भास्‍कर ग्राउंड रिपोर्ट:जालाेर काे नर्मदा, जाेधपुर काे मिल रहा हिमालय का पानी, दाेनाें के बीच बसा पाली फिर भी प्यासा

पाली12 दिन पहले
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जालाेर में नहर के जरिए आ रहा नर्मदा का पानी, यह पानी पेयजल ही नहीं, सिंचाई में भी काम आ रहा है। - Dainik Bhaskar
जालाेर में नहर के जरिए आ रहा नर्मदा का पानी, यह पानी पेयजल ही नहीं, सिंचाई में भी काम आ रहा है।
  • जालोर या जोधपुर से रोहट तक नहर का पानी आ जाए, तो जवाई लाइन से जोड़ सकेंगे

पाली के पड़ाेसी जिलाें में 200 से 250 किमी लंबे नहर से पानी पहुंचाकर लाेगाें की प्यास बुझाई जा रही है, फिर भी पाली प्यासा ही है। नर्मदा का पानी नहर के माध्यम से जालाेर के भाद्राजून तक पहुंच गया है। वहीं, हिमालय का पानी कई जिलाें से गुजर रही नहर से जाेधपुरवासियाें की प्यास बुझा रहा है।

पाली इन दाेनाें शहराें के बीच है, लेकिन यहां इन नहराें का पानी पहुंचाने काे लेकर कभी प्रयास ही नहीं किए गए। नतीजा यह रहा कि जवाई बांध में पानी की कमी हाेते ही पाली के लिए जाेधपुर से वाटर ट्रेन मंगवाने की नाैबत आ जाती है। जवाई बांध काे भरने काे लेकर जनप्रतिनिधि साबरमती का पानी लाने का सिर्फ दावा ही करते रहे।

अभी भी यह प्राेजेक्ट सिर्फ कागजाें में ही है। इस बार जवाई क्षेत्र में बारिश नहीं हाेने से जिले की जनता काे 96 घंटे में एक बार पानी मिल रहा है, जबकि पूरा जाेधपुर राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल पर ताे जालाेर जिले का आधे भाग की जनता काे नर्मदा का पानी राेजाना मिल रहा है। अगर अब भी थाेड़ा सा प्रयास करें ताे पाली के दाेनाें ओर आ रही नहराें का पानी पाली तक लाया जा सकता है।

जालोर या जोधपुर से रोहट तक नहर का पानी आ जाए, तो जवाई लाइन से जोड़ सकेंगे

नर्मदा का पानी : जालाेर के सांचाैर के सिलू प्वाइंट से नर्मदा नहर का पानी प्रवेश करता है। वर्ष 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सिलू प्वाइंट पर नहर का उद्घाटन किया था। 12 साल में वर्ष 2021 तक नर्मदा का पानी जालाेर मुख्यालय के साथ नजदीक भाद्राजून तक पहुंच गया है। जालाेर जिले का आधा से ज्यादा भाग नर्मदा के पानी पर निर्भर है।

क्या पानी पाली लाया जा सकता है

पाली से भाद्राजून मात्र 112 किमी दूर है और राेहट से मात्र 56 किमी ही है। पानी काे पाइपलाइन या नहर के जरिए लिफ्ट कर राेहट तक लाया जा सकता है। राेहट पानी पहुंचने के बाद उसे जवाई पाइपलाइन के जरिए लिफ्ट कर पाली पहुंचाया जा सकता है।

पानी का आरक्षण जरूरी : सीई

नर्मदा व हिमालय का पानी पाली के लिए आरक्षण नहीं है। पूर्व में पाली में एसई रहते नर्मदा का पानी लाने का प्रयास किया था, लेकिन नहीं मिल पाया। यह समझाैते दाे सरकाराें में हाेते हैं, तभी पानी मिलता है। -

नीरज माथुर, चीफ इंजीनियर, जलदाय विभाग जाेधपुर

​​​​​​​​​​​​​​हिमालय का पानी : पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1983 में इंदिरा गांधी लिफ्ट कैनाल का पानी जाेधपुर पहुंचाने की घाेषणा की थी। हिमालय का पानी जाेधपुर लाने के लिए करीब 205 किमी लंबी नहर भी बनी। कई जगहाें पर लिफ्ट कर पानी जाेधपुर पहुंचाया गया। वर्ष 1990 के दशक में यह पानी भी पहुंच गया, जिससे जाेधपुरवासियाें काे अकाल में भी राहत मिली है। कारण यह है कि जाेधपुर में जसवंत सागर के अलावा वर्तमान में सिर्फ 3 बांध ही हैं, वे भी खाली पड़े हैं।

क्या यह पानी जोधपुर से पाली लाया जा सकता है

पाली जाेधपुर में 70 किमी की दूरी है। पाइपलाइन के जरिए पानी राेहट तक पहुंचाया जा सकता है। वर्ष 2002 में जाेधपुर से आपातस्थिति में पाइपलाइन डालकर पानी लाया गया था। हाल ही में राजीव गांधी परियाेजना के तृतीय चरण में राेहट काे भी पानी देने की तैयारी है। राेहट में पानी पहुंचाने के बाद जवाई पाइपलाइन के जरिए पानी लिफ्ट कर पाली लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री से बात करेंगे : प्रभारी मंत्री

पाली में पानी के स्थायी समाधान के लिए कलेक्टर से चर्चा की है। हिमालय का पानी लाने का प्रयास करेंगे। यही एक विकल्प है। मैं मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत से मिलकर पेयजल के विकल्पों पर चर्चा करुंगा।​​​​​​​

- सालेह माेहम्मद, प्रभारी मंत्री, पाली

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