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पाली में बैलों को देखने आए 24 गांव के लोग:अनूठी परंपरा- शृंगारित बैलाें के सींग रुपए-नारियल बांध दाैड़ाया, पीछे पटाखे भी छाेड़े, 24 गांवों से दौड़ देखने काणूजा पहुंचे ग्रामीण

पालीएक महीने पहले
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सेंदड़ा.  कानुजा गांव में बैलों की दौड़ की अनूठी परंपरा में हिस्सा लेकर बैलों को रोकने का प्रयास करते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
सेंदड़ा. कानुजा गांव में बैलों की दौड़ की अनूठी परंपरा में हिस्सा लेकर बैलों को रोकने का प्रयास करते ग्रामीण।

रायपुर क्षेत्र के काणुजा गांव में सदियों से चली आ रही अनूठी परंपरा काे इस बार भी निभाया गया। गांव में बैलों के सींग पर नारियल और रुपए बांधकर दौड़ाया गया। ग्रामीणों में यह रुपए और नारियल लेने की हाेड़ देखी गई। 400 साल से भी अधिक सालाें से अायाेजित हाे रहे इस आयोजन के पीछे ग्रामीणों का दावा है कि सालभर खुशहाली रहती है। बारिश अच्छी होती है और इससे फसलों की पैदावार भी अच्छी होती है। शनिवार को आयोजित दौड़ देखने 24 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे।

इनके अलावा गांव की बहन बेटियां भी रामा-श्यामा करने और यह आयोजन देखने काणुजा आ गईं। मगरा क्षेत्र के काणुजा गांव में निभाई जा रही इस परंपरा के तहत शनिवार को बैलों को भड़काकर भीड़ की ओर से भगाया गया, इसके बाद इन बैलों को पकड़ने के लिए ग्रामीणों ने जोर आजमाइश की। काणुजा ग्राम पंचायत से यह खेल शुरू हुआ, जिसका समापन साधों का बाड़िया, पैलावास में हुआ।पटाखे छोड़े, शाेर मचाकर बैलों को मैदान में दौड़ाया काणूजा गांव के मुख्य चौराहे पर बेलाें के आसपास पटाखे छोड़े गए।

पटाखों की आवाज के साथ ही बैल इधर-उधर दौड़ने लगे और ग्रामीण भी इनके पीछे हो गए। बैल मालिकों ने अपने-अपने बैलों को आवाज देते हुए हांकना शुरू कर दिया। बैलों ने भीड़ से एक ओर निकलने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया अाैर शाेर मचाया। बाद में इनके सींगों में बंधे रुपए व नारियल लेने की कोशिश की गई।

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