जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ‘नो-बेड’:अब तो गैलरी भी भरने लगी, दिन-रात मरीजों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद

पाली6 महीने पहले
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बांगड़ अस्पताल की गैलरी में ऑक्सीजन सिलेंडर तक बांधकर रखा गया है। - Dainik Bhaskar
बांगड़ अस्पताल की गैलरी में ऑक्सीजन सिलेंडर तक बांधकर रखा गया है।
  • कोरोना संक्रमण की ऐसी मार कि बांगड़ अस्पताल का सिस्टम भी हांफने लगा, इसलिए गाइडलाइन का पालन करें, यह हमारी सुरक्षा के लिए

काेराेना महामारी की दूसरी लहर के आगे बांगड़ अस्पताल का सिस्टम भी हांफ रहा है। लगातार बढ़ रहे मरीजाें के कारण अस्पताल में घंटाें तक बेड नहीं मिल रहे, गैलरी में ही स्ट्रेचर पर ही कई मरीजाें की उखड़ती सांसाें के बीच ऑक्सीजन से जान हलक में अटकी हुई है।

अस्पताल प्रबंधन भी जैसे-तैसे व्यवस्थाओं काे पटरी पर लाने का प्रयास ताे कर रहा है, मगर मरीजाें की बढ़ती तादात के आगे अब वह भी असहाय हाे चुका है। यहां तक कि कुख्यात अपराधियाें के लिए बने वार्ड काे भी आम लाेगाें के लिए खाेलना पड़ा है। वे इन अपराधियाें के साथ ही वार्ड में अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

भास्कर ने बुधवार काे बांगड़ अस्पताल जाकर हालात देखे ताे पता चला कि यहां पर काेराेना से सिस्टम काे भी वायरस हाे गया है। ऐसी स्थिति में हर काेई भगवान के भराेसे ही अपनी जान बचाने की दुआ कर रहा है।

पहला सच: ऑक्सीजन की मारामारी, चोरी से बचाने सिलेंडर जंजीराें से बांधा

अस्पताल में ऑक्सीजन काे लेकर मारामारी ताे अभी नहीं है। इसके बाद भी मरीजाें के साथ आने वाले परिजन एक स्थान से दूसरे स्थान तक सिलेंडर खुद ही उठाकर ले जाते हैं। ऐसे में प्रबंधन ने कोविड ओपीडी में लोहे की जंजीरों में ऑक्सीजन सिलेंडर बंधवा दिए हैं।

क्योंकि अस्पताल प्रबंधन को इस बात का डर है कि मरीज को भर्ती करते समय कई परिजन ओपीडी से ही ऑक्सीजन सिलेंडर अपने साथ वार्ड में ले जाते हैं, जिससे उन्हें बाद में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसके चलते ओपीडी में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर को जजीरों से बांध रखा है, जिससे कि इन्हें कोई लेकर न जा सके। अस्पताल प्रबंधन ने अब कोविड ओपीडी में दो सिलेंडर की व्यवस्था की है, ताकि गंभीर मरीजों को वार्ड में भर्ती करने से पहले प्राथमिक रूप से ऑक्सीजन दी जा सके।

दूसरा सच : गैलरी में स्ट्रेचर पर हांफ रही हैं जिंदगियां, क्योंकि वार्डों में बेड नहीं मिल रहे

बांगड़ अस्पताल में काेराेना मरीजाें के लिए बेड तब ही खाली हाे रहे जब किसी का दम टूट रहा है या किसी का ऑक्सीजन लेवल 92 तक जा रहा। नए मरीजाें काे घंटाें तक बेड के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

स्ट्रेचर पर ही अस्पताल की गैलेरी में एक साथ 4 मरीज लेटे हैं। नर्सिंगकर्मियों ने इन लाेगाें के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था ताे कर दी। वे यहीं पर साेते हुए ऑक्सीजन के सहारे अपनी सांंसाें काे दुरुस्त करने की जद्दाेजहद में लगे हैं।

तीसरा सच: जगह कम पड़ी तो अपराधियों के वार्ड में आम मरीजाें काे कर रहे हैं भर्ती

कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने पर अब कैदियों के इलाज के लिए अस्पताल में आरक्षित वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। वार्ड में आने वाले मरीजों के परिजनों की आड़ में कोई कैदी भाग न जाए

इसके लिए यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों का ज्यादा अलर्ट रहना पड़ रहा है। जेल वार्ड में सांस की तकलीफ होने के चलते पांच कैदियों को इलाज के लिए भर्ती किया गया है। शेष पांच बेड पर अन्य कोविड मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

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