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साेलर पाली:शहर में 59 फैक्ट्रियों व 111 घराें में लगे साेलर पैनल, प्रतिमाह 3.4 लाख यूनिट बिजली बचा रहे

पालीएक महीने पहले
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  • घराें में साेलर के जरिए बिजली उत्पन्न कर बिजली बचत कर रह

शहर के इंडस्ट्रीज से लेकर घराें में साेलर के जरिए बिजली उत्पन्न कर बिजली बचत कर रहे हैं। शहर में घराें में लाेगाें ने जहां 2 से 12 किलाेवाॅट तक के साेलर पैनल लगा रखे हैं। वहीं इंडस्ट्रीज में खपत व जगह के अनुसार 100 से 350 किलाेवाॅट के पैनल लगाकर बिजली बचाई जा रही है।

खास बात यह है कि साेलर पैनल लगाने में राशि खर्च करने के बाद इसमें लगे नेट मीटर के जरिए डिस्काॅम व उपभाेक्ता के बीच बिजली का आदान -प्रदान भी हाेता है। साेलर पैनल से उत्पन्न बिजली का उपभाेग करने के बाद ही डिस्काॅम की बिजली चालू हाेती है। जितना उपयाेग डिस्काॅम से ली जाने वाली बिजली से खपत हाेती है।

उसके यूनिट के आधार पर ही बिल बनता है। उदाहरण के ताैर पर एक उपभाेक्ता अगर प्रतिमाह 1000 यूनिट बिजली खर्च करता और साेलर पैनल से 600 यूनिट काम में लेता है ताे शेष 400 यूनिट का ही खर्च उपभाेक्ताओं काे चुकाना हाेगा। साेलर प्लांट लगाने से बिजली बचत हाेने के साथ ही लाेगाें काे पूरा फायदा भी मिल रहा है।

पहले 3 किलाेवाॅट पर 40% और 4 से 10 किलाेवाॅट पर 20% की मिलती थी सब्सिडी
काेराेना काल के चलते सरकार ने साेलर पैनल पर सब्सिडी हटा दी है। वर्तमान में 40 हजार रुपए प्रति किलाेवाॅट पर खर्च हाेते है। पहले 45000 रुपए किलाेवाॅट पर केवी के अनुसार सब्सिडी मिलती थी। साेलर पैनल लगाने का काम अलग-अलग कंपनियां करती है।

साेलर पैनल लगाने के लिए आरआरईसीएल (राजस्थान रिन्युवल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड) से अप्रूव करवाना हाेता है। साेलर पैनल लगने के बाद नेट मीटर की सहायता से साेलर से उत्पन्न बिजली व डिस्काॅम से आ रही बिजली का आंकड़ा एकत्रित हाेता है। साेलर से उत्पन्न बिजली का उपयाेग हाेने के बाद डिस्काॅम की बिजली खर्च हाेती है। इसी बिजली का बिल भी बनता है।

110 किलाेवाॅट का साेलर पैनल लगाया है
साेलर प्लांट लगाने से पहले प्रतिमाह का करीब 2.5 लाख रुपए का बिल आता था। एक माह पहले ही 110 किलाेवाॅट का साेलर प्लांट लगाया है। निश्चित रूप से इससे 30 से 40% बिजली के बिल का फायदा मिलेगा। इसे लगाने में करीब 30 से 35 लाख रुपए खर्च हुए है। अब आगामी बिल में इसका फायदा मिलना शुरू हाेगा।
-राणमल भंसाली, ग्रेनाइट फैक्ट्री मालिक, औद्याेगिक क्षेत्र चतुर्थ पाली

शहर में अब तक 170 जगहाें पर साेलर पैनल लगे
शहर में अब तक 170 घरेलू उपभाेक्ता व फैक्ट्रियों में साेलर पैनल लगे हैं। लाेग अब धीरे-धीरे साेलर पैनल लगा रहे हैं। कार्यालय में प्रतिदिन 30 से 40 फाइलें साेलर पैनल लगाने की आती है। यह काम कंपनी द्वारा किया जाता है, लेकिन इसमें नेट मीटर लगाने के बाद ही डिस्काॅम व उपभाेक्ता के बीच बिजली आदान प्रदान हाेती है। इसकी अलग से रीडिंग भी ली जाती है।
- मनीष माथुर, एक्सईएन डिस्काॅम पाली

इंडस्ट्रीज काे 7 रुपए प्रति यूनिट और घरेलू उपभाेक्ताओं काे औसत 6 रुपए प्रति यूनिट की दर हाेती है बिजली खपत
डिस्काॅम के अधिकारियों ने बताया कि उद्याेग में करीब 7 रुपए प्रति यूनिट का खर्च हाेता है। वहीं घरेलू उपभाेक्ताओं का औसत खर्च 6 रुपए है। अब अगर घरेलू उपभाेक्ता प्रतिमा 400 यूनिट बिजली खपत करता है और 200 यूनिट साेलर से मिलती है ताे उपभाेक्ता के 200 यूनिट का खर्च सिर्फ 1200 रुपए ही आएगा, जबकि साेलर पैनल नहीं लगा हाेने से 400 यूनिट का खर्च करीब 2400 रुपए आएगा। ऐसे ही फैक्ट्रियों में संचालकों काे साेलर पैनल का पूरा फायदा मिल रहा है।

साेलर एनर्जी फायदेमंद है
वर्तमान में प्रति किलाेवाॅट पर 4 से 4.5 यूनिट बिजली प्रतिदिन बनती है। वहीं गर्मियों में 5 से 5.5 यूनिट प्रतिदिन उत्पन्न हाेती है। इसका फायदा डिस्काॅम व उपभाेक्ता दाेनाें काे मिलता है। साेलर पैनल लगाने के लिए आरआरईसीएल से अनुमति लेना आवश्यक है।
- घनश्याम चाैहान, एसई डिस्काॅम

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