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तीन कहानी: चार कंधे भी नसीब नहीं:पिता की मौत हुई तो कंधा नहीं दे पाए मुंबई में फंसे दो बेटे; बीमार पत्नी की देखभाल के लिए जमानत मांगी, सुनवाई से पहले ही मौत हो गई

पाली7 महीने पहले
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शांतिलाल के शव के पोस्टमाॅर्टम के दौरान बाली स्थित मर्च्युरी के बाहर मौजूद पुलिस और समाज के लोग। - Dainik Bhaskar
शांतिलाल के शव के पोस्टमाॅर्टम के दौरान बाली स्थित मर्च्युरी के बाहर मौजूद पुलिस और समाज के लोग।
  • लॉकडाउन में राहत मिलने के बाद भी बेबसी की झंकझोरने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं
  • दो दिन तक सड़ता रहा अकेले रहने वाले 70 वर्षीय शांतिलाल जैन का शव, कोई देखने वाला नहीं था

देशभर में कोरोना के केस बढ़ते जा रहे हैं, फिर भी लोगों की परेशानियों को देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन में काफी राहत दे दी है। इसके बाद भी बेबसी की झंकझोरने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसी ही तीन घटनाएं राजस्थान और हिमाचल में सामने आईं, इसमें एक पिता अपने मृत बेटे की लाश तक नहीं देख पाया तो वहीं दो बेटे होने के बाद भी पिता के शव को चार कंधे तक नसीब नहीं हुए।

पाली शहर के वावड़ी पाटी बास में रहने वाले 70 साल के शांतिलाल जैन मकान में अकेले ही रहते थे। करोबार के कारण उनके दो बेटे महेश और नीलेश जैन मां के साथ मुंबई में हैं। 13 जून को शांतिलाल के मकान से पड़ोसियों को तेज बदबू आई, जिसके बाद उन्होंने शांतिलाल के रिश्तेदारों को फोन कर बुलाया।

साले ने किया शांतिलाल का अंतिम संस्कार

सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने मकान का दरवाजा तोड़ा तो शांतिलाल मृत मिले। शव से बदबू आने के कारण अंदाज लगाया जा रहा है कि उनकी मौत दो दिन पहले यानी 11 जून को ही हो चुकी थी। पुलिस ने शांतिलाल के दोनों बेटों को फोन कर घटना की जानकारी दी, लेकिन बेटों ने मां की तबियत खराब होने की बात कहकर आने में असमर्थता जाहिर की। दोनों बेटों ने से लिखित चिट्ठी मिलने के बाद पुलिस ने उनके मामा सुकनलाल जैन को अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी दे दी।

दूसरा मामला: जयपुर में पहचान न होने से 9 दिन तक रुका रहा अंतिम संस्कार

अरुणाचल प्रदेश का 20 वर्षीय साजन कुमार जयपुर में काम करता था। 6 जून को कोरोना पॉजिटिव आया और 7 जून को उसकी मौत हो गई। 6 दिन बाद उसके मोबाइल फोन से मां का नंबर मिला। पहचान होने के बाद साजन के पिता ने वीडियो भेजकर कहा कि हम बहुत गरीब हैं। बहुत दूर हैं। कर्फ्यू आ नहीं सकते। साजन का अंतिम संस्कार कर दीजिए। आखिर मौत के 9 दिन बाद 15 जून को साजन का अंतिम संस्कार किया जा सका।

साजन के पिता ने वीडियो भेजकर पुलिस से कहा कि हम गरीब हैं आ नहीं सकते, अंतिम संस्कार कर दीजिए।
साजन के पिता ने वीडियो भेजकर पुलिस से कहा कि हम गरीब हैं आ नहीं सकते, अंतिम संस्कार कर दीजिए।

तीसरा मामला: बीमार पत्नी की देखभाल के लिए मांगी जमानत, सुनवाई से पहले ही पत्नी की मौत 

हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में सोमवार को अजीब माहौल हो गया, जब यह पता चला कि जिस बंदी ने अपनी बीमारी पत्नी की देखभाल के लिए जमानत मांगी थी, उसकी रविवार देर रात मौत हो गई। हाईकोर्ट की वेकेशन जज प्रभा शर्मा ने पत्नी के अंतिम संस्कार और अन्य क्रियाकर्म के लिए एक महीने की अंतरिम जमानत मंजूर की है। कैदी गुलाबचंद ने यह कहते हुए जमानत की अपील की थी कि पत्नी बीमार की तबीयत ज्यादा खराब है। 

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