पुलिस का बलिदान भी किसी से कम नहीं:न विकली ऑफ न त्यौहार पर छुट्‌टी, आज भी बिना छुट्‌टी 24 घंटे ड्यूटी

पाली3 महीने पहले
पाली के पुलिस लाइन परिसर में शुक्रवार सुबह शहीद दिवस पर पुष्प चक्र अर्पित कर शहीदों को याद करते पाली एसपी डॉ गगनदीप सिंगला।

सीमा की रक्षा में लगे सैन्य बलों के बलिदान की कहानियां हमने खूब सुनी। लेकिन पुलिसकर्मियों के शौर्य व बलिदान का इतिहास भी कम नहीं हैं। बात वर्ष 1959 में की है। जब चीनी सैनिकों को पीठ दिखाकर भागने की अपेक्षा उनका मुकाबला करते हुए 10 पुलिसकर्मी मातृभूमि की रक्षा के लिए शहीद हुए। जिनकी बॉडी 13 नवम्बर 1959 को चीनी सैनिकों ने लौटा दी थी। जिनका पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। हर साल उन शहीद पुलिसकर्मियों की याद में 21 अक्टूबर को पुलिस दिवस मनाया जाता हैं।

पाली के पुलिस लाइन परिसर में रक्तदान करते पुलिसकर्मी।
पाली के पुलिस लाइन परिसर में रक्तदान करते पुलिसकर्मी।

पुलिस शहीद दिवस पर आज हम पुलिसकर्मियों की ड्यूटी की लाइफ पर चर्चा करेंगे। जिन्हें आज भी विकली ऑफ नहीं मिलता, तीज-त्यौहारों पर अपनों से दूर रहकर लॉ एण्ड ऑर्डर के लिए ड्यूटी करते नजर आते है। आमजन की सुरक्षा में 24 घंटे पुलिस अधिकारी व जवान ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। कई बार विकली ऑफ की मांग भी उठी लेकिन अभी तक उस पर मोहर नहीं लग सकी।

पाली के पुलिस लाइन मैदान तीन बार फायर करते हुए शहीदों को शोक सलामी देते हुए पुलिस के जवान।
पाली के पुलिस लाइन मैदान तीन बार फायर करते हुए शहीदों को शोक सलामी देते हुए पुलिस के जवान।
पाली के पुलिस लाइन परिसर में पौधरोपण करते एसपी डॉ गगनदीप सिंगला व अन्य पुलिस अधिकारी।
पाली के पुलिस लाइन परिसर में पौधरोपण करते एसपी डॉ गगनदीप सिंगला व अन्य पुलिस अधिकारी।

पाली के इन पुलिसकर्मी जिन्हें याद किया जाना चाहिए

ASI सुखराम : 25 अक्टूबर 2000 को बदमाश चंदूसिंह को पकड़कर ला रहे थे। नशे में चंदूसिंह ने लोहे के क्लिप से उनकी कनपटी पर मुक्का मारा। अचानक हुए हमले के बाद भी सुखराम ने हिम्मत नहीं हारी ओर बदमाश को पकड़कर थाने तक ले गए। बाद में उनकी ब्रेन हेमरेज से उपचार के दौरान अस्पताला में मौत हो गई।

माणकसिंह : 28 जुलाई 1998 को पुलिसकर्मी माणकसिंह की तस्करों की धरपकड़ के दौरान गाड़ी से कुचले जाने से अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी।

फतेहसिंह, पूरणसिंह : वर्ष 13 मई 2004 को उपचुनाव मतगणना ड्यूटी के दौरान वाहन की टक्कर से दोनों की मौत हो गई। फतेहसिंह पाली जिले के खिंवाड़ा थाना क्षेत्र व पूरणसिंह गुड़ा एंदला थाना के जेतपुरा गांव के रहने वाले थे। दोनों को शहीद का दर्जा दिया गया।

एएसआई राजूसिंह : जुलाई 2016 सदर थाने में तैनात एएसआई राजूसिंह रामासिया के निकट हादसे की सूचना पर मौके पर गए। जहां अचानक क्रेन ने उन्हें टक्कर मार दी। जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

महिला थानाप्रभारी रहे कैलाश चारण : 31 अगस्त 2016 को सड़क हादसे में पाली के महिला थानाप्रभारी रहे कैलाश चारण की जोधपुर से आते समय मोगड़ा के निकट सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वे जालोर जिले के जसंवतपुरा थाना क्षेत्र के कैर गांव के निवासी थे।

पुलिस लाइन ग्राउंड में कार्यक्रम के दौरान खड़े पुलिसकर्मी।
पुलिस लाइन ग्राउंड में कार्यक्रम के दौरान खड़े पुलिसकर्मी।

पाली में शहीद पुलिसकर्मियों को किया याद

पाली शहर के पुलिस लाइन मैदान में शुक्रवार सुबह पुलिस शहीद दिवस को लेकर कार्यक्रम आयोजित हुआ। SP डॉ गगनदीप सिंगला के नेतृत्व में देश भर में शहीद हुए पुलिसकर्मियों को याद किया गया। तीन बार फायर करते हुए शहीदों को शोक सलामी दी गई। एसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धाजंलि दी। इस दौरान पुलिस लाइन परिसर में पौधरोपण किया गया। उसके बाद रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। जिसमें 24 जवाओं ने रक्तदान किया। कार्यक्रम में सीओ सिटी अनिल सारण, सीओ ग्रामीण मंगलेश चुंडावल, कोतवाल सुरेश चौधरी, ट्रांसपोर्ट नगर थानाप्रभारी विक्रम सांदू, सदर थाना प्रभारी रविन्द्रसिंह, औद्योगिक थानाप्रभारी अरूण कुमार, पुलिस लाइन प्रभारी गंगासिंह सहित कई पुलिस अधिकारी और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।