योजना / जेडएलडी बनने तक ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन कार्यकारी एजेंसी करेगी, 10 केएलडी का पायलट प्रोजेक्ट खुद लगाएगी

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  • पर्यावरणीय विशेषज्ञ कंपनी को ट्रीटमेंट प्लांट का ओएंडएम(ऑपरेशन एंड मेटेंनस) का जिम्मा सौंपने का निर्णय,जुलाई में ही कामकाज संभालेगी साैराष्ट्र एनवायरो कंपनी
  • ट्रीटमेंट प्लांट-4 को भी जेडएलडी तकनीक पर करने की तैयारी, कंसलटेंट के लिए 4 कंपनियों के आवेदन आए, सीईटीपी कमेटी ने वीसी कर चयन किया, सबसे कम दर वाली कंपनी से होगा नेगोशिएसन

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 08:25 AM IST

पाली. शहर में फैक्ट्रियों के पानी को ट्रीट करने के लिए प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट-6 को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) तकनीक से जोड़ने का कार्य शीघ्र ही शुरू होने वाला है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने तक प्लांट के संचालन का जिम्मा कार्यकारी एजेंसी को ही सौंपने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। प्लांट के ओएंडएम (ऑपरेशन एंड मेटेंनस) का जिम्मा यही कंपनी संभालेगी।

इसी के साथ कंपनी की तरफ से विदेशी तकनीक का 10 केएलडी का एक पायलट प्रोजेक्ट भी लगाया जाएगा। इस पर आने वाले खर्च को कंपनी खुद ही वहन करेगी। सोमवार को निदेशक मंडल की बैठक में ट्रीटमेंट प्लांट-4 को भी जेडएलडी तकनीक से जोड़ने के लिए कंसल्टेंट कंपनी के चयन को भी अंतिम रूप दिया गया है।

जानकारी के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट-6 को जेडएलडी तकनीक से जोड़ने के लिए कार्यादेश गुजरात की सोराष्ट्र एनवायरो कंपनी के नाम जारी किया जा चुका है। पहले अप्रैल में इसका कार्य शुरू होना था, मगर कोरोना लॉकडाउन के कारण अब यह काम जुलाई में शुरू हो सकता है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने तक प्लांट को निर्धारित मानक पर लाने के लिए सरकार की तरफ से लगातार पर्यावरणीय विशेषज्ञ कंपनी की सेवाएं लेने के लिए निर्देश मिल रहे थे।

इसकी पालना में अब सीईटीपी के निदेशक मंडल में यह कार्य उक्त कंपनी को ही सौंपने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इसी प्रकार ट्रीटमेंट प्लांट दो व चार से प्रदूषित पानी को ट्रीटमेंट प्लांट-6 तक प्राइमरी ट्रीटमेंट करने के बाद लाने का जिम्मेदारी भी उक्त कंपनी पर ही डाली गई है, ताकि टर्सरी तकनीक के ट्रीटमेंट प्लांट-6 तक पानी की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

दावा किया जा रहा है कि कंपनी की तरफ से जुलाई के दूसरे सप्ताह में जेडएलडी प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। सोराष्ट्र एनवायरो कंपनी के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि प्रदूषित पानी के पैरामीटर्स की जांच विषय विशेषज्ञों से कराने के लिए एक टीम पाली में ही रहेगी, जिससे प्लांट निर्धारित मानक पर ही पानी को ट्रीट कर सके।

इस दौरान अध्यक्ष अनिल गुलेच्छा, उपाध्यक्ष अमरचंद समदड़िया, सचिव अरुण जैन, काेषाध्यक्ष सुरेश गुप्ता, निदेशक विनय जैन, रवि मेहता, प्रकाशचंद्र गुंदेचा, अभिषेक बालड़, मुनेश्वरराज मोदी, राजेंद्र भंडारी, रंगराज मेहता व संदीप मेहता मौजूद रहे।

10 केएलडी प्लांट के साथ कंपनी बनाएगी प्रयोगशाला : कंपनी का कहना है कि वे अपने स्तर पर ही 10 केएलडी का पॉयलट प्रोजेक्ट ट्रीटमेंट प्लांट-6 के परिसर में स्थापित करेंगे। इसका पूरा खर्च कंपनी की तरफ से ही वहन किया जाएगा। इसमें नियमित रूप से पानी के पैरामीटर्स की जांच होगी। साथ ही एक विश्वस्तरीय तकनीकी की प्रयोगशाला भी बनाई जाएगी। इसमें लगातार कई प्रायोगिक स्तर होने वाले प्रयोग को निर्धारित मानक पर परखा जाएगा।
कमेटी ने फाइनल की कंसल्टेंट कंपनी, अब नेगोशिएसन होगा
ट्रीटमेंट प्लांट-4 को भी जेडएलडी किया जा रहा है। इस प्लांट के लिए भी राज्य सरकार अपनी तरफ से 50 करोड़ रुपए का अनुदान देने की घोषणा कर चुकी है। शेष राशि उद्यमियों समेत अन्य स्त्रोत से जुटाने का प्रावधान है। इसके लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए एक कंसल्टेंट कंपनी का चयन करने के लिए सीईटीपी ने विनय जैन, प्रकाशचंद्र गुंदेचा, राहुल गुप्ता, प्रांजुल गोगड़ तथा अमित समदड़िया की कमेटी बनाई थी।

इसमें कुल 4 कंपनी ने हिस्सा लिया। इसमें एक कंपनी को रिजेक्ट किया गया। शेष मल्टीमीडिया कंसलटेंट कंपनी प्रा.लि. अहमदाबाद, मैसर्स एनजेएस इंजीनियरिंग प्रा.लि. नई दिल्ली, मैसर्स सेपीयंट टेक्नो कंसल्टेंट सूरत के वित्तीय प्रस्ताव खोले गए। इसमें एल-1 पर रही कंपनी से नेगोशिएशन होने के बाद उसे जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

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