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असर:काेराेना के साथ निमोनिया के लक्षण वाले मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव अाने के बाद प्लमाेनरी फाइब्राेसिस बीमारी, 6 मिनट चलते ही हांफ रहे

पाली8 महीने पहले
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  • प्रतिदिन 10 मरीज काेराेना से ठीक हाेकर प्लमाेनरी फाइब्राेसिस का इलाज करवाने के लिए पहुंच रहे बांगड़ अस्पताल

जिले में काेराेना अपना घातक रूप दिखाने लगा है। मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अब वह प्लमाेनरी फाइब्राेसिस नामक बीमारी की चपेट में आ रहा है। ऐसे में मरीज के फेफड़े सिकुड़ जाते हैं। साथ ही मरीज काे अत्यधिक थकान, सांस भरने, हृदय की धड़कन बढ़ने, सीने में भारीपन, मांसपेशियों में दर्द और सूखी खांसी की शिकायत हाेने लगती है।

समय पर इलाज नहीं लेने पर मरीज की माैत भी हाे जाती है। पाली जिले में अब तक 8 हजार 834 काेराेना के संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं। जिसमें से करीब 7 हजार मरीज काेराेना से ठीक हाेकर घर जा चुके हैं। लेकिन इन संक्रमिताें में से करीब 20 प्रतिशत मरीजों में काेराेना के साथ निमोनिया के लक्षण दिखाई दिए, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उन्हें सांस लेने में तकलीफ, हृदय की धड़कन बढ़ने, सीने में भारीपन, मांस पेशियों में दर्द और सूखी खांसी हाे रही है।

बांगड़ अस्पताल में हर राेज करीब 10 काेराेना सर्वाइवर ऐसी समस्या लेक पहुंच रहे हैं। लेकिन कई मरीज अभी भी प्लमाेनरी फाइब्राेसिस बीमारी से अनभिज्ञ है। इसके चलते वे समय पर इलाज नहीं करवा पा रहे हैं।

फेफड़ाें में अधिक निमाेनिया के लक्षण हाेने पर हाेती है प्लमाेनरी फाइब्राेसिस, ऐसे मरीजों का सिकुड़ जाता है फेफड़ा

काेराेना के साथ निमोनिया के लक्षण वाले मरीज समय पर इलाज ले ताे उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है। लेकिन मरीज के फेफड़ों में जमा कफ साफ नहीं हाे पता। इसके चलते फेफड़ों के उत्तक कठाेर हाे जाते हैं। इससे ऑक्सीजन फेफड़े से रक्त में पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाती। इससे मरीज काे सांस लेने में समस्या, जल्दी थकान और जाेड़ाें में दर्द बना रहता है।

स्वस्थ फेफड़े के लिए एक्सरसाइज

  • ऐसे मरीज तीन तरह से सांस लेने की एक्सरसाइज करें। पहली- हल्के-हल्के सांस लें। दूसरा जल्दी - जल्दी सांस लें, इसमें गहरी सांस नहीं ले हल्की हल्की लें और जाेर से छाेड़े। तीसरा गहरी सांस लें और जाेर से छाेडें यह एक तरह से कपाल भांति का ही रूप है।
  • डायफ्रामेटिव ब्रीदिंग एक्सरसाइज: इसमें पूरी सांस भरके पेट से सांस छाेड़ते है और मुंह से जैसे सीटी बजाते हैं।
  • स्कूल में पीटी करवाते हैं वह पीटी की एक्सरसाइज भी करते रहेंगे ताे फेफड़े के लिए अच्छा है।
  • निमोनिया वाले मरीजों काे प्लमाेनरी फाइब्राेसिस हाेने अधिक संभावना हाेत है। इसमें फाइब्राेसिस जितना ज्यादा हाेगा मरीज में उतने ही अधिक लक्षण दिखाई देंगे। मरीज 6 मिनट पैदल चलकर बहुत आसानी से प्लमाेनरी फाइब्राेसिस बीमारी का पता लगा सकता है। फाइब्राेसिस वाले मरीज समय पर परामर्श लेने के बाद दवा लेकर व फेफड़ों का व्यायाम करके इससे निजात पा सकता है। - डाॅ. लक्ष्मण साेनी, असिस्टेंट प्राेफेसर, प्लमाेनरी विभाग, पाली
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