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मारवाड़ में द्वारिकाधीश:द्वारिका से कृष्ण के झीतड़ा आने की मान्यता, ग्रामीणों ने शोभायात्रा से की अगवानी

राेहटएक महीने पहले
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रोहट के निकटवर्ती झीतड़ा में भगवान जानराय जी की शोभायात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। - Dainik Bhaskar
रोहट के निकटवर्ती झीतड़ा में भगवान जानराय जी की शोभायात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

धुलंडी के दिन भगवान द्वारकाधीश के निकटवर्ती झीतड़ा गांव में पधारने की मान्यता है। इसी खुशी में धुलंडी व उसके दूसरे दिन भगवान के झीतड़ा पधारने की खुशी में मेले का आयाेजन किया गया, जिसमें सम्मिलित हाेने के लिए राज्य भर से लाेग यहां पहुंचे और भगवान के दर्शन किए।

भगवान जानराय की शोभायात्रा भी उनके जैकाराें के बीच निकाली गई। मंदिर के महंत ने बताया कि झीतड़ा में स्थित जानराय मंदिर में भगवान के धुलंडी के दिन द्वारकाधीश के आने की खुशी में मेला भरता है। इसी कारण द्वारिका में मंदिर के पट एक दिन के लिए बंद रहते है।

झीतड़ा में भगवान के स्वागत के लिए जानराय मंदिर से तालाब तक रेवाड़ी निकाली जाती है। काेराेना काे देखते हुए बार आयोजकों द्वारा विशेष इंतजाम किए गए थे इसी कारण से ही अधिक भीड़ के बावजूद उनकाे साेशल डिस्टेंसिंग रखते हुए भगवान के दर्शन कराए गए। महिलाओं व बच्चों की बड़ी संख्या में भीड़ रही। लाेगाें ने झूलाें का लुत्फ भी उठाया।

मान्यता : कूबाजी की तपस्या से प्रसन्न हो गए थे प्रभु श्री द्वारिकाधीश
मान्यता है कि भगवान के दर्शन के लिए कूबाजी महाराज लेटते-लेटते द्वारिका की ओर जाने लगे। दाे माह बाद वे कुछ ही मिल की दूरी तय कर पाए ताे उनका शरीर खून से लथपथ हाे गया। इस पर भगवान का मन पिघल गया और उन्हाेंने झीतड़ा चलने की बात स्वीकार कर ली।

धुलंडी के दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका छाेड़कर झीतड़ा आए थे। ये ही कारण है कि धुलंडी काे द्वारिका में मंदिर के पट बंद रहते है। आज भी काेई द्वारिका में धुलंडी के दिन दर्शन क जाता है ताे उसे यही कहा जाता है कि भगवान झीतड़ा पधारे है। झीतड़ा में भगवान के स्वागत के लिए जानराय मंदिर से तालाब तक रेवाड़ी निकाली जाती है। ऐसी मान्यता है कि जब तालाब का पानी सवा फीट चढ़ता है ताे तब भगवान के आने के संकेत मिलते हैं।

धूलंडी के अवसर सोमवार को भगवान द्वारिकाधीश के एक दिन झीतड़ा आने की मान्यतानुसार कुबाजी सरोवर में प्रातः से दिनभर आस पास व दूर दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। सुबह महंत वासुदेवाचार्य महाराज के सानिध्य में पालकी में कृष्ण भगवान व राधाराणी की प्रतिमा को जानराय मंदिर से शोभायात्रा के साथ भक्त कुबाजी महाराज के तालाब किनारे स्थित आराधना स्थल व समाधि स्थल परिसर में विराजमान किया गया। दिनभर श्रद्घालुओंं ने कुबाजी सरोवर में स्नान के साथ भगवान के दर्शन कर कुशल मंगल की कामना की। शाम काे पालकी में बिठाकर वापस मंदिर लाए।

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