बिछड़े बेटे को परिजनों से मिलाया:पिता ने डांटा तो घर से बिना बताए निकल गया 13 साल का जेठाराम, टीसी ने परिजनों तक पहुंचाया

रानी (पाली)10 महीने पहले
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पाली रानी के रेलवे स्टेशन पर अपने बेटे के साथ मोतीलाल भील। - Dainik Bhaskar
पाली रानी के रेलवे स्टेशन पर अपने बेटे के साथ मोतीलाल भील।

पिता के डांटने से नाराज एक 13 साल का बालक घर से बिना बताए निकल कर रानी रेलवे स्टेशन पहुंच गया। जहां कार्यरत टीसी की सजगता ने बालक को वापस परिजनों तक पहुंचाया।

हुआ यूं कि रानी स्टेशन पर कार्यरत टीसी भानूप्रकाश गुर्जर सुबह 9 बजे ड्यूटी पर आए तो उन्हें एक 13 साल का बालक रेलवे प्लेटफॉर्म पर बैठा मिला। काफी देर तक भी वह प्लेटफॉर्म पर ही बैठा रहा तो उन्होंने उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि वह समदड़ी क्षेत्र का रहने वाला हैं। तथा फेक्ट्री में काम करता हैं और अपने भाईयों के साथ गांव जा रहा था। तथा मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर उनसे बिछड़ गया। अब वापस समदड़ी जाना हैं। जिस पर उन्होंने बालक से उसके गांव का नाम व पिता के मोबाइल नम्बर पूछ तो वह बता नहीं सका। जिस पर उन्होंने समदड़ी में अपने दोस्त कमलेश देव मुरारी (अध्यापक) से बचे के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अपने स्तर पर पता किया तो सामने आया कि तेजसिंह की ढाणी खेजड़लिया (समदड़ी) से 13 साल का जेठाराम तीन दिन से लापता हैं तथा उसके परिजन उसे ढूंढ रहे हैं। जिस पर उन्होंने मोतीलाल भील को बच्चे का फोटो दिखाया तो उन्होंने पहचान लिया कि यह उनका बेटा जेठाराम हैं। जिस पर उन्होंने बताया कि वह रानी रेलवे स्टेशन पर सुरक्षित हैं। बाद में जेठाराम रानी पहुंचे। जहां आवश्यक पूछताछ के बाद उन्हें बालक को सौंपा।

रानी स्टेशन पर कार्यरत टीसी भानूप्रकाश गुर्जर जिन्होंने समदड़ी में रहने वाले अपने दोस्त की मदद से बालक के परिजनों का पता लगा उन तक बच्चे को पहुंचाय।
रानी स्टेशन पर कार्यरत टीसी भानूप्रकाश गुर्जर जिन्होंने समदड़ी में रहने वाले अपने दोस्त की मदद से बालक के परिजनों का पता लगा उन तक बच्चे को पहुंचाय।

डांटा तो बकरियां छोड़ निकल गया
बालक के पिता मोतीलाल ने बताया कि उनका बेटा कक्षा 7वीं में पढ़ता हैं। वह फेक्ट्री में काम नहीं करता। पढ़ाई के लिए कहता था इसलिए नाराज हो गया। घर से वह बकरियां चराने जंगल में गया था। शाम तक भी नहीं लौटा तो शक हुआ। जंगल में जाकर ढूंढा तो भी नहीं मिला। हम तो काफी परेशान हो गए थे। अध्यापक कमलेश देव मुरारी ने जब बताया कि जेठाराम रानी में सुरक्षित हैं तो इसे लेने दौड़े चले आए।

रेलवे स्टॉफ ने की देखभाल
टीसी भानूप्रकाश गुर्जर ने बताया कि बालक के पास रुपए नहीं थे। उसके बारे में पता चलते ही उसे पहले चाय, नाश्ता करवाया। उसके बाद भोजन करवाया। वह परेशान न हो इसलिए उसे रेस्ट रूम में आराम करने के लिए बिठाया।

(फोटो - नरेन्द्र बुनकर, रानी)

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