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फर्जीवाड़ा:विधायक खुशवीर के खिलाफ दर्ज मुकदमों की पत्रावली सीआईडी-सीबी को भेजी

पाली5 महीने पहले
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  • मारवाड़ जंक्शन विधायक के खिलाफ फर्जीवाड़े के दोनों मुकदमे भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 474 तथा 120 बी में किए दर्ज

प्रदेश में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने की साजिश में शामिल होने के आरोपों का सामना करने वाले मारवाड़ जंक्शन विधायक खुशवीरसिंह जोजावर के सामने अब जमीनों में फर्जीवाड़ा करने के दो मुकदमों ने उनके लिए नई परेशानी पैदा कर दी है।

इन दोनों मामलों की जांच के लिए पत्रावली सोमवार को एसपी के जरिए सीआईडी-सीबी काे भेज दी गई है। वहां पर डीजीपी के आदेश पर जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में होगी। एसपी राहुल कोटोकी का कहना है कि किसी भी विधायक के खिलाफ दर्ज होने वाले मामले की जांच सीआईडी-सीबी ही करती है। इसलिए मारवाड़ जंक्शन थाने में दर्ज दोनों मामलों की पत्रावली यहां से भेज दी गई है।

जानकारी के अनुसार विधायक खुशवीरसिंह के खिलाफ दर्ज किए गए दोनों मामले जमीन हड़पने से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मवेशियों के चरने के लिए काम आने वाली जमीन का नियमानुसार कोई मालिकाना हक नहीं ले सकता है, मगर जोजावर ने बेंगलुरू में रहने वाले एक व्यक्ति का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए पहले अपनी माता कृष्ण कंवर के नाम पर करवाई। बाद में इसे राजस्व शिविर आउवा में 8 दिसबंर 2004 को निस्तारित बताकर राजस्व रिकाॅर्ड में यह भूमि अपनी माता के नाम दर्ज करवा दी।

अब उक्त भूमि को अपने पुत्र भ्रगराजसिंह के नाम दर्ज करवा दी है। इसी प्रकार दूसरा मामला भी सरकारी नाले की जमीन हड़पने का है। इसमें आरोप है कि इस जमीन को विधायक ने अपने दबाव से परिचित तथा जोजावर ग्राम पंचायत के पूर्व उप सरपंच राकेश जैन के नाम पर करवा दी।
अगर मामला झूठा पाया गया तो परिवादी के खिलाफ कार्रवाई संभव

जानकारों का कहना है कि अगर यह मामला जांच के दौरान झूठा या तथ्यों से परे पाया जाता है तो परिवादी के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 मतलब झूठा मुकदमा दर्ज कराकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना तथा भादंसं की धारा 501 यानी, मानहानि करने की धारा के तहत कार्रवाई हो सकती है।

विधायक खुशवीरसिंह जोजावर के खिलाफ दोनों ही मुकदमे गैर जमानती, 7 साल से अधिक की सजा का प्रावधान
विधायक के खिलाफ दर्ज किए गए दोनों मुकदमे भादंसं की धारा 420, 467, 468, 471, 474 तथा 120 बी में दर्ज किए गए हैं। इसमें धोखाधड़ी करने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने अाैर उनका इस्तेमाल करने, तथ्यों को जानबूझकर व षड्यंत्रपूर्वक इन दस्तावेजों को सरकार काे पेश करने का आरोप है। यह गैर जमानती अपराध है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है तो इसमें 7 साल से अधिक की सजा का प्रावधान है।

पहला मामला

ओरण की जमीन हड़पने का यह मामला 16 साल पुराना है। जमीन को वर्ष 2004 में आउवा में आयोजित राजस्व शिविर में राजस्व रिकाॅर्ड में दर्ज कराई। अब दर्ज कराया गया है मामला।

दूसरा मामला

यह मामला भी 9 साल पुराना है। इसमें नाले की जमीन को अपने परिचित व जोजावर के पूर्व उपसरपंच राकेश जैन के नाम पर वर्ष-2011 में पट्टा बनाया, यह मामला भी अब दर्ज हुअा है।

इसलिए... सीआईडी- सीबी ही करेगी मामले की जांच

अगर किसी भी विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होता है तो उसकी जांच सीआईडी-सीबी ही करती है। यह राज्य सरकार का स्थाई आदेश है। किसी भी थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद संबंधित जिले के एसपी दर्ज मामले की पत्रावली डीजी को भेजते हैं। इसके बाद डीजी मामले की जांच सीआईडी-सीबी के किसी वरिष्ठ अधिकारी को देते हैं। इसलिए यह दोनों मामले सीआईडी-सीबी काे साैंप दिए गए हैं।

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