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कोरोना कमजाेर:सीटी स्कोर बढ़ने वाले मरीज आना बंद, रिकवरी रेट भी 99.49%

पालीएक महीने पहले
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  • आम लाेगाें से वैक्सीन अभी दूर, मास्क और साेशल डिस्टेंसिंग अब भी जरूरी, क्योंकि इसी से होगा बचाव

जिले में काेराेना का असर लगातार कम हाेता जा रहा है। पिछले दाे दिन में काेराेना के केवल 3 संक्रमित ही सामने आए हैं। इस वायरस के कम हाेने के कई कारण सामने आ रहे हैं। इनमें एक वजह लाेगाें में हार्ड इम्युनिटी डेवलप हाेना है और दूसरा इस वायरस का माैसम के अनुकूल नहीं हाेना। महत्वपूर्ण बात यह है कि सीटी स्कोर भी अब कम आने लगा है। कोरोना जब चरम पर था तब सीटी स्कोर 10 से ऊपर आ रहा था, लेकिन अब संदिग्ध मरीजों में जीरो तक आने लगा है।

जिले में अब तक काेराेना के 14 हजार 900 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 12 हजार 834 मरीज स्वस्थ हाेकर घर लाैट चुके हैं। जिले की रिकवरी रेट भी 99.49 पहुंच गई है। जनवरी महीने में पहली बार रिकवरी रेट ने 99 प्रतिशत पहुंची है और उसी पर बरकरार भी है। बांगड़ अस्पताल में बने काेराेना के अधिकांश वार्डाें पर भी ताले लगा दिए हैं। वर्तमान में केवल 3 आइसाेलेशन वार्ड और दाे आईसीयू ही मरीजाें के लिए खुले हैं। इनमें 21 मरीज ही भर्ती हैं।

काेराेना में बनाए थे 9 आइसाेलेशन वार्ड और 2 काेविड आईसीयू
बांगड़ अस्पताल प्रबंधन ने काेराेनाकाल जब चरम पर था तब मरीजाें के लिए 9 आइसाेलेशन वार्ड और दाे काेविड आईसीयू बनवाए थे। इनमें आइसाेलेशन बी, सी, डी, एफ, आई, जे, के, जीएनएम सेंटर और संचेती धर्मशाला में क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया था। जबकि पुराना और नया आईसीयू भी बना था। लेकिन अब आइसाेलेशन वार्ड डी, एफ, जे, के, जीएनएम और संचेती धर्मशाला काे बंद कर दिया गया है।

वायरस निष्क्रिय, मौसम में बदलाव भी बड़ा कारण
काेराेना मरीज इसलिए कम हाे रहे हैं क्याेंकि वायरस निष्क्रिय हाे गया। वायरस के कम हाेने से ट्रांसमिशन दर भी कम हाे गई। जाे 2 से 4 और 4 से 8 लाेगाें में फैलता था। वह कम हाे गया। यूं कह सकते हैं कि वायरस का एक से दूसरे व्यक्ति में प्रवेश करने का साेर्स भी कम हाे गया।

इसकी वजह माैसम परिवर्तन हाेना है। कभी तेज सर्दी हाे जाती ताे कभी सर्दी का असर कम हाेने लगता। हर दिन माैसम एक जैसा नहीं रहा। इसलिए यह अलग-अलग वेरिएशन में नहीं फैला। कई देशाें में ताे अभी भी लाॅकडाउन की स्थिति है।

सीटी स्काेर बढ़ने वाले मरीज भी आना बंद हाे गए हैं
ज्यादातर लाेगाें काे संक्रमण हाे चुका है। जिनकाे नहीं हुआ, उनमें हार्ड इम्युनिटी बन चुकी है। अब संदिग्ध मरीजाें की जांच करवाने पर सीटी का स्काेर भी जीराे ही आ रहा है। इसमें कई लाेग ताे ऐसे भी थे, जिन्हाेंने लक्षण आने के बाद घर पर ही इलाज ले लिया। अब इक्का दुक्का मरीज ही सामने आ रहे हैं। सीटी स्काेर बढ़ने वाले मरीज आना बंद हाे गए हैं। दाे दिन में एक भी मरीज ऐसा नहीं आया, जिसका सीटी स्काेर बढ़ा हुआ आया हाे। यह स्थिति 4-5 दिन पहले थी, जब सीटी स्काेर 5-8 के बीच में आया था।

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