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नई किस्म:पाली में उगाया बैंगनी; काला और हरा गेहूं, लेकिन पौष्टिक नहीं

पालीएक महीने पहले
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बैंगनी, काला और हरे रंग वाला गेहूं जिले के कुछ किसानों को आकर्षित तो कर रहा है, लेकिन भविष्य में इसकी खेती की संभावनाएं कम नही है। दरअसल अब तक के परीक्षणों में यह गेहूं परंपरागत गेहूं से कमतर ही है। जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की फसल पर परीक्षण किया गया।

तीनाें रंग के गेहूं की केवीके में पैदावार की गई। इसे देखकर जिले के कुछ किसानाें ने भी करीब 15 हेक्टेयर में इस किस्म की बुआई की। काले, बैंगनी और हरे रंग के गेहूं को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के महानिदेशक के निर्देश पर गेहूं जाै अनुसंधान निदेशालय ने काले गेहूं की किस्मों का परीक्षण किया।

परीक्षण के दौरान काले गेहूं की उत्पादकता सामान्य गेहूं की तुलना में काफी कम रही। कई रोगों का प्रकोप भी देखने को मिला। काले गेहूं के ट्रायल के पीआई रहे प्रधान देशाविक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि काले गेहूं की तीन जनक द्रव्य (जर्मपलाज्म) के ट्रायल संस्थान में लगाए गए। इसमें काले गेहूं के 09 , 10 और 11 जनक द्रव्य शामिल रहे। इन जनक द्रव्य के साथ गेहूं किस्म एचडी -3086 का चेक लगाया गया।

परीक्षण में 09 जनक द्रव्य 45.5 क्विंटल प्रति हेक्टयेर उपज के साथ 33 स्थान पर रहा, वहीं 011 से प्रति हेक्टयेर 45.6 क्विंटल उपज मिली। यह किस्म 36 वें और 010 किस्म 53.3 क्विंटल उपज के साथ 24 वें स्थान पर रही। चेक वैरायटी 59.7 क्विंटल प्रति हेक्टयेर उपज के साथ तीसरे स्थान पर रही। काले गेहूं का पहले विकास पंजाब के मोहाली स्थित राष्ट्रीय कृषि खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (नादी) ने किया था। नाथी के पास इसका पेटेंट भी है।

नए किस्म के गेहूं की रोटी बेस्वाद, प्रोटीन और आयरन की भी कमी
केवीके में विषय विशेषज्ञाें की निगरानी में परीक्षण किया गया ताे यह गेहूं परंपरागत गेहूं की तुलना में पाैष्टिकता पर खरा नहीं उतरा। परंपरागत गेहूं में 12.6% प्राेटीन, 2% फैट, 68.5% कार्बाेहाइड्रेट, 1.7% शुगर, 0.6 प्रतिशत विटामिन पाया जाता है, लेकिन काले, बैंगनी और हरे रंग के गेहूं की पौष्टिकता पर तो इसमें सामान्य गेहूं की किस्मों की तुलना में ना तो प्रोटीन ज्यादा है और ना ही कार्बाेहाइड्रेट व आयरन की मात्रा है।

इसकी राेटी भी बेस्वाद है। काले गेहूं की उत्पादकता और गुणवत्ता सामान्य गेहूं की किस्मों से भी कमजोर पाया गया है। लेकिन यह परंपरागत गेहूं से अलग दिखने के कारण किसान इसके प्रति आकर्षित हाे रहे हैं।

केवीके में ट्रायल के ताैर पर बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की पैदावार की गई। परीक्षण में यह गेहूं परंपरागत गेहूं की तुलना में पाैष्टिक नहीं है, इसलिए इसकाे उगाने से किसानाें काे मना किया जा रहा है।
- डाॅ. महेंद्र चाैधरी, विषय विशेषज्ञ, केवीके पाली

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