रामायण पाठ:इच्छाधारी बालाजी आश्रम में 8 वर्षों से 24 घंटे गूंज रहीं रामायण की चौपाइयां

पालीएक महीने पहले
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कस्बे के निकटवर्ती ग्राम मोहरा कला में स्थित इच्छाधारी बालाजी आश्रम पर पिछले 8 वर्षों से रामायण पाठ की चौपाइयां गूंज रही हैं। महंत सुरेंद्र दास महाराज द्वारा मोहरा कला के आसपास घूम रहे बेसहारा गोवंश को भी अपने पास आश्रम में गौशाला खोलकर उन्हें रख कर उनकी सेवा करके उनकी रोजाना पूजा की जाती है। मोहरा कला के इच्छाधारी बालाजी आश्रम के महंत सुरेंद्र दास महाराज बताते हैं कि वो पैदल यात्रा करके वर्ष 2007 में मोहरा कला ग्राम पहुंचे थे मोहरा कला ग्राम में स्थित जर्जर एक प्याऊ के पास टूटे पड़े चबूतरे पर पत्थर रखकर उसे ही सिंदूर लगाकर बालाजी की प्रतिमा मानकर पूजा शुरु कर दी। महंत द्वारा गरीब बीमार लोगों का निशुल्क उपचार शुरू कर दिया। जहां आज हजारों की संख्या में भक्त आश्रम पर पहुंचते हैं। महंत को गरीब लोगो का निशुल्क उपचार करते देख वहां आसपास के दानदाता आगे आये तथा प्याऊ के पास रहने वाले एक किसान ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा महंत को आश्रम निर्माण के लिए दान कर दी। दानदाताओं ने आगे आकर सहयोग किया तो 2008 में आश्रम का निर्माण शुरू किया गया। विधि विधान से बालाजी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई अगले साल से मंदिर का निर्माण किया गया। 2012 में मान सुरेंद्र दास महाराज द्वारा बालाजी के दरबार में अखंड रामायण पाठ शुरू किया जो आज भी निरंतर जारी है आश्रम में 2 दर्जन से अधिक संत महात्मा रहते हैं जो बारी-बारी चार-चार घंटे पाठ कर अखंड पाठ को नियमित जारी रखते हैं। अब घायल पशुओं के लिए खोलेंगे चिकित्सालय : मोहरा कला एवं आसपास के गांव फोरलेन पर विचरण करने वाले बेसहारा गोवंश वाहनों की चपेट में आकर काल के ग्रास बन रहे गोवंश को पकड़ कर अपने ही आश्रम में लाकर उन्हें पालना शुरू कर दिया। आश्रम में डेढ़ सौ से अधिक गोवंश हैं। महंत अब आश्रम में ही पशु चिकित्सालय भवन तैयार करवाया जा रहा है।

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