शिक्षक दिवस पर मिलिए पाली के एक्सल गुरु से:पुलिस की नौकरी छोड़ बने शिक्षक, डिजिटल शिक्षा में किए कई नवाचार तो नाम मिला एक्सल गुरु

पाली3 महीने पहले
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बर स्कूल में पढ़ाते शिक्षक हीरालाल। - Dainik Bhaskar
बर स्कूल में पढ़ाते शिक्षक हीरालाल।

शिक्षा दिवस पर आज हम आपको पाली के एक ऐसे शिक्षक से मिला रहे हैं। जो पुलिस की नौकरी छोड़ शिक्षक बने। कम्यूटर का कोर्स भी कर रखा था। ऐसे में शिक्षक बनते ही डिटिजल शिक्षा में कई नवाचार किए, कम्पूटर प्रोग्राम बनाए जो प्रदेश के शिक्षा विभाग के साथ अन्य कई प्रदेशों में काम में लिए जा रहे हैं। कम्प्यूटर में महारत को देखते हुए इन्हें आज शिक्षा विभाग में एक्सल गुरु के नाम से पहचाना जाता हैं।

हम बात कर रहे हैं बर के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) के वरिष्ठ शिक्षक हीरालाल जाट की। पुलिस कांस्टेबल से लेकर शिक्षक बनने तक की उनकी यात्रा काफी संघर्षमय रही। पिता किसान थे ज्यादा आमदानी थी नहीं। आठवीं तक की पढ़ाई हीरालाल ने चंडावल में की। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। वर्ष 1994 में बारिश की अतिवृष्टि से कुंआ ढह गया था, जिसको पुर्ननिर्माण के लिए उनके पिता को काफी राशि खर्च करनी पड़ी। आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नहीं रही। मां तो ने यहां तक कह दिया कि अब पढ़ना बंद कर पिता की खेत में जाकर मदद कर। लेकिन पिता ने कहां पढ़ो लेकिन कुछ करके दिखाना। पढ़ाई में शुरू से ही हीरालाल होशियार थे तो गांव में ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया तथा कॉलेज, बीएड तक की शिक्षा ट्यूशन पढ़ाकर पूरी की।

छोटा भाई चलता था और वे साथ दौड़कर देते थे अभ्यास

हीरालाल ने बताया कि उन्होंने कॉलेज शिक्षा ब्यावर में पूरी की। वहां हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। अध्यापक सुप्रसिद्ध पाठक की प्रेरणा से पुलिस में जाने की तैयारी शुरू की। घर से दूर मैदान था जहां छोटे भाई के साथ जाते थे। छोटा भाई साईकिल चलता और वे उनके साथ दौड़ते थे। इस तरह से दौड़ का अभ्यास किया।

12 साल तक जरुरतमंद बच्चों को पढ़ाया निशुल्क, तीन सरकारी नौकरी में हीरालाल ने बताया कि 12 साल तक सोजत ब्लॉक के पोटलिया गांव की स्कूल में रहे। पढ़ाई के दौरान उन्हें भी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा था। एक दिन पोटलिया गांव के नरसिंह चौधरी पूर्व जिला परिषद सदस्य ने कहा कि गांव का सार्वजनिक भवन पड़ा हैं। जरुरतमंद बच्चों पढ़ा सकते हैं क्या। उनके आग्रह पर गांव के जरुरतमंद बच्चों को 12 साल तक स्कूल से आने के बाद निशुल्क पढ़ाया। उसका नतीजा यह रहा है कि तीन छात्र वर्तमान में सरकारी नौकरी में हैं तथा कुछ छात्र बीएड पढ़ रहे हैं।

वर्ष 2003 में पुलिस कांस्टेबल बने और वर्ष 2006 में बने शिक्षक
26 अगस्त 2003 में राजस्थान पुलिस से कांस्टेबल के रूप में जुड़े। जोधपुर के सेवाएं दी। लेकिन शिक्षक बन बच्चों को होनहार बनाना चाहते थे। इसलिए पुलिस की ड्यूटी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2006 को शिक्षा विभाग से जुड़े। 24 जुलाई 2006 को पहली नियुक्ति सोजत ब्लॉक के पाटलिया स्कूल में मिली। शिक्षक हीरालाल जाट ने एमसीए (मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन) कर रखा था। अपने इस ज्ञान का उपयोग करने के दौरान पुलिस सेवा में रहते हुए भी सम्मानित हुए। शिक्षा विभाग से जुड़ने के बाद पोषाहार सूचना, बजट प्रपत्र निर्माण, शाला समक, वार्षिक योजना प्रपत्र बनाने का फार्मेट, सांतवा वेतन आयोग, कक्षा 9 व 11 का वार्षिक रिजल्ट तैयार करने के लिए प्रोग्राम बनाया जो प्रदेश की सरकार ने भी अडॉप्ट किया। इसके साथ ही शिक्षक हीरालाल ने और भी कई प्रोग्राम बनाएं तथा डिजिटल शिक्षा में योगदान दिया। जिससे उन्हें प्रदेश भर में एक्सल गुरु के नाम से पहचाना जाता हैं।

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