कलेक्टर से लेकर एसडीएम दे चुके विभागीय अधिकारी को आदेश:निमाज में 7.13 बीघा जमीन को राजस्व अधिकारियों ने रिकॉर्ड में दर्ज किया 1.13 बीघा, निजी स्कूल भी खाेल दी

पाली2 महीने पहले
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भास्कर संवाददाता | पाली जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत निमाज में बेशकीमती जमीन काे भू-तस्कराें ने हथियाने के लिए पहले ताे इस पर अपना अतिक्रमण जमा दिया। इसके बाद बरसों से 7 बीघा से अधिक जमीन को इन लोगों ने राजस्व अधिकारियों से मिलकर राजस्व रिकॉर्ड में 1 बीघा करवाकर ग्राम पंचायत से पट्टे भी जारी करवा दिए। मजेदार बात ताे यह है कि अब वहां पर टीन-छप्पर वाली एक निजी स्कूल भी खड़ी कर दी गई है। स्कूल काे लेकर शिकायत करने के बाद जांच में यह सामने अा चुका है कि जिस जमीन पर स्कूल संचालित हाे रही, उसकी मान्यता भी नहीं है। इसके बाद भी काेई कार्रवाई नहीं हाे रही है। पीड़ित परिवार पिछले कई महीनाें से कलेक्टर से लेकर पटवारी तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अागे दरकार लगा चुका, मगर उसे आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिल रहा है। जानकारी के अनुसार नियमानुसार खातेदारी जमीन को आबादी में दर्ज कराने के लिए कलेक्टर से आदेश पर ही जमीन की किस्म बदल सकती है। साथ ही तहसीलदार डीएलसी रेट तय करता है। पीड़ित परिवार के ढगलाराम कुमावत, नेमीचंद कुमावत तथा धर्मीचंद कुमावत का कहना है कि ग्राम की आबादी भूमि से सटा हुए खसरा नंबर 1677 की साढ़े सात बीघा भूमि में से छह बीघा भूमि को आबादी में सम्मिलित किए जाने का इंद्राज लाल स्याही से पुरानी जमाबंदी में किया गया है। लेकिन इस छह बीघा भूमि को न तो नक्शे में आबादी में सम्मिलित किया गया है और न ही किसी अन्य दस्तावेज में। वर्तमान में खसरा संख्या 1677 की 1 बीघा 13 बिस्वा भूमि निमाज निवासी ढगलाराम रमेशचंद, नेमीचंद, मूलचंद सहित इसी परिवार के अन्य लोगों के नाम दर्ज है, लेकिन शेष करीब छह बीघा भूमि का कहीं इंद्राज नहीं है। इस छह बीघा भूमि का इंद्राज आबादी भूमि निमाज के नाम से दर्ज होना चाहिए था। राजस्व रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है। निमाज ग्राम की आबादी एवं खातेदारी भूमि के नक्शों में भी इस छह बीघा भूमि को आबादी में जोड़ने के संबंध में कोई इंद्राज नहीं किया गया है।

^इस मामले की शिकायत हाेने के बाद जांच कराई गई थी। दाे पक्षाें के बीच जमीन का विवाद भी चल रहा है। संचालक ने स्कूल की मान्यता पटेलाें की हथाई स्थल पर ले रखी है, जबकि स्कूल विवादित स्थल पर संचालित हाेना पाई गई। संचालक ने स्कूल में स्थान परिवर्तन करने की सूचना भी विभाग काे नहीं दी। इसके विभागीय कार्रवाई के लिए निदेशक से मार्गदर्शन मांगा जा रहा है। मदनलाल पंवार, जिला शिक्षा अधिकारी, पाली

पंचायत अपने स्तर पर आबादी भूमि दर्ज नहीं कर सकती 1. खातेदारी भूमि को सीधे ही आबादी में दर्ज नहीं किया जा सकता 2. खातेदारी भूमि को पहले सिवाय चक में दर्ज करना पड़ता है 3.कलेक्टर के आदेश से ही जमीन की किस्म में परिवर्तन संभव है 4. 21 वर्ष पुराने का कब्जा मानकर डीएलसी रेट तहसीलदार तय करता है 5. जमीन का कब्जा भी ग्राम पंचायत के पास नहीं था

मान्यता पटेलाें की हथाई की, चल रही विवादित जमीन पर विवादित जमीन पर टीन-छप्पर डालकर वहां पर निजी स्कूल संचालित करने काे लेकर पीड़ित परिवार ने शिक्षा विभाग में शिकायत भी दर्ज कराई। इसके बाद शिक्षा अधिकारियों की टीम ने माैके पर जाकर जांच की। इसमें पता चला कि निजी स्कूल की मान्यता ताे शिक्षा विभाग से ले रखी है, मगर वह पटेलाें की हथाई निमाज के नाम से है। वर्तमान में विवादित जमीन पर स्कूल का संचालन किया जा रहा है, इसके स्थान परिवर्तन की काेई सूचना विभाग में नहीं दी गई। शिक्षा विभाग के जांच अधिकारियों ने स्कूल संचालक से उक्त जमीन बाबत दस्तावेज भी मांगे, मगर प्रमाणित सबूत नहीं दे पाया। यह रिपोर्ट बनाकर जिला शिक्षा अधिकारी काे साैंपी जा चुकी है। इसके बाद भी अाज तक स्कूल काे वहां से हटाने की काेई कार्रवाई नहीं हुई है।

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