पहले
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बांगड़ कॉलेज परिसर में बने एसी शौचालय पर फिलहाल इनका कब्जा। - Dainik Bhaskar
बांगड़ कॉलेज परिसर में बने एसी शौचालय पर फिलहाल इनका कब्जा।

शहरवासियों के लिए नगर परिषद क्षेत्र में 70-70 लाख खर्चकर के पांच एसी सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करवाया गया। लेकिन बांगड़ कॉलेज परिसर व मस्तान बाबा के निकट बने एसी शौचालय पर निर्माण के एक साल बाद भी ताला लटका हुआ हैं। ऐसे में लोगों व यात्रियों को टॉयलेट भी खूले में करनी पड़ती हैं। विशेषकर महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती हैं लेकिन इनका उद्घाटन करने को लेकर जिम्मेदार कोई कदम नहीं उठा रहे।

बजट घोषणा 2018-19 के तहत निकाय क्षेत्रों में एसी शौचालय बनाने की घोषणा की गई। इसके तहत पाली नगर परिषद क्षेत्र में भी पांच एसी शौचालय बनाने का टेंडर किया। शौचालय बन भी गए लेकिन 70-70 लाख की लागत से बांगड़ कॉलेज परिसर व मस्तान बाबा क्षेत्र में बने एसी शौचालय पर आज भी ताला लटका हुआ हैं। पांच साल तक देखरेख की जिम्मेदारी ठेकेदार की हैं लेकिन एक साल से ज्यादा समय तक तो शौचालय बंद ही पड़ा हैं।

मस्तान बाबा स्थित बंद पड़ा एसी शौचालय।
मस्तान बाबा स्थित बंद पड़ा एसी शौचालय।
बांगड़ कॉलेज परिसर में बना एसी शौचालय जो बंद पड़ा हैं।
बांगड़ कॉलेज परिसर में बना एसी शौचालय जो बंद पड़ा हैं।

दोनों ही जगह लोगों का आना-जाना
बांगड़ कॉलेज परिसर में बने एसी शौचालय के निकट ही निजी व सरकारी बस डिपो हैं। आस-पास सैकड़ों दुकानदार हैं। टेक्सी स्टैंड हैं। एसी शौचालय पर ताला लगा होने के कारण इन्हें आवश्यकता होने पर शौच जाने के लिए परेशानी होती हैं तथा टॉयलेट भी लोग सड़क किनारे खुले में करते हैं। जिससे गंदगी होती हैं।
कुछ ऐसी स्थिति मस्तान बाबा के निकट बने एसी शौचालय की हैं। यहां भी निर्माण के बाद से इस पर ताला लगा हुआ हैं।

लोगों की पीड़ा भी सून लीजिए
मस्तान बाबा के निकट खड़े जीप चालक शेषाराम ने बताया कि पिछले दस साल से यहां जीप चला रहा हैं। एक साल हो गए एसी शौचालय बने हुए लेकिन अभी तक उद्घाटन नहीं किया गया। इसके चलते खुले में टॉयलेट करना पड़ता हैं। जीप चालक कानाराम ने बताया कि एसी शौचालय शराबियों का अड्डा बन रहा हैं। यहां शाम ढलने के बाद लोग बैठकर शराब पीते हैं। शौचालय पर ताला लगा होने के कारण ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें खुले में टॉयलेट करना पड़ता हैं।

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