• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Pali
  • There Are No Domes On The Biosa Mata Temple, They Break As Soon As They Are Built, Only The Dome Made In Jivana Is Still Safe

नवरात्रा विशेष:बायोसा माता मंदिर पर गुंबद नहीं होते, बनाते ही टूट जाते हैं, सिर्फ जीवाणा में बना गुंबद अब तक सुरक्षित

जीवाणा/मेंगलवा2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
माताजी की प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
माताजी की प्रतिमा।
  • जालोर-बाड़मेर की सीमा पर स्थित इस मंदिर की मूर्तियां 1881 में स्थापित की थीं

बाड़मेर की सीमा पर स्थित जीवाणा में बायोसा माता का मंदिर अपनी एक अलग पहचान रखता है। प्रदेशभर में बायोसा माताजी के मंदिर पर गुंबद का निर्माण नहीं होता है, जबकि जीवाणा में स्थित इस मंदिर पर गुंबद का निर्माण किया गया है। मंदिर के पुजारी व भक्तों के अनुसार ऐसा मंदिर प्रदेशभर में कहीं पर नहीं हैं।

मान्यता के अनुसार शक्ति अवतार बायोसा माताजी के मंदिर पर गुंबद का निर्माण नहीं किया जाता है। अगर किसी भक्त द्वारा करवा भी दिया जाता है तो स्वयं टूट जाता है, लेकिन जीवाणा बायोसा माता मंदिर गुंबद निर्मित है। जानकारी के अनुसार जीवाणा में 1881 के दौरान बायोसा मंदिर की रामदेवरा से प्रतिमा लाकर स्थापित करते हुए एक छोटा सा मंदिर का निर्माण किया गया था। रामानंद सरस्वती महाराज की प्रेरणा से गुंबद युक्त मंदिर का 7 मार्च 1999 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी।

1999 में ब्रह्मलीन संत रामानंद सरस्वती की प्रेरणा से बना मौजूदा मंदिर
ग्रामीणों को ब्रह्मलीन साकेत आश्रम सुमेरपुर के सन्त रामानंद सरस्वती महाराज ने माताजी का गुम्बद वाला मन्दिर का निर्माण करने को कहा। ग्रामीणों ने संत के आदेश की पालना में उनकी मंशा के अनुरूप ही निर्माण करवाया। मंदिर का निर्माण के बाद साधु-संतों के सानिध्य में प्राण-प्रतिष्ठा की गई। जिसके हजारों श्रद्धालु साक्षी बने। हर वर्ष मेले सहित धार्मिक आयोजन होते है।

मेहताब कंवर ने रामदेवरा से प्रतिमा लाकर स्थापित की
ठाकुर देवीसिंह मेड़तिया की धर्मपत्नी मेहताब कंवर जो सिरोही जिले के तंवरी के ठाकुर सुजानसिंह की पुत्री थीं। मेहताब कंवर देवडीजी डेढ़ सौ साल पूर्व रामदेवरा दर्शन करने गए थे। देवडीजी माताजी की परम भक्त थी। रामदेवरा में बायोसा ने साक्षात रूप में दर्शन देकर जीवाणा साथ चलने की इच्छा जताई। मेहताब कंवर ने माताजी से कहा कि में आपकी सेवा कैसे करूंगी, कहां पर विराजमान करूंगी। तब माताजी ने कहा कि आपके रावले के पीछे जो एक खवास का बेरा है। उसमें जो खेजड़ी का वृक्ष है उसके नीचे मुझे विराजमान कर देना। माताजी को उनके बताए स्थान पर जीवाणा में बिराजमान कर पूजा करने लगे।

मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त करवाते हैं मेले का आयोजन
क्षेत्रभर सहित दूसरे जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भक्त मनोकामना पूर्ण होने पर मेले का आयोजन करवाते हैं। मेले की पूर्व संध्या पर भजन संध्या होती हैं। दूसरे दिन मेले व महाप्रसादी का आयोजन होता हैं। मेले पर मन्दिर को फूलमालाओं से सजाकर माताजी का भव्य श्रृंगार किया जाता हैं।

अपने आप में एक चमत्कार है
पजीवाणा में मंदिर निर्माण में रामानंद सरस्वती महाराज के कहने पर गुंबदयुक्त मंिदर बनवाया था। आज भी सुरक्षित है, जाे अपने आप में एक चमत्कार है।
-छैल सिंह मेड़ितया, भक्त

खबरें और भी हैं...