देवली कलां गांव का मामला:अतिक्रमण हटाने पीएलपीसी भेजा, तीन साल में जांच ही शुरू नहीं की

पाली4 महीने पहले
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अफसरों की लापरवाही से हाईकोर्ट भी हैरान, अब तीन महीने में जांच पूरी करने पाली कलेक्टर को आदेश पाली जिले के एक गांव में अतिक्रमण की शिकायत को लेकर पहुंचे एक याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट ने सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ (पीएलपीसी) के समक्ष रखने को कहा। उसने रखा भी, लेकिन तीन साल तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं होने की बात पता चली तो हाईकोर्ट भी चौंक गया। अफसरों की ऐसी निष्क्रियता पर पीड़ा व चिंता जताई। एक्टिंग चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव व मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ ने नाराजगी जताई है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी जांच तीन महीने में पूरी हो जानी चाहिए। न्यायालय द्वारा पारित निर्देशों के बावजूद जांच शुरू नहीं करने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की जरूरत है।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता दुर्गाराम की ओर से अधिवक्ता रिपुदमन सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने देवली कलां गांव में खसरा संख्या 924, 924/1 और 924/2 में आगोर भूमि पर अतिक्रमण नहीं हटाने को लेकर जनहित याचिका दायर की है। पूर्व में भी ऐसी याचिका लगाई थी, जिसमें संबंधित से संपर्क के निर्देश देते हुए 23 जुलाई 19 को याचिका निस्तारित कर दी थी।

हाईकोर्ट ने अफसरों की निष्क्रियता पर चिंता जताई, कहा-अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए

कोर्ट ने कहा- इसलिए आदेश जारी किया, सीधे न्यायालय नहीं आए कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि पीएलपीसी में प्राप्त शिकायतों या प्रतिवेदनों का निर्णय स्पीकिंग आदेश जारी किया जाना चाहिए, जिसमें शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई के बारे में सूचित किया जाना चाहिए। जनहित याचिका के माध्यम से लोग सीधे इस न्यायालय में नहीं आएं, इसलिए ऐसा निर्देश जारी किया गया था।

चेताया: अब लापरवाही न हो कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कलेक्टर पाली को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता द्वारा की गई शिकायतों की जांच 3 माह में पूरी की जाए। अगर पालना नहीं की तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कोर्ट ने सरकार को ऐसे प्रकोष्ठ या प्राधिकरणों जो कोर्ट के आदेश की पालना करने के लिए बाध्य हो उन पर उचित निगरानी रखने के निर्देश दिए। जहां यह पाया जाता है कि अधिकारी दायित्व से पूरी तरह से बेखबर हैं, वहां अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जानी चाहिए।

अफसरों की निष्क्रियता पर भी चिंता कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से निष्क्रियता पर पीड़ा व चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, कि 23 जुलाई 2019 को इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बाद प्रतिवेदन पेश करने पर भी कोई जांच शुरू नहीं की गई। कोर्ट ने कहा, कि इस न्यायालय द्वारा पारित निर्देशों के बावजूद जांच शुरू नहीं की गई तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की आवश्यकता है।

निर्देशों की पालना नहीं कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद अधिकारियों द्वारा पालना नहीं की जा रही है। पीएलपीसी द्वारा कार्यवाही नहीं किए जाने पर जनहित याचिका दायर करनी पड़ रही है। कोर्ट ने जगदीश प्रसाद मीणा के मामले में पूर्व में जारी निर्देशों को दोहराते हुए कहा कि पीएलपीसी में एक बार शिकायत या प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद इसे स्पीकिंग आदेश से निर्णीत किया जाना जरूरी है।

इसे लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।निर्देशों की पालना नहीं कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद अधिकारियों द्वारा पालना नहीं की जा रही है। पीएलपीसी द्वारा कार्यवाही नहीं किए जाने पर जनहित याचिका दायर करनी पड़ रही है। कोर्ट ने जगदीश प्रसाद मीणा के मामले में पूर्व में जारी निर्देशों को दोहराते हुए कहा कि पीएलपीसी में एक बार शिकायत या प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद इसे स्पीकिंग आदेश से निर्णीत किया जाना जरूरी है। इसे लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

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