जिंदा रहने के लिए चाहिए 12 लाख:लीवर की बीमारी से जुझ रहे, पत्नी लीवर देने को तैयार लेकिन ऑपरेशन के लिए रुपए नहीं, परिवार के लिए गुजारा करना भी हुआ मुश्किल

तखतगढ़ (पाली)2 महीने पहले
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अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती शैतानसिंह व उसके पास खड़े उसकी मां व पत्नी। - Dainik Bhaskar
अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती शैतानसिंह व उसके पास खड़े उसकी मां व पत्नी।

पाली जिले के पावा (तखतगढ़) निवासी 42 वर्षीय शैतानसिंह चारण अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें लीवर की बीमारी हैं। जिंदा रहने के लिए डॉक्टर्स ने लीवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम उपाय बताया। पत्नी रानीकंवर अपना लीवर डोनेट करने को तैयार हैं। लेकिन इतने बड़े ऑपरेशन में करीब 12 लाख खर्च होंगे। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के लिए जुटा लगभग असंभव सा है। ऐसे में परिवार किसी ऐसे फरिश्ते का इंतजार कर रहे हैं। ऑपरेशन करवाने में उनकी मदद कर सके।

पावा गांव निवावसी शैतानसिंह चारण मुम्बई में एक ज्वेलरी शोरूम में काम करते थे। इस दौरान उन्होंने मुम्बई में रानी नाम की युवती से विवाह कर लिया। दोनों की शादीशुदा लाइफ अच्छी चल रही थी। शादी के बाद उन्हें दो बच्चे भी हुए। परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन इनकी जिंदगी में 2019 ग्रहण बनकर आया। पीलिया होने पर परिजन शैतानसिंह को उपचार के लिए डॉक्टर के पास ले गए। जहां जांचे करवाई तो सामने आया कि उनके लीवर में समस्या है। ऐसे में उन्हें मुम्बई से गांव आना पड़ा। जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में इलाज लिया। लेकिन तबीयत में कुछ ज्यादा सुधार नहीं हुआ तो अहमदाबाद सिविल अस्पताल चले गए। वर्तमान में शैतानसिंह अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। जहां उनकी पत्नी रानी कंवर अपने एक माह के बेटे के साथ उनकी सेवा में जुटी हैं।

दो साल से बिस्तर पर शैतानसिंह, घर खर्च चलाना भी हुआ मुश्किल
पिछले करीब दो साल से शैतानसिंह बीमार चल रहे हैं। परिवार उसकी सेवा में जुटा हैं। उसकी पत्नी रानीकंवर एक निजी स्कूल में काम करती थी। लेकिन बीमार पति की सेवा के लिए नौकरी छोड़ उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर घूम रही हैं। पिछले करीब 20 दिनों से शैतानसिंह अहमदाबाद में भर्ती हैं। परिवार में कोई कमाने वाला नहीं हैं। ऐसे में घर खर्च और इलाज के लिए रुपए जुटाने में आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं।

वृद्ध मां बोली मेरी उम्र बेटे को लग जाए
बेटे की ऐसी हालत देख वृद्ध मां कलावतीदेवी का रो-रो कर बुरा हाल हैं। वह बस एक ही बात कहती हैं कि मेरी उम्र भी मेरे बेटे को लग जाए। जिससे यह ठीक हो जाए। इसको कुछ हो गया तो मेरे छोटे-छोटे पोतों का किया होगा। पत्नी रानीकंवर हिम्मत बांधे हुए हैं तथा पति ठीक हो जाए इसलिए खुद का लीवर देने को भी तैयार हैं लेकिन ऑपरेशन के लिए 12 लाख की रकम जुटाना इस परिवार के लिए काफी मुशिकल हैं।

एसडीएम ने दिया मदद का आश्वासन

मामले में सुमेरपुर एसडीएम ऋषभ मंडल का कहना हैं कि चिरंजीवी योना में नाम हैं तो मरीज को फायदा मिल सकता हैं। इसको लेकर दानदाताओं से भी बात करेंगे।

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