कुएं से निकाला नरेन्द्र का पूरा शव:अपने कालजे के टुकड़े का शव टुकड़ों में बंटा देख मां की आंखों से छलके आंसू, बोली ऐसा क्या गुनाह किया था मेरे बेटे ने जो इतनी कम उम्र में ऐसी दर्दनाक मौत मिली

सोजत रोड (पाली)6 महीने पहले
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बोरनडी में कुएं से नरेन्द्र का शव के टुकड़े ट्रोले के जरिए बाहर निकालते हुए। - Dainik Bhaskar
बोरनडी में कुएं से नरेन्द्र का शव के टुकड़े ट्रोले के जरिए बाहर निकालते हुए।

सोजत रोड थाना क्षेत्र के बोरनड़ी में 180 फुट गहरे कुएं में डूबे 16 वर्षीय नरेन्द्र का शव के सभी अवशेष एकत्रित कर शाम करीब छह बजे निकाल लिए। ग्रामीणों व मृतक के रिश्तेदारों ने आर्थिक रूप से कमजोर मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की। दिन में करीब तीन घंटे तक समझाइश का दौर चला लेकिन बात नहीं शाम छह बजे तक पूरा शव निकाला जा सका। जिसके पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। ज्ञात रहे कि सोमवार शाम करीब छह बजे नरेन्द्र के शव का कुछ हिस्सा नजर आ गया था। शेष बॉडी पत्थरों के बीच फंसी थी। जिसे निकालने में मंगलवार शाम छह बजे तक का समय लग गया। बॉडी पूरी तरह गल चुकी थी। बेटे के शव की ऐसी हालत देख मां का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। जिसे परिजनों ने संभाला।

मुआवजे को लेकर चर्चा करते ग्रामीण व मृतक नरेन्द्र के समाज के लोग।
मुआवजे को लेकर चर्चा करते ग्रामीण व मृतक नरेन्द्र के समाज के लोग।

बेटा का शव टुकड़ों में बंटा देखी मां की हालत बिगड़ी, परिजनों ने संभाल
शाम करीब छह बजे जब कुए से नरेन्द्र का सिर व हाथ लेकर मजदूर बाहर निकले तो नरेंद्र की शक्ल भी पहचान में नहीं आ रही थी। अपने कालजे के टुकड़े का शव टुकड़ों में बंटा देख मां की आंखों से आंसू छलक गए। बोली ऐसा किया गुनाह किया था मेरे बेटे ने जो इतनी कम उम्र में ऐसी दर्दनाक मौत मिली। उनकी बिगड़त हालत देख परिजनों व ग्रामीणों ने संभाला।

बता दें कि सोमवार रात 3 बजे रेस्क्यू रोकना पड़ा था। नरेंद्र का शव पत्थरों के बीच फंसा हुआ है। बदबू इतनी आ रही है कि श्रमिक मुंह पर रूमाल बांधने के बाद भी बड़ी मुश्किल से आधे घंटे तक कुएं में रह पा रहे थे। उन्हें सांस लेने के लिए हर आधे घंटे बाद बाहर आना पड़ रहा था। इधर कुएं में पानी की आवक भी रेस्क्यू को गति देने में बाधक बन रही थी। आखिरकार मेजर मनीष व सीओ सोजत हेमंत जाखड़ ने श्रमिकों की सुरक्षा को देखते हुए रात 3 बजे रेस्क्यू रुकवाया गया। मंगलवार को नरेन्द्र का शव कुएं से बाहर निकाला जा रहा है। शव निकालने के बाद मौके पर ही उसका पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंपा जाएगा। रेस्क्यू स्थल पर फिलहाल किसी बाहरी आदमी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

नरेन्द्र का शव देखने के बाद बिलखते परिजनों को सांत्वना देकर ले जाते हुए रिश्तेदार।
नरेन्द्र का शव देखने के बाद बिलखते परिजनों को सांत्वना देकर ले जाते हुए रिश्तेदार।

बदबू से श्रमिक की हालत बिगड़ी
रेस्क्यू के दौरान कुएं में शव की बदबू ज्यादा होने से श्रमिक सुरेश नायक की तबीयत बिगड़ गई। उसे उल्टी व चक्कर आने की शिकायत होने लगी। जिस पर तुरंत उसे बाहर निकाला तथा प्राथमिक उपचार किया तब जाकर उसकी हालत में सुधार हुआ।

शिनाख्त की लेकिन नहीं उठाया शव
मृतक परिवार को मुआवजे को लेकर बात नहीं बनने के कारण मृतक के परिजनों ने पुलिस के कहने पर शाम को शव की शिनाख्त की लेकिन बॉडी नहीं उठाई। बोले समाज के लोगों से चर्चा करने के बाद शव उठाएंगे।

पूरी तरह गल चुकी है बॉडी इसलिए लगा समय
सीओ सोजत हेमंत जाखड़ ने बताया कि बॉडी की पानी व मलबे में 21 दिन तक रहने से ऐसी हो गई हैं कि उसे खींच कर बाहर भी नहीं निकाल सकते। बॉडी पूरी तरह गल चुकी हैं। शव अंदर बिखर गया था। इसलिए पूरी बॉडी को बाहर निकालने में समय लग गया।

श्रमिकों को रेस्क्यू के लिए राजी करने में पूर्व सरपंच की रही महत्वपूर्ण भूमिका बड़ा गुड़ा एवं सवराड गांव से श्रमिकों को बुलाना था 180 फिट गहरे कुएं में रेस्क्यू के लिए राजी करने में पूर्व सरपंच कैलाश मालवीय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे 27 जून से रेस्क्यू से जुड़े हैं। तब से अभी तक टीम के साथ जुटे हुए हैं। मोटर खराब होने पर उसे दुरुस्त करवाने के लिए लाना ले जाने से लेकर श्रमिकों के डिमांड होते ही उनके लिए तुरंत चाय लाने तक पूर्व सरपंच दौड़ते नजर आए। श्रमिक इनकी मौजूदगी में ही श्रमिकों को रेस्क्यू शुरू करते हैं।

22 जून को कुएं में गिरा था नरेन्द्र

22 जून को बोरनड़ी गांव में चार श्रमिक कुएं की मरम्मत का काम कर रहे थे। दो श्रमिक कुएं के बाहर खड़े थे और नरेन्द्र और जीवन कुएं के अंदर करीब 20 फीट पर मरम्मत कार्य कर रहे थे। इस दौरान अचानक कुएं की मिट्टी उन पर गिर गई। जिससे संतुलन बिगड़ने से नरेन्द्र नायक 180 फीट गहरे कुएं में गिर गया और मिट्टी उसके ऊपर गिर गई। जिससे कारण वो बाहर नहीं निकल सका। जीवन के हाथ में पाइप आ गया। जिससे वह बच गया। नरेन्द्र को ढूंढने के लिए 22 जून से ही रेस्क्यू शुरू कर दिया गया था।

लॉकडाउन में स्कूल बंद थे इसलिए 500 रुपए के लिए मजदूरी पर गया

नरेंद्र की मां इंद्रा देवी मनरेगा में मजदूरी करती है। जबकि उसके पिता पप्पूराम की 14 साल पहले किसी बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। नरेंद्र भी 10वीं में पढ़ता था। कोरोना व लॉकडाउन की वजह से अभी स्कूल बंद थे। ऐसे में वह अपने दोस्त के साथ 500 रुपए की मजदूरी के लिए काम पर चला गया था।

8 बहनों का इकलौता भाई था नरेन्द्र नरेन्द्र के पिता के तीन भाई थे। नरेन्द्र की सगी बहनों सहित काका-ताऊ की कुल 8 बहनें हैं। इन आठ बहनों का नरेन्द्र अकेला भाई था। नरेन्द्र के शव मिलने की खबर से उनका भी रो-रो कर बुरा हाल हो गया।

फैक्ट फाइल

  • 22 जून – सुबह करीब 11 बजे कुएं बोरनड़ी में कच्चे कुएं की मिट्टी ढहने से नरेन्द्र नायक कुएं में गिरा।
  • 22 जून – शाम चार बजे रेस्क्यू शुरू हुआ।
  • 23 जून – सांसद पीपी चौधरी मौके पर पहुंचे, जिला कलक्टर अंश दीप व एसपी कालूराम रावत से रेस्क्यू की जानकारी ली।
  • 24 जून जोधपुर से भारतीय सेना के 63 इंजीनियरिंग कोर के कर्नल प्रदीप के नेतृत्व में टीम जोधपुर से आई।
  • 25 जून को दोपहर बाद एयरफोर्स के मेजर मनीष के नेतृत्व में आपदा में काम आने वाली मशीनरी के साथ एक्सपर्ट टीम पहुंची तथा कर्नल प्रदीप की टीम वापस जोधपुर गई।
  • 25 जून कुएं के आस-पास करीब 150 फीट रैंप बनाने का काम शुरू किया।
  • 26 जून – कुएं से मलबा निकालने का काम शुरू किया।
  • 29 जून – कुएं में गिरे भारी पत्थरों के कारण रेस्क्यू की गति कुछ कम हुई। उसके बाद से लगतार मलबा व पत्थर निकाल रहे हैं।
  • 12 जुलाई – शाम को नरेन्द्र का शव दिखा।
  • 13 जुलाई- दोपहर 12 बजे आधा शव निकाला।
  • 13 जुलाई- शाम 6 बजे तक पूरा शव निकाला गया।