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भास्कर विशेष:जंगल में शिकार राेकने 9 प्वाइंट पर लगने थे थर्मल कैमरे, 4 जगह ही लगाए, उनका भी रुख बदल दिया

पालीएक महीने पहले
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वन विभाग के कार्यालय में सर्विलांस कैमरों से सिर्फ पहाड़ियां ही नजर आती हैं। - Dainik Bhaskar
वन विभाग के कार्यालय में सर्विलांस कैमरों से सिर्फ पहाड़ियां ही नजर आती हैं।

जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन इलाके में पैंथर फैमिली समेत अन्य वन्यजीवाें की गतिविधियाें पर नजर रखने तथा उनकी सुरक्षा निगरानी तंत्र काे पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार ने 9 स्थानाें पर थर्मल तकनीक के सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कराेड़ाें रुपए खर्च कर फाइबर ऑप्टिकल लाइन ताे प्रमुख पैंथर साइट्स पर बिछा दी, लेकिन पर्यटन माफिया की अवैध गतिविधियाें पर आंच नहीं आए, इसके लिए अधिकारियाें ने महज 4 कैमरे ही लगाए।

यह चाराें कैमरे भी ऐसे स्थानाें पर लगाए गए हैं, जहां पर ड्राेन उड़ाने, ड्रेगन लाइटें फेंककर वन्य जीवाें की आजादी में खलल डालने वाली गतिविधियां कैद ही नहीं हाे रही। इन कैमराें में बस पहाड़ व प्रकृति की तस्वीरें ही जवाई बांध परिसर में स्थापित सर्विलांस सिस्टम में लगी एलईडी की स्क्रीन पर दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार 27 जनवरी 2013 को राज्य सरकार ने जवाई बांध आसपास के गांवों के 98 वर्ग किमी क्षेत्र पैंथर कंजर्वेशन क्षेत्र घाेषित किया था। पैंथर फैमिली की सुरक्षा निगरानी पुख्ता करने के लिए आधुनिकतम तकनीक से लैस निगरानी तंत्र (सर्विलांस सिस्टम) लगाने का निर्णय लिया था। इसमें रिजर्व क्षेत्र के 20 क्रिटिकल प्वांइट को हाईटेक प्रोजेक्ट में शामिल कर 9 स्थानाें पर कैमरे लगाने की जिम्मेदारी राज्य के आईटी विभाग काे साैंपी गई थी।

सबसे सेंसेटिव सेणा-पैरवा में ही नहीं लगे कैमरे

पूरे रिजर्व क्षेत्र में निवास कर रहे विभिन्न जीव-जंतुओं की संख्या, प्रकृति, प्रवृत्ति और भोजन संबंधी गतिविधियों का विश्लेषण करने के लिए बलवना से पैरवा तक 10 किमी तथा बलवना से लेकर काेठार तक 15 किमी तक फाइबर ऑप्टिकल लाइन बिछाई गई। इसमें वेलार-1, वेलार-2, काेठार तथा बलवना चाैकी पर ताे कैमरे लगा दिए गए।

काेठार में जहां पर कैमरा लगाया गया है, वह पैंथर साइट्स वाली पहाड़ी काे कवर ही नहीं करता। सबसे अधिक सेंसेटिव माने जाने वाले सेणा व पैरवा के अलावा हिराेला तथा लुंदाड़ा में कैमरे ही नहीं लगाए गए। जबकि अवैध गतिविधियाें के प्रमुख केंद्र यहीं है।

इन गांवों में ज्यादा देखा जा सकता है पैंथर फैमिली को
वन्यजीव प्रेमियाें का कहना है कि पैरवा, लूंदाड़ा, सेणा, कोठार, मालनू, मालदर, चामुंडेरी मेड़तियान, लालपुरा, बेड़ा, जूना बेड़ा, दूदणी, छोटी दूदणी, वेलार में ही पर्यटन के नाम पर अवैध गतिविधियां ज्यादा हाेती है। ऐसे में पैंथर कंजरवेशन क्षेत्र में पर्यटन के नाम पर अवैध रूप से होने वाली गतिविधियों को रोकने तथा वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए सरकार ने इस प्रोजेक्ट ताे जमीं पर उतारा ताे है, मगर यह आधा-अधूरा ही है।

पैरवा में अवैध गतिविधियां रोकने वन विभाग ने चारदीवारी बनाई

माफिया ने ताला ताेड़ा

पैरवा गांव में सबसे पहले पैंथर चाचू खान दिखा था। इसके शावक बढ़ने के बाद ही पैंथर कंजर्वेशन क्षेत्र बनाने की नींव रखी। यहां पर वन विभाग ने पहाड़ी में विचरण करने वाले पैंथराें की आजादी काे बहाल रखने के लिए चारदीवारी निर्माण कराने के साथ गेट भी बनाया था, मगर माफिया से जुड़े लाेगाें ने इसका ताला ताेड़ दिया।

सभी प्वाइंट पर नहीं लग पाए हैं केमरे, वापस बजट नहीं आया
कैमरे ताे वहां पर लगे हुए हैं, मगर सभी प्वाइंट पर नहीं लग पाए हैं। इसकाे लेकर वापस बजट नहीं आया है। सरकार से पूरे इलाके काे सीसीटीवी से कवर करने के लिए कैमरे लगाने के लिए आग्रह किया जा रहा है।-अशंदीप, कलेक्टर, पाली

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