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मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी:इलाज महंगा तो सरकार ने लोगों की मदद के भरोसे छोड़ा, प्रदेश में हर साल बढ़ रहे 150 मरीज

पालीएक महीने पहलेलेखक: कुणाल पुरोहित
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सुमेरपुर विधायक के विधानसभा में अतारांकित प्रश्न पर सरकार का जवाब- ऐसे मरीजों को आर्थिक सहायता का कोई प्रावधान नहीं। - Dainik Bhaskar
सुमेरपुर विधायक के विधानसभा में अतारांकित प्रश्न पर सरकार का जवाब- ऐसे मरीजों को आर्थिक सहायता का कोई प्रावधान नहीं।

मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी जैसी दुर्लभ और लाइलाज बीमारी की पीड़ा झेल रहे मरीजों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। उनकी सार संभाल के लिए बने विभाग ही नहीं, सरकार भी उनकी सुध नहीं ले रही है। मरीजों काे न ताे सरकार से काेई आर्थिक मदद मिल रही है और न ही चिकित्सा विभाग से उपचार। हर साल प्रदेश में 150 मरीज इस बीमारी के बढ़ रहे हैं।

देश में कोई कंपनी इस बीमारी की दवा नहीं बना रही है और सरकार के पास इतने संसाधन नहीं कि वो इन मरीजों का इलाज करवा सके। अब ताे सरकार ने भी महंगे इलाज के चलते इनको क्राउड फंडिंग (लोगों से इलाज की रकम एकत्रित करने) का विकल्प दे दिया है। हाल ही में विधानसभा में सुमेरपुर विधायक कुमावत ने मरीजों काे मिलने वाली सुविधाओं काे लेकर सवाल किया।

इसके जवाब में सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग ने अपनी जवाबदारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पर डालते हुए बताया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में इनके पुनर्वास की व्यवस्था कर रखी है। लेकिन चिकित्सा विभाग ने इसका जवाब ही नहीं दिया।

मरीजों को संबल प्रदान करने की जरूरत

  • मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों की मांसपेशियां बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती हैं और ऊठना, बैठना और चलना तक मुश्किल होता है। कुछ समय बाद व्यक्ति व्हीलचेयर पर आ जाता है। दैनिक कार्य तक स्वयं नहीं कर पाता। ऐसे मरीजों को संबल प्रदान करने की आवश्यकता है। - वैभव भंडारी, संयोजक, स्वावलंबन फाेर रेयर डिजीज

डिसएबिलिटी की सुविधाओं में जल्द सुधार करेंगे

  • हाई सपोर्ट नीड का इश्यू चल रहा है। इसमें मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी ही नहीं और भी कई तरह की डिसएबिलिटी भी शामिल हैं। सभी पर काम चल रहा है। योजनाओं में आवंटन हो रहा है तो इनमें भी उनको रिजर्वेशन दे रहे हैं। जल्द ही इसमें सुधार कर देंगे। - गजानंद शर्मा, आयुक्त, निदेशालय विशेष योग्यजन

और दूसरे प्रदेशों में मरीजों को घर जाकर दी जा रही फीजियोथैरेपी सेवाएं, 10 हजार की मदद भी

  • आंध्र प्रदेश सरकार मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी और अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों को प्रतिमाह 5 से 10 हजार रुपए की सहायता दे रही।
  • तमिलनाडु सरकार ने फिजियोथैरेपी सेंटर खोल रखे हैं। जो नहीं चल सकते, उनके घर जाकर फीजियोथैरेपी सेवाएं दी जा रही है।
  • तमिलनाडु सरकार ने मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी और टेट्राप्लेजिक के मरीजों 1000 से ज्यादा ऑटोमेटिक व्हील चेयर दी है।

एक नजर में व्यवस्था और गंभीर परिणाम

  • जेनेटिक मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी का कोई उपचार नहीं, अभी तक की रिसर्च में सिर्फ फीजियो थैरेपी से कुछ हद तक मेंटेन किया जा सकता है।
  • बच्चों को वंशानुगत होने वाली मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी में 35 साल की उम्र तक आते-आते मरीज काे व्हील चेयर पर आना पड़ता है।

राज्य में ऐसे मरीजों के लिए कोई योजना नहीं : कुमावत
मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों के लिए राज्य में कोई विशेष योजना नहीं है । इस बीमारी के कई प्रकार हैं, जिसका फिलहाल कोई इलाज नहीं है। राज्य सरकार को संवेदनशीलता रखते हुए, इन मरीजों के लिए विशेष योजना बनानी चाहिए। इसी को लेकर विधानसभा में अतारांकित प्रश्न लगाए थे, जिसमें सरकार ने बताया कि इन मरीजों को आर्थिक सहायता का कोई प्रावधान नही हैं।-जोराराम कुमावत, विधायक सुमेरपुर

विधानसभा में अतारांकित प्रश्न - विधायक कुमावत के सवालों पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का जवाब

प्रदेश में मरीजों के लिए क्या योजना है?
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन मेडिकल काॅलेजाें में मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों की निशुल्क जांच एवं न्यूनतम दरों पर एनसीएस व ईएमजी की जांचें हाेती हैं। जाे मरीज विकलांगता के दायरे में आते हैं, उन्हें विकलांगता प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। जिन मरीजों काे मसल बायोप्सी एवं काॅन्ट्रेक्चर रिलीज सर्जरी की आवश्यकता होती है, उन्हें प्लास्टिक सर्जरी विभाग से समन्वय कर रेफर किया जाता है। इससे अलग कोई योजना राज्य सरकार के विचाराधीन नहीं है।

पुनर्वास की क्या व्यवस्था है?
मेडिकल काॅलेजाें के पुनर्वास अनुसंधान केंद्र में पुनर्वास की सुविधा है।

आर्थिक संबल के लिए क्या प्रावधान है?
विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर विशेष योग्यजनों को देय सभी सुविधाएं नियमानुसार दी जा रही हैं।

क्या सिलिकोसिस मरीजों की तरह आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है?
राजस्थान सिलिकोसिस नीति 2019 के अंतर्गत मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों काे आर्थिक सहायता देने का प्रावधान नहीं है।

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